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शाहाबाद की 35 और थानेसर की 21 सहित जिलेभर की 90 पाठशालाएं बंद करने का फरमान
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शिक्षा निदेशालय ने जिलेभर की 90 राजकीय प्राथमिक पाठशाला (जीपीएस) बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इन पाठशालाओं को एक किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य राजकीय पाठशालाओं में मर्ज किया जाएगा। इस संदर्भ में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश भी जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने उन प्राथमिक पाठशालाओं को चयनित कर लिया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम हैं। सबसे ज्यादा प्राथमिक पाठशाला शाहाबाद, थानेसर और बाबैन खंड की हैं। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पत्र में शाहाबाद खंड की 35, थानेसर की 21, बाबैन की 20, लाडवा की 8 और पिहोवा खंड की 6 प्राथमिक पाठशालाएं हैं। इन 90 प्राथमिक पाठशालाओं में फिलहाल 1248 विद्यार्थियों का नामांकन है।
शिक्षक संघ ने शुरू किया विरोध
प्राथमिक पाठशालाएं बंद करने के फैसले का राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने विरोध करना शुरू कर दिया है। संघ का कहना है कि शिक्षा मौलिक अधिकार है, जिसके तहत एक किलोमीटर के दायरे में राजकीय स्कूल जरूरी है। सरकार इन प्राथमिक पाठशालाओं को मर्ज कर बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। तीन वर्ष पहले भी 20 से कम छात्र संख्या वाले 52 राजकीय प्राथमिक स्कूलों पर मर्ज करने के आदेश जारी किए थे। 2010 में शिक्षा निदेशालय ने कम छात्र संख्या का हवाला देकर कई पाठशालाओं को बंद कर दूसरे में मर्ज किया था।
प्रत्येक बच्चे को शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार प्राथमिक स्कूलों को बंद कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। अगर स्कूल दूसरे गांव के स्कूल में मर्ज किया जाएगा तो बच्चे कैसे पहुंचेंगे। मजदूरी करने वाले माता-पिता के पास इतना समय नहीं होता कि वह बच्चे को सुबह स्कूल छोड़कर आएंगे और दोपहर दोबारा लेने जाएंगे।
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देवदत्त, जेबीटी
बच्चों को उनके घर के नजदीक शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार इन पाठशालाओं को बंद कर बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। शिक्षक संघ इसका पूरा विरोध करेगा। इस मामले में शिक्षक संघ शिक्षा अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
राजेंद्र टंडन, जिला प्रधान राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
बाक्स
जिले में 491 राजकीय प्राथमिक पाठशालाएं हैं। कुछ समय पहले शिक्षा निदेशालय द्वारा उन स्कूलों की रिपोर्ट तलब की गई थी, जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है, लेकिन अब इन स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। इसकी सूचना उनके पास नहीं है।
अरुण आश्री, जिला शिक्षा अधिकारी
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शिक्षक संघ ने शुरू किया विरोध
प्राथमिक पाठशालाएं बंद करने के फैसले का राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने विरोध करना शुरू कर दिया है। संघ का कहना है कि शिक्षा मौलिक अधिकार है, जिसके तहत एक किलोमीटर के दायरे में राजकीय स्कूल जरूरी है। सरकार इन प्राथमिक पाठशालाओं को मर्ज कर बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। तीन वर्ष पहले भी 20 से कम छात्र संख्या वाले 52 राजकीय प्राथमिक स्कूलों पर मर्ज करने के आदेश जारी किए थे। 2010 में शिक्षा निदेशालय ने कम छात्र संख्या का हवाला देकर कई पाठशालाओं को बंद कर दूसरे में मर्ज किया था।
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प्रत्येक बच्चे को शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार प्राथमिक स्कूलों को बंद कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। अगर स्कूल दूसरे गांव के स्कूल में मर्ज किया जाएगा तो बच्चे कैसे पहुंचेंगे। मजदूरी करने वाले माता-पिता के पास इतना समय नहीं होता कि वह बच्चे को सुबह स्कूल छोड़कर आएंगे और दोपहर दोबारा लेने जाएंगे।
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देवदत्त, जेबीटी
बच्चों को उनके घर के नजदीक शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार इन पाठशालाओं को बंद कर बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। शिक्षक संघ इसका पूरा विरोध करेगा। इस मामले में शिक्षक संघ शिक्षा अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
राजेंद्र टंडन, जिला प्रधान राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
बाक्स
जिले में 491 राजकीय प्राथमिक पाठशालाएं हैं। कुछ समय पहले शिक्षा निदेशालय द्वारा उन स्कूलों की रिपोर्ट तलब की गई थी, जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है, लेकिन अब इन स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। इसकी सूचना उनके पास नहीं है।
अरुण आश्री, जिला शिक्षा अधिकारी