{"_id":"5a14725f4f1c1b70548bea55","slug":"81511289439-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"21वें दिन में पहुंचा अतिथि अध्यापकों का धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
21वें दिन में पहुंचा अतिथि अध्यापकों का धरना
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
21वें दिन में पहुंचा अतिथि अध्यापकों का धरना
अमर उजाला ब्यूूरो
शाहाबाद।
अतिथि अध्यापकों की ओर से नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदेश के सभी मंत्रियों के आवास पर दिया जा रहा क्रमिक अनशन 21वें दिन भी जारी रहा। शाहाबाद में राज्यमंत्री कृष्ण बेदी के आवास के बाहर बबैन खंड के कपिल, चरण सिंह, राजबीर, राजकरण और मनोज शर्मा अनशन पर बैठे। उन्होंने बताया कि जब तक प्रदेश सरकार जब हटाए गए जेबीटी अतिथि अध्यापकों का समायोजन और अन्य मांगों को नहीं मान लेती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
प्रदेश प्रवक्ता राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के अपने वादे से मुकर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के प्रति भी दोहरा मापदंड अपना रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कच्चे कर्मचारी को भी नियमित कर्मचारी के समान वेतन देने का आदेश दिया है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। बताया कि सरकार के नुमाइंदों का यह कहना है कि यदि कोई विभाग अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देना चाहता है तो वह सरकार से इसकी सिफारिश कर सकता है। इससे यह पता चलता है कि सरकार कोर्ट का आदेश लागू ही नहीं करना चाहती।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूूरो
शाहाबाद।
अतिथि अध्यापकों की ओर से नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदेश के सभी मंत्रियों के आवास पर दिया जा रहा क्रमिक अनशन 21वें दिन भी जारी रहा। शाहाबाद में राज्यमंत्री कृष्ण बेदी के आवास के बाहर बबैन खंड के कपिल, चरण सिंह, राजबीर, राजकरण और मनोज शर्मा अनशन पर बैठे। उन्होंने बताया कि जब तक प्रदेश सरकार जब हटाए गए जेबीटी अतिथि अध्यापकों का समायोजन और अन्य मांगों को नहीं मान लेती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
प्रदेश प्रवक्ता राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के अपने वादे से मुकर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के प्रति भी दोहरा मापदंड अपना रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कच्चे कर्मचारी को भी नियमित कर्मचारी के समान वेतन देने का आदेश दिया है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। बताया कि सरकार के नुमाइंदों का यह कहना है कि यदि कोई विभाग अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देना चाहता है तो वह सरकार से इसकी सिफारिश कर सकता है। इससे यह पता चलता है कि सरकार कोर्ट का आदेश लागू ही नहीं करना चाहती।
विज्ञापन