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महिला ही संस्कृति है तथा संस्कृति ही महिला है, वर्तमान की समस्याओं के समाधान के लिए हमें इसे समझना पड़ेगा: इंद्रेश

Fri, 22 Feb 2019 12:32 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Feb 2019 12:32 AM IST
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महिला ही संस्कृति है तथा संस्कृति ही महिला है, वर्तमान की समस्याओं के समाधान के लिए हमें इसे समझना पड़ेगा: इंद्रेश
बेटी को बोझ मानने का अर्तद्वंद दूर करें : इंद्रेश
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- विश्वविद्यालय में विकास हेतु विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में लैंगिक सहभागिता विषय पर सेमिनार
- महिलाएं हर क्षेत्र में आगे, विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत: कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र । फोरम फार अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी के प्रमुख संरक्षक तथा राष्ट्री स्वयंसेवक संघ के वरिष्ट प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही महिलाओं का उच्च स्थान रहा है परन्तु आज जेंडर शब्द अर्तद्वंद पैदा कर रहा है। एक मां की कोख से ही सारे वैज्ञानिक तथा महापुरुष पैदा हुए हैं फिर आज बेटी को बोझ क्यों माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अर्तद्वंद हमारे मस्तिष्क तथा दिलों में है विज्ञान की दृष्टि से हमे इस सत्य को स्वीकार करना होगा।
वे वीरवार को विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन शोध केंद्र तथा हरियाणा विज्ञान भारती विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में लैंगिक सहभागिता विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिला ही संस्कृति है तथा संस्कृति ही महिला है तथा हमें महिलाओं के योगदान को समझना पड़ेगा तभी सारी समस्याओं का समाधान हो पायेगा।
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सेमीनार के उद्घाटन सत्र में कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि विकास में महिला तथा पुरुष दोनों की बराबर की भागीदारी होनी चाहिए। महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। वे विज्ञान के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि आज के समाज में यह सोच व्याप्त है कि महिलाओं की शिक्षा की प्राथमिकता दूसरे दर्जे पर है। इस प्रकार की सोच को संस्कृति नहीं कहा जा सकता। यह अपसंस्कृति है। महिलाओं के प्रति यह सोच हमारी मानसिक वृत्ति के कारण है। इस सेमीनार में विश्वविद्यालयों तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालयों से लगभग 150 महिला प्राध्यापकों, शोद्यार्थियों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र के अंत में विज्ञान भारती, हरियाणा के सचिव प्रो. ज्ञान प्रकाश दुबे ने धन्यवाद भाषण दिया। इस अवसर पर विज्ञान भारती, हरियाणा के संरक्षक प्रो. आर.एम.पी. जायसवाल, जे.सी.बोस विज्ञान तथा प्रोद्यौगिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश अग्रवाल, प्रो. ओम प्रकाश, प्रो. संजीव अरोड़ा, केन्द्र की पूर्व निदेषिका प्रो. ऋचा तंवर, डा. वन्दना दवे, सेमीनार की सह-समन्वयक डॉ. रश्मी पुंडीर, मोहित, राजेश गोयल भी उपस्थित थे।
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महिलाओं की विज्ञान तथा प्रौद्योगिक में भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास : अग्रवाल
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कार्यक्रम का प्रारम्भ महिला अध्ययन शोध केंद्र की निदेशिका प्रो. रंजना अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय इतिहास को देखें तो अनेक महिलाओं ने विज्ञान के क्षेत्र में अपना योगदान किया है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर महिलाओं की विज्ञान तथा प्रौद्योगिक में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं ताकि उनको भी मुख्य धारा में शामिल करके विज्ञान में लैंगिक समानता को सुनिश्चित किया जा सके। इस अवसर पर महिला अध्ययन शोध केंद्र द्वारा प्रकाशित पुस्तक च्कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षण, शोध एवं प्रशासनिक नीतियों का लैंगिक परिप्रेक्ष्य में अध्ययनच् का विमोचन किया गया। इस सेमीनार में विश्वविद्यालयों तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालयों से लगभग 150 महिला प्राध्यापकों, शोद्यार्थियों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया।
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