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डॉक्टर साहब, तीन दिन से गोली तक नहीं मिली, यदि आपकी वाईफ होती तो क्या करते ?
Updated Fri, 05 Oct 2018 01:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सकों में वीरवार को उस समय हड़कंप मच गया जब यहां उपचाराधीन एक गर्भवती महिला का अचानक गर्भपात हो गया। इससे परिजन भड़क उठे और स्पताल में जमकर हंगामा किया, साथ ही चिकित्सकों को भी जमकर खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद उन्होंने पीड़ित महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल के समक्ष करीब 20 मिनट तक कुरुक्षेत्र- कैथल मार्ग जाम कर दिया और चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया। हालांकि कुछ समय बाद राहगीरों के समझाने के बाद परिजन महिला को इलाज के लिए वापस अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने महिला को उपचार देने शुरू कर दिया। मौके पर शिकायत सुनने पहुुंचे चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएस अरोड़ा पर महिला के परिजनों ने खूब भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब, गर्भवती महिला केे पिछले तीन दिन से गोली तक नहीं मिली, यदि आपकी पत्नी होती तो आप क्या करते। इस पर चिकित्सक कोई जवाब नहीं दे पाए। इस दौरान सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच बीच बचाव किया।
प्रदर्शन कर रहे गांव गामड़ी जटान वासी एवं पीड़ित महिला के पति नरेंद्र कुमार, ससुर मेहर चंद, चाची सुदेश रानी ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। गर्भवती महिला के पति नरेंद्र कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी राखी देवी चार माह की गर्भवती थी। उसको पेट दर्द के चलते ही दो अक्तूबर को एलएनजेपी अस्पताल में दाखिल कराया था। इसके बाद यहां चिकित्सकों के कहने पर गत बुधवार को अल्ट्रासाउंड कराया, लेकिन चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट की जांच गंभीरता से नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां चिकित्सकों ने पिछले तीन दिनों से उसकी पत्नी को एक गोली तक नहीं दी। चिकित्सकों की लापरवाही से प्रसूति विभाग के शौचालय में वीरवार दोपहर करीब दो बजे उसकी पत्नी का गर्भपात हो गया। बावजूद इसके चिकित्सकों ने फिर भी उसकी पत्नी की संभाल नहीं की और वो दर्द में तड़पती रही। चिकित्सकों द्वारा बरती गई लापरवाही से खफा होकर परिजनों ने महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर पहले चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनजीत सिंह कार्यालय के समक्ष बवाल काटा, फिर सिविल अस्पताल के समक्ष कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग जाम लगा दिया। हालांकि कई बार पहले भी सिविल अस्पताल के प्रसूति विभाग में महिला चिकित्सकों की लेकर हंगामे हो चुके है और डिलीवरी के लिए पहुंच रही गर्भवती महिलाओं के परिजनों भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे है। बता दें कि 28 अगस्त को प्रसूति विभाग में महिला चिकित्सकों की कमी को लेकर गर्भवती के परिजनों ने कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग को करीब आधे घंटे तक जाम कर दिया। जाम के चलते वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में फंसे वाहन निकालने के किए वाहन चालकों ने कड़ी मक्कशत करनी पड़ी। महिला के परिजनों का कहना है कि इस बारे में वे शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिज विज से मुलाकात करेंगे।
परिजन बोले, कार्यालय से ही गायब हो गए एमएस
पीड़ित महिला के ससुर मेहर चंद ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की लापरवाही की शिकायत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनजीत सिंह को दी थी। एमएस डॉ. मनजीत ने चिकित्सकों की लापरवाही पर संज्ञान नहीं लिया और अपने कार्यालय के गायब हो गए।
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पुलिस ने अस्पताल में पहुंच संभाला मोर्चा
अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलते ही केयूके थाना प्रभारी छोटूराम सहित थर्ड गेट चौकी प्रभारी सहित अन्य पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। हंगामा कर रहे गर्भवती महिलाओं के परिजनों को समझाकर शांत कराया। हालांकि इसके बाद भी अस्पताल परिसर में कई पुलिस कर्मी तैनात रहे।
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महिला के परिजनों द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद है। गर्भवती महिला को जब सिविल अस्पताल में दाखिल किया गया, तब उसकी स्थिति गंभीर थी। जब चिकित्सकों ने गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया तो वह छह सप्ताह की गर्भवती थी और उसके भ्रूण में धड़कन नहीं थी। वीरवार को उसे उल्टी लगी तो इसी दौरान उसका प्राकृतिक रूप से गर्भपात हुआ। स्टाफ की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। महिला चिकित्सकों द्वारा जांच की जा रही है। यहीं अब उस महिला को उपचार के लिए प्रसूति विभाग में दाखिल किया गया है।
डॉ. मनजीत सिंह, चिकित्सा अधिकारी, एलएनजेपी अस्पताल।
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कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सकों में वीरवार को उस समय हड़कंप मच गया जब यहां उपचाराधीन एक गर्भवती महिला का अचानक गर्भपात हो गया। इससे परिजन भड़क उठे और स्पताल में जमकर हंगामा किया, साथ ही चिकित्सकों को भी जमकर खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद उन्होंने पीड़ित महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल के समक्ष करीब 20 मिनट तक कुरुक्षेत्र- कैथल मार्ग जाम कर दिया और चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया। हालांकि कुछ समय बाद राहगीरों के समझाने के बाद परिजन महिला को इलाज के लिए वापस अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने महिला को उपचार देने शुरू कर दिया। मौके पर शिकायत सुनने पहुुंचे चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएस अरोड़ा पर महिला के परिजनों ने खूब भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब, गर्भवती महिला केे पिछले तीन दिन से गोली तक नहीं मिली, यदि आपकी पत्नी होती तो आप क्या करते। इस पर चिकित्सक कोई जवाब नहीं दे पाए। इस दौरान सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच बीच बचाव किया।
प्रदर्शन कर रहे गांव गामड़ी जटान वासी एवं पीड़ित महिला के पति नरेंद्र कुमार, ससुर मेहर चंद, चाची सुदेश रानी ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। गर्भवती महिला के पति नरेंद्र कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी राखी देवी चार माह की गर्भवती थी। उसको पेट दर्द के चलते ही दो अक्तूबर को एलएनजेपी अस्पताल में दाखिल कराया था। इसके बाद यहां चिकित्सकों के कहने पर गत बुधवार को अल्ट्रासाउंड कराया, लेकिन चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट की जांच गंभीरता से नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां चिकित्सकों ने पिछले तीन दिनों से उसकी पत्नी को एक गोली तक नहीं दी। चिकित्सकों की लापरवाही से प्रसूति विभाग के शौचालय में वीरवार दोपहर करीब दो बजे उसकी पत्नी का गर्भपात हो गया। बावजूद इसके चिकित्सकों ने फिर भी उसकी पत्नी की संभाल नहीं की और वो दर्द में तड़पती रही। चिकित्सकों द्वारा बरती गई लापरवाही से खफा होकर परिजनों ने महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर पहले चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनजीत सिंह कार्यालय के समक्ष बवाल काटा, फिर सिविल अस्पताल के समक्ष कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग जाम लगा दिया। हालांकि कई बार पहले भी सिविल अस्पताल के प्रसूति विभाग में महिला चिकित्सकों की लेकर हंगामे हो चुके है और डिलीवरी के लिए पहुंच रही गर्भवती महिलाओं के परिजनों भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे है। बता दें कि 28 अगस्त को प्रसूति विभाग में महिला चिकित्सकों की कमी को लेकर गर्भवती के परिजनों ने कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग को करीब आधे घंटे तक जाम कर दिया। जाम के चलते वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में फंसे वाहन निकालने के किए वाहन चालकों ने कड़ी मक्कशत करनी पड़ी। महिला के परिजनों का कहना है कि इस बारे में वे शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिज विज से मुलाकात करेंगे।
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परिजन बोले, कार्यालय से ही गायब हो गए एमएस
पीड़ित महिला के ससुर मेहर चंद ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की लापरवाही की शिकायत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनजीत सिंह को दी थी। एमएस डॉ. मनजीत ने चिकित्सकों की लापरवाही पर संज्ञान नहीं लिया और अपने कार्यालय के गायब हो गए।
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पुलिस ने अस्पताल में पहुंच संभाला मोर्चा
अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलते ही केयूके थाना प्रभारी छोटूराम सहित थर्ड गेट चौकी प्रभारी सहित अन्य पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। हंगामा कर रहे गर्भवती महिलाओं के परिजनों को समझाकर शांत कराया। हालांकि इसके बाद भी अस्पताल परिसर में कई पुलिस कर्मी तैनात रहे।
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महिला के परिजनों द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद है। गर्भवती महिला को जब सिविल अस्पताल में दाखिल किया गया, तब उसकी स्थिति गंभीर थी। जब चिकित्सकों ने गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया तो वह छह सप्ताह की गर्भवती थी और उसके भ्रूण में धड़कन नहीं थी। वीरवार को उसे उल्टी लगी तो इसी दौरान उसका प्राकृतिक रूप से गर्भपात हुआ। स्टाफ की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। महिला चिकित्सकों द्वारा जांच की जा रही है। यहीं अब उस महिला को उपचार के लिए प्रसूति विभाग में दाखिल किया गया है।
डॉ. मनजीत सिंह, चिकित्सा अधिकारी, एलएनजेपी अस्पताल।