फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   नौ दिनों से एनएचएम कर्मियों की हड़ताल जारी, स्वास्थ्य सेवाएं हुई बेहाल

नौ दिनों से एनएचएम कर्मियों की हड़ताल जारी, स्वास्थ्य सेवाएं हुई बेहाल

Thu, 14 Feb 2019 01:07 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 14 Feb 2019 01:07 AM IST
विज्ञापन
नौ दिनों से एनएचएम कर्मियों की हड़ताल जारी, स्वास्थ्य सेवाएं हुई बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। पिछले नौ दिनों से चल रही एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेहाल हो चुकी है। मरीजों को दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। एलएनजेपी सिविल अस्पताल में भी चिकित्सकों व कर्मियों की किल्लत के चलते सामान् मरीजों को उपचार दिए जाने से किनारा किया जाने लगा है जबकि अस्पताल में गंभीर मरीजों को ही उपचार के लिए दाखिल किया जा रहा है। सामान्य मरीजों ने अब सिविल अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार न मिलने पर निजी अस्पतालों की ओर रूख करना शुरू कर दिया है, जहां उनकी मजबूरी का निजी चिकित्सक भी भरपूर फायदा उठा रहे है।
ऐसे हालात में एनएचएम कर्मियों की हड़ताल शुक्रवार तक जारी रखने का ऐलान कर दिया गया है, जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति ओर भी गंभीर होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं बुधवार को भी जिलाभर के 399 कर्मियों ने लंबित मांगों को लेकर बुधवार को भी हड़ताल जारी रखी। कर्मचारी मोहित कुमार, मोहन लाल, बलबीर सिंह, भूपेंद्र सिंह व जितेंद्र सिंह ने मुंडन कराया तो वहीं सरकार एवं विभाग के उच्चाधिकारियों को सदबुद्वि को लेकर हवन यज्ञ का भी आयोजन किया। इसके लिए जयराम विद्यापीठ से चार पंडित भी बुलाए गए तो वहीं कर्मचारी दिन भर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करते रहे। इस अवसर पर जिला प्रधान विक्रम संग्रोहा, संयोजक डॉ सुरेश शर्मा, महासचिव राजेश गुर्जर, सह सचिव कृष्ण शर्मा, प्रेस सचिव नीलकंठ शर्मा,साहब सिंह, पिंकी मलिक, सोहन, प्रवेश, डा विपिन, प्रवीण सैनी, कुसुम श्योरण व नरेश सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
विज्ञापन


बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे बेअसर
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल पांच फरवरी को शुरू हुई थी, जिसका असर पहले ही दिन पड़ने लगा था। हालांकि विभाग के अधिकारियों द्वारा अभी भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे जरूर किए जा रहे है, लेकिन सिविल अस्पताल में अधिकारियों के दावे धरातल पर दम तोड़ने नजर आ रहे है। एलएनजेपी अस्पताल में बुधवार को भी मरीज व तीमारदार एंबुलेंस सेवाओं के लिए भटकते रहे। सरकारी के अभाव में मरीजों को निजी एंबुलेंस एवं अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ा, जिसके चलते मरीजों की जेब भी ढीली हुई। वहीं कुछ मरीज ऐसे भी थे, जिन्हें बेहतर प्रबंधों के अभाव के चलते सिविल अस्पताल से आपात स्थिति में रेफर किया जाता रहा, लेकिन निजी वाहन चालकों द्वारा ज्यादा किराया मांगने पर तीमारदारों ने अपने रिस्क पर मरीज को एलएनजेपी में ही दाखिल कराने को लेकर मजबूर होना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनएचएम कर्मियों के सहारे ही बढ़े लिंगानुपात : कुलविंद्र
संघ की राज्य सह सचिव कुलविंदर कौर ने कहा कि 12 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ शक्ति समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पीठ थपथपाते हुए लिंगानुपात में बेहतर सुधार करने की बधाई दी। इस उपलब्धी में एनएचएम कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वैसे तो सरकार महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे है, लेकिन एनएचएम के तहत पिछले 20 वर्षों से कार्य कर रही कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है।

जब स्थायी स्टाफ नर्स ने सीएमओ के समक्ष लगाई गुहार

एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के चलते मरीजों की देखरेख का भार सिविल अस्पताल सहित सभी प्राथमिक व सामुदायिक केंद्रों में कार्यरत स्थाई स्टाफ नर्स पर पड़ गया है। हड़ताल के चलते स्थाई स्टाफ कर्मियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बुधवार को इस संदर्भ में एलएनजेपी अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स ने सिविल सर्जन डा. सुखबीर सिंह से समक्ष गुहार लगाई कि अस्पताल में अतिरिक्त स्टाफ नर्स की व्यवस्था कराई जाए।

पहले के मुकाबले आधी रह गई मरीजों की संख्या
एलएनजेपी अस्पताल में एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के चलते पहले की मुकाबले मरीजों की आधी संख्या रह गई है। बता दें कि अस्पताल में औसत 400 मरीज दाखिल रहते थे। जब से एनएचएम कर्मी हड़ताल पर उतरे हैं तभी से यहां कार्यरत स्थाई स्टाफ को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसी को देखते हुए चिकित्सक अब उन मरीजों को दाखिल करते है, जिसको उपचार देना बेहद जरूरी होता है। बुधवार को अस्पताल में कुल 198 मरीज दाखिल रहे। जबकि अस्पताल के गायनी विभाग में बुधवार सुबह तक 68 जच्चा-बच्चा।

आपात स्थिति में ही मरीज को मिलती है एंबुलेंस
बुधवार को जिलेभर में सिर्फ तीन सरकारी एंबुलेंस सिटी, शाहाबाद व लाडवा उपलब्ध रही। यह एंबुलेंस सिर्फ सड़क दुघटनाओं में घायल हुए लोगों व सिविल अस्पताल से आपात स्थिति में चंडीगढ़ पीजीआई के लिए रेफर हुए मरीजों के लिए उपलब्ध है। बताया जा रहा है कि जब से कर्मचारी हड़ताल पर उतरे हैं तभी से गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई जा रही। गर्भवतियों को डिलीवरी के लिए ही निजी वाहनों से ही अस्पताल तक पहुंचाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed