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चार दिनों से पारा 37 डिगी के आसपास
Updated Sat, 19 Aug 2017 12:48 AM IST
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फोटो न- 21 व 22
बढ़ रहे हैं वायरल, दस्त और डायरिया के रोगी
-जिला अस्पताल में ओपीडी 1700 के पार
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मौसम में बदलाव के कारण उल्टी, वायरल बुखार, दस्त, डायरिया, काला पीलिया आदि के मरीज बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा वायरल बुखार के मरीज आ रहे हैं। आउटडोर में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों से दोगुनी हो गई है। पिछले चार-पांच दिनों से उमस व पारे के लगातार चढ़ने से लोगों का बुरा हाल है। तापमान में तेजी मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा रही है। एलएनजेपी अस्पताल में ओपीडी सामान्य दिनों में 600 से 700 तक ही आंकड़ा छू पाती है, लेकिन अब यह आंकड़ा 1700 तक पहुंच गया है। अस्पताल में रोजाना 80-120 मरीज वायरल बुखार, 30-40 मरीज काला पीलिया, 150-200 मरीज जुकाम, खांसी आदि के आ रहे हैं।
गर्मी की वजह से अस्पताल में आंख, चर्म, वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। एलएनजेपी अस्पताल में शुक्रवार को 1700 से ज्यादा मरीज विभिन्न ओपीडी में पहुंचे। इनमें ज्यादातर मरीज गर्मी के कारण आंखों में संक्रमण व फ्लू, वायरल बुखार के मरीजों में तेजी आई है। इसके अलावा, ओपीडी में सैकड़ों मरीज को एक पंखे के सहारे छोड़ दिया जाता है। खुले में बैठे मरीज व उनके परिजन कागज व हाथ पंखे से हवा करते नजर आते हैं। एक वार्ड के अंदर इतने मरीजों के होने के कारण वार्ड में घुटन का माहौल बना रहता है।
वाटर कूलर खराब, गर्मी ने किया बेहाल
एलएनजेपी अस्पताल में आए राजीव ने बताया कि रोजाना अस्पताल में 1700 से अधिक मरीज आते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में पीने के पानी की किल्लत है। अस्पताल परिसर में लगे अधिकतर वॉटर कूलर खराब है। इसके कारण मरीजों और उनके साथ आए लोगों को पानी पीने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन को पानी के लिए कोई पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
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वायरल के लक्षण
सिर दर्द, उल्टी आना, जोड़ों मे दर्द होना, बुखार होना, कंपकंपी सी होना, सांस लेने में दिक्कत महसूस होना
बचाव
ताजा भोजन लेना चाहिए
पूरी बाजू के कपडे़ पहनने चाहिए
खाना-खाने से पहले हाथ धोने चाहिए
----
मौसम में हो रहे बदलाव के कारण बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है। गर्मी व उमस के कारण सर्दी, जुकाम व वायरल बुखार के मरीजों मेें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में लोगों को बीमारियों से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए व उक्त लक्षणों के दिखते ही अस्पताल में अपनी जांच करवानी चाहिए।
- एसके नैन, जिला स्वास्थ्य अधिकारी
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बढ़ रहे हैं वायरल, दस्त और डायरिया के रोगी
-जिला अस्पताल में ओपीडी 1700 के पार
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मौसम में बदलाव के कारण उल्टी, वायरल बुखार, दस्त, डायरिया, काला पीलिया आदि के मरीज बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा वायरल बुखार के मरीज आ रहे हैं। आउटडोर में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों से दोगुनी हो गई है। पिछले चार-पांच दिनों से उमस व पारे के लगातार चढ़ने से लोगों का बुरा हाल है। तापमान में तेजी मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा रही है। एलएनजेपी अस्पताल में ओपीडी सामान्य दिनों में 600 से 700 तक ही आंकड़ा छू पाती है, लेकिन अब यह आंकड़ा 1700 तक पहुंच गया है। अस्पताल में रोजाना 80-120 मरीज वायरल बुखार, 30-40 मरीज काला पीलिया, 150-200 मरीज जुकाम, खांसी आदि के आ रहे हैं।
गर्मी की वजह से अस्पताल में आंख, चर्म, वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। एलएनजेपी अस्पताल में शुक्रवार को 1700 से ज्यादा मरीज विभिन्न ओपीडी में पहुंचे। इनमें ज्यादातर मरीज गर्मी के कारण आंखों में संक्रमण व फ्लू, वायरल बुखार के मरीजों में तेजी आई है। इसके अलावा, ओपीडी में सैकड़ों मरीज को एक पंखे के सहारे छोड़ दिया जाता है। खुले में बैठे मरीज व उनके परिजन कागज व हाथ पंखे से हवा करते नजर आते हैं। एक वार्ड के अंदर इतने मरीजों के होने के कारण वार्ड में घुटन का माहौल बना रहता है।
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वाटर कूलर खराब, गर्मी ने किया बेहाल
एलएनजेपी अस्पताल में आए राजीव ने बताया कि रोजाना अस्पताल में 1700 से अधिक मरीज आते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में पीने के पानी की किल्लत है। अस्पताल परिसर में लगे अधिकतर वॉटर कूलर खराब है। इसके कारण मरीजों और उनके साथ आए लोगों को पानी पीने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन को पानी के लिए कोई पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
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वायरल के लक्षण
सिर दर्द, उल्टी आना, जोड़ों मे दर्द होना, बुखार होना, कंपकंपी सी होना, सांस लेने में दिक्कत महसूस होना
बचाव
ताजा भोजन लेना चाहिए
पूरी बाजू के कपडे़ पहनने चाहिए
खाना-खाने से पहले हाथ धोने चाहिए
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मौसम में हो रहे बदलाव के कारण बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है। गर्मी व उमस के कारण सर्दी, जुकाम व वायरल बुखार के मरीजों मेें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में लोगों को बीमारियों से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए व उक्त लक्षणों के दिखते ही अस्पताल में अपनी जांच करवानी चाहिए।
- एसके नैन, जिला स्वास्थ्य अधिकारी