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श्रीराम कथा में सुनाया गया राम विवाह प्रसंग
Updated Thu, 02 Aug 2018 01:25 AM IST
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श्रीराम कथा में सुनाया गया राम विवाह प्रसंग
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। श्री महाकाली मंदिर सुंदरपुर में श्री राम कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित प्रेम नारायण अवस्थी (चित्रकूट वाले) ने श्रीरामजानकी विवाह प्रसंग सुनाया। यह कथा रविवार 5 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक चलेगी। सभी श्रद्धालुओं ने श्री राम पूजन करके कथावाचक अवस्थी को तिलक लगाया। श्रीराम विवाह प्रसंग के अलावा परशुराम- लक्ष्मण संवाद, चारों भाईयों के फेरे और अयोध्या में विवाह का आनंद मंगल आदि प्रसंग भी सुनाए गए। राम कथा सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि वन गमन करते समय ऋषि विश्वामित्र को राजा जनक द्वारा भेजी हुई कुमकुम पत्रिका मिलती है और विश्वामित्र राम-लक्ष्मण के साथ जनकपुरी में राजकुमारी सीता के स्वंयवर में पहुंचते है। राम सीता की प्रथम भेंट एक पुष्पवाटिका में होती है जहां सीता अपनी सखियों सहित गौरी पूजन के लिए पुष्प तोडती है। जैसे ही माता सीता श्री राम को देखती है तो अपनी दोनों आंखें बंद कर लेती है। सीता स्वयंवर में रखी गई शर्त के अनुसार सभी राजा शिव धनुष पर कोई भी राजा प्रत्यंचा नहीं चढा पाया। राम आरती में बसंत लाल रोहिला, एन के प्रसाद, पूर्ण चंद, दिलावर, संजय चौधरी, श्याम रावत, सुनीता, रूप कली, रक्षा रानी, शकुंतला, कविता, सोनिया, कमलेश नैन, और वीणा देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। श्री महाकाली मंदिर सुंदरपुर में श्री राम कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित प्रेम नारायण अवस्थी (चित्रकूट वाले) ने श्रीरामजानकी विवाह प्रसंग सुनाया। यह कथा रविवार 5 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक चलेगी। सभी श्रद्धालुओं ने श्री राम पूजन करके कथावाचक अवस्थी को तिलक लगाया। श्रीराम विवाह प्रसंग के अलावा परशुराम- लक्ष्मण संवाद, चारों भाईयों के फेरे और अयोध्या में विवाह का आनंद मंगल आदि प्रसंग भी सुनाए गए। राम कथा सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि वन गमन करते समय ऋषि विश्वामित्र को राजा जनक द्वारा भेजी हुई कुमकुम पत्रिका मिलती है और विश्वामित्र राम-लक्ष्मण के साथ जनकपुरी में राजकुमारी सीता के स्वंयवर में पहुंचते है। राम सीता की प्रथम भेंट एक पुष्पवाटिका में होती है जहां सीता अपनी सखियों सहित गौरी पूजन के लिए पुष्प तोडती है। जैसे ही माता सीता श्री राम को देखती है तो अपनी दोनों आंखें बंद कर लेती है। सीता स्वयंवर में रखी गई शर्त के अनुसार सभी राजा शिव धनुष पर कोई भी राजा प्रत्यंचा नहीं चढा पाया। राम आरती में बसंत लाल रोहिला, एन के प्रसाद, पूर्ण चंद, दिलावर, संजय चौधरी, श्याम रावत, सुनीता, रूप कली, रक्षा रानी, शकुंतला, कविता, सोनिया, कमलेश नैन, और वीणा देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।