{"_id":"68ec176b8f030396f20fbbc9","slug":"accused-gets-bail-in-corruption-case-of-etp-plant-operation-tender-in-sugar-mill-kurukshetra-news-c-45-1-kur1007-143781-2025-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: शुगर मिल में ईटीपी संयंत्र संचालन टेंडर के भ्रष्टाचार मामले में आरोपी को मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: शुगर मिल में ईटीपी संयंत्र संचालन टेंडर के भ्रष्टाचार मामले में आरोपी को मिली जमानत
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेम राज ने शाहाबाद शुगर मिल में ईटीपी संयंत्र संचालन के लिए 2024-2025 के टेंडर से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपी को नियमित जमानत दी है। यूपी के बिजनौर निवासी पवन कुमार को अंबाला एंटी करप्शन ब्यूरो टीम ने 18 सितंबर से न्यायिक हिरासत में रखा हुआ था।
अभियोजन के अनुसार पवन कुमार ने तकनीकी कर्मचारियों के फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग कर टेंडर हासिल किया और मिल के प्रबंध निदेशक व अन्य कर्मचारियों को रिश्वत दी। डिप्टी चीफ केमिस्ट की शिकायतों के बाद जांच में यह खुलासा हुआ। हालांकि जांच अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत अनुमति न मिलने के कारण मिल के कर्मचारियों को जांच में शामिल नहीं किया जा सका।
वकील ने तर्क दिया कि पवन कुमार निर्दोष है और मामला दीवानी प्रकृति का है, जिसे सिविल कोर्ट में सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है। कोई बरामदगी बाकी नहीं है और पवन कुमार के भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है। लोक अभियोजक मनोज त्यागी ने जमानत का विरोध किया लेकिन जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि सबूत दस्तावेजी हैं और 11 लाख रुपये मिल से पवन कुमार को देय हैं।
विज्ञापन
न्यायाधीश ने पवन कुमार को 50 हजार रुपये के मुचलके और एक जमानती के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया।
विज्ञापन
अभियोजन के अनुसार पवन कुमार ने तकनीकी कर्मचारियों के फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग कर टेंडर हासिल किया और मिल के प्रबंध निदेशक व अन्य कर्मचारियों को रिश्वत दी। डिप्टी चीफ केमिस्ट की शिकायतों के बाद जांच में यह खुलासा हुआ। हालांकि जांच अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत अनुमति न मिलने के कारण मिल के कर्मचारियों को जांच में शामिल नहीं किया जा सका।
विज्ञापन
वकील ने तर्क दिया कि पवन कुमार निर्दोष है और मामला दीवानी प्रकृति का है, जिसे सिविल कोर्ट में सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है। कोई बरामदगी बाकी नहीं है और पवन कुमार के भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है। लोक अभियोजक मनोज त्यागी ने जमानत का विरोध किया लेकिन जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि सबूत दस्तावेजी हैं और 11 लाख रुपये मिल से पवन कुमार को देय हैं।
विज्ञापन
न्यायाधीश ने पवन कुमार को 50 हजार रुपये के मुचलके और एक जमानती के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया।