अब छायाचित्रों से झांकेगा हरियाणा का इतिहास
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प्रदेश की स्थापना के स्वर्ण जयंती वर्ष के तहत राज्य सरकार ने धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को एक और तोहफा दिया है। सरकार ने हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी शहर को दी है। इसके निदेशक डॉ. राघवेंद्र तंवर ने गुरुवार को कार्यभार संभाल लिया है। इस अकादमी के तहत धर्म नगरी को सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर देश और दुनिया में के सामने लाने का मकसद राज्य सरकार का है। अकादमी के जरिये पूरे प्रदेश का सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास पर्यटकों के सामने लाया जाएगा। यह अकादमी ब्रह्म सरोवर स्थित गुलजारी लाल नंदा सदाचार स्थल से संचालित होगी।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए अकादमी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र तंवर ने कहा कि हरियाणा के कण-कण में अनोखा इतिहास और संस्कृति छिपी हुई है। इस इतिहास और संस्कृति को हरियाणा की स्वर्ण जयंती वर्ष में बेहतर तरीके से सहेजने का काम किया जाएगा। इसलिए सरकार ने स्वर्ण जयंती के तहत अकादमी को प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कुरुक्षेत्र में स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सीएम मनोहर लाल के निर्देश पर स्वर्ण जयंती वर्ष के लिए कई गतिविधियां अकादमी की ओर से कराई जाएगी। इन तमाम गतिविधियों के लिए एक शैडयूल निर्धारित किया जाएगा।
इतिहास पर आधारित पत्रिका होगी प्रकाशित
निदेशक तंवर ने बताया कि हरियाणा के इतिहास और संस्कृति पर एक भव्य पत्रिका निकाली जाएगी। इस पत्रिका में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध पत्रों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही इस विषय पर एक उच्च स्तरीय कॉफ्रेंस का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अकादमी की तरफ से पहली बार प्रयास किया जाएगा कि प्रदेश के अब तक के इतिहास को छायाचित्रों के माध्यम से दिखाया जाएगा। इन छायाचित्रों में दुर्लभ से दुर्लभ चित्रों को प्रकाशित किया जाएगा। तंवर ने बताया कि अकादमी ने सौ सालों से ज्यादा पुराने इतिहास को लाइब्रेरी में सहेज लिया है। अब इस इतिहास का डिजिट्लाइजेशन भी कर लिया है।
बंटवारे के दंश से लेकर बाद के विकास तक सब होगा यहां
तंवर ने कहा कि अकादमी की तरफ से बंटवारे के समय तमाम पहलुओं को इतिहास के साथ पेश करने का काम किया जाएगा। बंटवारे के बाद हरियाणा की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और शहरीकरण की आदि व्यवस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ा? इन विषयों को लेकर कांफ्रेंस और प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा। इसके अलावा अकादमी की तरफ से स्वर्ण जयंती वर्ष के लिए कई योजनाएं तैयार की है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने का काम करेगा। इस मौके पर डा. महासिंह पुनिया, डा. अशोक शर्मा, डीआईपीआरओ सुनील कुमार, डा. सुशील कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
हरियाणा की सैनिक परंपरा का भी होगा उल्लेख
डॉ. राघवेंद्र तंवर ने कहा कि हरियाणा की माटी ने देश को हजारों लाखों वीर सैनिक देने का काम किया है। इस प्रदेश के सैनिकों ने हरियाणा का नाम सेना के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। इस इतिहास को भी अकादमी सहेजने का काम करेंगी ताकि युवा पीढ़ी को हरियाणा के वीर योद्धाओं के बारे में जानने का मौका मिले।