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शहीदों को भूलने वाली कौमें हो जाती हैं नष्ट : कोटड़ा
Updated Mon, 19 Feb 2018 12:40 AM IST
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शहीदों को भूलने वाली कौमें हो जाती हैं समाप्त : कोटड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
खंड के गांव जैनपुर जाटान के बाहर स्थित प्रसिद्ध धरनास्थल पर रविवार को जाट आरक्षण के दौरान मारे गए युवाओं का बलिदान दिवस मनाया गया। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित जिला स्तरीय बलिदान दिवस समारोह में उपस्थित जाट समाज के लोगों ने आंदोलन के शहीदों को फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। बता दें कि इस आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए थे। पुलिस की एक कंपनी को लाडवा थाने में रखा गया था, जबकि15 पुलिस कर्मी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। बलिदान दिवस समारोह के मुख्य अतिथि आरक्षण समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष बलवान कोटड़ा ने कहा कि शहीद समाज-समुदाय की धरोहर होते हैं। जो समाज अपने शहीदों को भूल जाता है, वह समाज नष्ट हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जिन शहीदों का आज बलिदान दिवस मनाया जा रहा है, उन्होंने अपने पारिवारिक झगड़ों या आपराधिक मामलों में जान नहीं दी है, बल्कि जाट समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी है। उन्होंने कहा कि हमें उन बच्चों के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष समिति के कारण ही उन बच्चों के परिवारों को सरकार की ओर से दस-दस लाख रुपये की मुआवजा राशि दिलवाई गई। इसके साथ ही 80-80 लाख रुपये समिति की ओर से दिए गए। उन्होंने कहा कि समिति के संघर्ष के कारण ही उनके परिवारों में से एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दिलवाई गई।
उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती के कारण ही शाह रैली के दौरान सरकार ने दिल्ली में बैठकें कर के लोगों पर बने 75 केस वापस लिए गए। इसके साथ ही चार अन्य मांगों पर भी शीघ्र विचार कर निपटाने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने वादे को शीघ्र पूरा करना चाहिए। सरकार की किसी भी टाल मटोल या झूठे वादे को जाट समाज सहन नहीं करेगा। बलिदान दिवस पर संतोष दहिया, बलदेव राठी, आशीष फौजदार आदि नेताओं ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व संघर्ष समिति के अनेक नेताओं और उपस्थित लोगों ने आरक्षण के दौरान अपने प्राणों का बलिदान करने वाले 31 बच्चों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर ज्ञान सिंह ब्राहण, साहब सिंह जैनपुर, रामपाल चहल, ज्ञान सिंह भूतमाजरा, रणबीर सिंह, जस्सी बरोट, सतपाल बरोट, प्रीतपाल चौधरी, रतन सिंह, पंजाब सिंह, मिहां सिंह, सिया राम आदि उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
खंड के गांव जैनपुर जाटान के बाहर स्थित प्रसिद्ध धरनास्थल पर रविवार को जाट आरक्षण के दौरान मारे गए युवाओं का बलिदान दिवस मनाया गया। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित जिला स्तरीय बलिदान दिवस समारोह में उपस्थित जाट समाज के लोगों ने आंदोलन के शहीदों को फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। बता दें कि इस आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए थे। पुलिस की एक कंपनी को लाडवा थाने में रखा गया था, जबकि15 पुलिस कर्मी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। बलिदान दिवस समारोह के मुख्य अतिथि आरक्षण समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष बलवान कोटड़ा ने कहा कि शहीद समाज-समुदाय की धरोहर होते हैं। जो समाज अपने शहीदों को भूल जाता है, वह समाज नष्ट हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जिन शहीदों का आज बलिदान दिवस मनाया जा रहा है, उन्होंने अपने पारिवारिक झगड़ों या आपराधिक मामलों में जान नहीं दी है, बल्कि जाट समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी है। उन्होंने कहा कि हमें उन बच्चों के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष समिति के कारण ही उन बच्चों के परिवारों को सरकार की ओर से दस-दस लाख रुपये की मुआवजा राशि दिलवाई गई। इसके साथ ही 80-80 लाख रुपये समिति की ओर से दिए गए। उन्होंने कहा कि समिति के संघर्ष के कारण ही उनके परिवारों में से एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दिलवाई गई।
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उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती के कारण ही शाह रैली के दौरान सरकार ने दिल्ली में बैठकें कर के लोगों पर बने 75 केस वापस लिए गए। इसके साथ ही चार अन्य मांगों पर भी शीघ्र विचार कर निपटाने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने वादे को शीघ्र पूरा करना चाहिए। सरकार की किसी भी टाल मटोल या झूठे वादे को जाट समाज सहन नहीं करेगा। बलिदान दिवस पर संतोष दहिया, बलदेव राठी, आशीष फौजदार आदि नेताओं ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व संघर्ष समिति के अनेक नेताओं और उपस्थित लोगों ने आरक्षण के दौरान अपने प्राणों का बलिदान करने वाले 31 बच्चों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर ज्ञान सिंह ब्राहण, साहब सिंह जैनपुर, रामपाल चहल, ज्ञान सिंह भूतमाजरा, रणबीर सिंह, जस्सी बरोट, सतपाल बरोट, प्रीतपाल चौधरी, रतन सिंह, पंजाब सिंह, मिहां सिंह, सिया राम आदि उपस्थित थे।
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