{"_id":"5c5c3078bdec22738563e2bc","slug":"91549545592-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ में दिखाई कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने अभिनय प्रतिभा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ में दिखाई कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने अभिनय प्रतिभा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो नंबर - 1
चंडीगढ़ में दिखाई कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने अभिनय प्रतिभा
- सैंया भए कोतवाल नाटक के माध्यम से खोली भ्रष्टाचार की पोल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने चंडीगढ़ में चल रहे 14वें विंटर थियेटर फैस्टिवल में नाटक सैंया भए कोतवाल का शानदार मंचन किया। संदेश दिया कि भाई-भतीजावाद जैसी नीति अपनाकर कोई भी लंबे समय तक अपने पांव नहीं जमा सकता। काबिल लोगों की बजाय सत्ता में भ्रष्ट लोग जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, ऐसी कहानी कह गया सैंया भये कोतवाल। गौरतलब है कि अगस्त 2018 माह में एक महीने की कार्यशाला का आयोजन कर मैक के क्षेत्रीय निदेशक संजय भसीन के निर्देशन में वसंत सबनीस का लिखा नाटक सैंया भए कोतवाल तैयार कराया गया था। अब तक 5 मंचन अलग-अलग शहरों में किए जा चुके हैं। ऐसे में थियेटर फार थियेटर द्वारा तीस दिवसीय नाट्य समारोह में हरियाणा कला परिषद द्वारा नाटक का मंचन कराया गया। तमाशा शैली में मंचित नाटक में सूर्यपुर नगर की कहानी दिखाई गई। मूर्ख राजा रणधीरा के कोतवाल के मरने के बाद सभी को नए कोतवाल की चिंता लग जाती है। इसका फायदा प्रधान उठाता है और अपने बेवकूफ साले को कोतवाल बना देता है। कोतवाल के आगे मैनावती के प्यार का झांसा डाल दिया जाता है। मैनावती कोतवाल से शादी करने की शर्त पर राजा का छपरी पलंग मांग लेती है। हवलदार राजा को भी चोरी की खबर दे देता है। छपरी पलंग आने के बाद कोतवाल जब मैनावती से शादी करने पहुंचता है तो राजा ब्राह्मण का वेश धारण कर शादी कराने पहुंच जाता है, लेकिन बाद में नाटक से जब पर्दा उठता है तो पता चलता है कि दुल्हन मैनावती नहीं बल्कि मैनावती का शागिर्द सख्या है। कलाकारों का अभिनय, संगीत, वेशभूषा तथा संवाद सभी को रोमांचित करने में कामयाब रहा। कोतवाल की भूमिका में रंगकर्मी शिवकुमार किरमच ने सभी को लोटपोट किया। गौरव, दीपक जांगड़ा ने हवलदार और मैनावती की भूमिका पारुल कौशिक ने निभाई। राजा के रूप में नितिन गुप्ता, प्रधान चंचल शर्मा, सख्या आश्रय शर्मा एवं सिपाही की भूमिका में नितिन गंभीर रहे। संगीत संचालन शुभम कल्याण का रहा। मुख्य अतिथि बलकार सिद्धू ने कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर राजवीर राजू, विकास शर्मा, सिद्धार्थ सिद्धू, निकिता शर्मा, अनूप, रजनीश भनौट इत्यादि मौजूद रहे।
विज्ञापन
चंडीगढ़ में दिखाई कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने अभिनय प्रतिभा
- सैंया भए कोतवाल नाटक के माध्यम से खोली भ्रष्टाचार की पोल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने चंडीगढ़ में चल रहे 14वें विंटर थियेटर फैस्टिवल में नाटक सैंया भए कोतवाल का शानदार मंचन किया। संदेश दिया कि भाई-भतीजावाद जैसी नीति अपनाकर कोई भी लंबे समय तक अपने पांव नहीं जमा सकता। काबिल लोगों की बजाय सत्ता में भ्रष्ट लोग जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, ऐसी कहानी कह गया सैंया भये कोतवाल। गौरतलब है कि अगस्त 2018 माह में एक महीने की कार्यशाला का आयोजन कर मैक के क्षेत्रीय निदेशक संजय भसीन के निर्देशन में वसंत सबनीस का लिखा नाटक सैंया भए कोतवाल तैयार कराया गया था। अब तक 5 मंचन अलग-अलग शहरों में किए जा चुके हैं। ऐसे में थियेटर फार थियेटर द्वारा तीस दिवसीय नाट्य समारोह में हरियाणा कला परिषद द्वारा नाटक का मंचन कराया गया। तमाशा शैली में मंचित नाटक में सूर्यपुर नगर की कहानी दिखाई गई। मूर्ख राजा रणधीरा के कोतवाल के मरने के बाद सभी को नए कोतवाल की चिंता लग जाती है। इसका फायदा प्रधान उठाता है और अपने बेवकूफ साले को कोतवाल बना देता है। कोतवाल के आगे मैनावती के प्यार का झांसा डाल दिया जाता है। मैनावती कोतवाल से शादी करने की शर्त पर राजा का छपरी पलंग मांग लेती है। हवलदार राजा को भी चोरी की खबर दे देता है। छपरी पलंग आने के बाद कोतवाल जब मैनावती से शादी करने पहुंचता है तो राजा ब्राह्मण का वेश धारण कर शादी कराने पहुंच जाता है, लेकिन बाद में नाटक से जब पर्दा उठता है तो पता चलता है कि दुल्हन मैनावती नहीं बल्कि मैनावती का शागिर्द सख्या है। कलाकारों का अभिनय, संगीत, वेशभूषा तथा संवाद सभी को रोमांचित करने में कामयाब रहा। कोतवाल की भूमिका में रंगकर्मी शिवकुमार किरमच ने सभी को लोटपोट किया। गौरव, दीपक जांगड़ा ने हवलदार और मैनावती की भूमिका पारुल कौशिक ने निभाई। राजा के रूप में नितिन गुप्ता, प्रधान चंचल शर्मा, सख्या आश्रय शर्मा एवं सिपाही की भूमिका में नितिन गंभीर रहे। संगीत संचालन शुभम कल्याण का रहा। मुख्य अतिथि बलकार सिद्धू ने कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर राजवीर राजू, विकास शर्मा, सिद्धार्थ सिद्धू, निकिता शर्मा, अनूप, रजनीश भनौट इत्यादि मौजूद रहे।