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Kurukshetra News: करेंसी चेस्ट से 40 लाख रुपये गायब
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पिहोवा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की पिहोवा ब्रांच में करेंसी चेस्ट से 40 लाख रुपये के नोटों की आठ गड्डियों के बंडल गायब होने का मामला सामने आया है। बैंक के ब्रांच मैनेजर की ओर से पुरानी सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद यह खुलासा हुआ। मामले में बैंक के ही दो कर्मचारियों कैश ऑफिसर रवि कुमार और अकाउंटेंट करण पाल पर आपराधिक साजिश और विश्वासघात का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
ब्रांच मैनेजर तरसेम लाल ने बताया कि 18 नवंबर को सुबह करीब 9:30 बजे बैंक में नियमित आंतरिक जांच (रूटीन ऑडिट) की जा रही थी। इस दौरान करेंसी चेस्ट के बिन नंबर-26 का निरीक्षण किया गया। बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस बिन में 500 रुपये के नोटों की कुल 90 गड्डियां (प्रत्येक बंडल में एक हजार नोट) यानी कुल 4.50 करोड़ रुपये होना दर्ज था लेकिन वास्तविक जांच में मात्र 82 गड्डियों के बंडल ही मिले।
इस तरह आठ गड्डियों के बंडल गायब पाए गए। यानी कुल 40 लाख रुपये कम मिले। करेंसी चेस्ट की जिम्मेदारी कैश ऑफिसर रवि कुमार और अकाउंटेंट करण पाल के पास थी और चेस्ट की चाबियां भी इन्हीं दोनों कर्मचारियों के पास रहती हैं। इसलिए ब्रांच मैनेजर ने सबसे पहले इनसे पूछताछ की। दोनों कर्मचारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद मैनेजर ने बैंक की पुरानी सीसीटीवी फुटेज खंगाली। फुटेज से पता चला कि 10 नवंबर को आखिरी बार नकदी निकासी के बाद शेष बंडलों का ठीक से गिनती और सत्यापन नहीं किया गया था। इससे दोनों कर्मचारियों पर मिलीभगत का शक हुआ। बैंक ने भी दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय आंतरिक जांच बैठाई जा रही है।
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ब्रांच मैनेजर तरसेम लाल ने बताया कि 18 नवंबर को सुबह करीब 9:30 बजे बैंक में नियमित आंतरिक जांच (रूटीन ऑडिट) की जा रही थी। इस दौरान करेंसी चेस्ट के बिन नंबर-26 का निरीक्षण किया गया। बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस बिन में 500 रुपये के नोटों की कुल 90 गड्डियां (प्रत्येक बंडल में एक हजार नोट) यानी कुल 4.50 करोड़ रुपये होना दर्ज था लेकिन वास्तविक जांच में मात्र 82 गड्डियों के बंडल ही मिले।
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इस तरह आठ गड्डियों के बंडल गायब पाए गए। यानी कुल 40 लाख रुपये कम मिले। करेंसी चेस्ट की जिम्मेदारी कैश ऑफिसर रवि कुमार और अकाउंटेंट करण पाल के पास थी और चेस्ट की चाबियां भी इन्हीं दोनों कर्मचारियों के पास रहती हैं। इसलिए ब्रांच मैनेजर ने सबसे पहले इनसे पूछताछ की। दोनों कर्मचारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद मैनेजर ने बैंक की पुरानी सीसीटीवी फुटेज खंगाली। फुटेज से पता चला कि 10 नवंबर को आखिरी बार नकदी निकासी के बाद शेष बंडलों का ठीक से गिनती और सत्यापन नहीं किया गया था। इससे दोनों कर्मचारियों पर मिलीभगत का शक हुआ। बैंक ने भी दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय आंतरिक जांच बैठाई जा रही है।
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