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Kurukshetra News: 55 राइस मिलों पर अभी भी पांच लाख क्विंटल चावल बकाया, 30 सितंबर तक करा सकेंगे जमा
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कुरुक्षेत्र। जिले के 55 राइस मिलों को अभी भी करीब पांच लाख क्विंटल कस्टम मिल्ड राइस सरकार को लौटाना है। सरकार ने अब इन्हें बड़ी राहत दी है। अब डिफाल्टर और बकाया श्रेणी के राइस मिलर अब आगामी 30 सितंबर तक सरकार का चावल लौटा सकेंगे। इससे पहले सरकार द्वारा इसके लिए 30 जून की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन तय समय सीमा के भीतर सभी मिलर सरकारी चावल गोदामों में जमा करवाने में पूरी तरह नाकाम रहे थे। सात फीसदी बकाया चावल को जमा कराने के लिए समय सीमा समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सहित विभिन्न खरीद एजेंसियों की ओर से नोटिस भी जारी किए गए थे। मिलरों की ओर से चावल लौटाने के लिए सरकार से और समय देने की मांग की जा रही थी, जिसे स्वीकार करते हुए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय ने अब सितंबर के अंत तक का समय दे दिया है
धान के सीजन के दौरान सरकारी एजेंसियां (हैफेड, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, वेयरहाउस) धान खरीदकर मिलरों को छंटाई और कुटाई के लिए सौंपती हैं। नियमों के मुताबिक, मिलरों को इस धान से तैयार चावल का एक निश्चित प्रतिशत (सीएमआर) वापस सरकारी गोदामों में जमा कराना होता है। जिले के 180 में से 55 मिलरों ने तय अनुपात में व तय समय तक चावल वापस नहीं किया, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करोड़ों में आंकी गई है। इस भारी वित्तीय नुकसान और सरकारी स्टॉक में कमी को देखते हुए सरकार ने प्रक्रिया को तेज कर दिया था लेकिन अब फिर कुछ राहत दी है।
डीएफएसी बोले- तय समय में चावल लौटाना जरूरी
डीएफएससी नरेश कुमार का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार 30 सितंबर की यह समय सीमा लगभग अंतिम है। यदि इस विस्तारित अवधि के भीतर भी मिलरों ने बकाया चावल सरकारी गोदामों में डिलीवर नहीं किया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। मिलर्स को तय समय तक चावल जमा अवश्य कराना चाहिए।
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धान के सीजन के दौरान सरकारी एजेंसियां (हैफेड, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, वेयरहाउस) धान खरीदकर मिलरों को छंटाई और कुटाई के लिए सौंपती हैं। नियमों के मुताबिक, मिलरों को इस धान से तैयार चावल का एक निश्चित प्रतिशत (सीएमआर) वापस सरकारी गोदामों में जमा कराना होता है। जिले के 180 में से 55 मिलरों ने तय अनुपात में व तय समय तक चावल वापस नहीं किया, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करोड़ों में आंकी गई है। इस भारी वित्तीय नुकसान और सरकारी स्टॉक में कमी को देखते हुए सरकार ने प्रक्रिया को तेज कर दिया था लेकिन अब फिर कुछ राहत दी है।
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डीएफएसी बोले- तय समय में चावल लौटाना जरूरी
डीएफएससी नरेश कुमार का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार 30 सितंबर की यह समय सीमा लगभग अंतिम है। यदि इस विस्तारित अवधि के भीतर भी मिलरों ने बकाया चावल सरकारी गोदामों में डिलीवर नहीं किया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। मिलर्स को तय समय तक चावल जमा अवश्य कराना चाहिए।
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