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पिपली-लाडवा रोड पर नहीं ध्यान, राहगीरों की सांसत में जान

Sat, 06 Jan 2018 12:34 AM IST
Updated Sat, 06 Jan 2018 12:34 AM IST
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पिपली-लाडवा रोड पर नहीं ध्यान, राहगीरों की सांसत में जान
पिपली-लाडवा रोड पर नहीं ध्यान, राहगीरों की सांसत में जान
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अमर उजाला
कुरुक्षेत्र।
बदइंतजामी, लापरवाही, अव्यवस्था और प्रशासन की असफलता यदि देखनी हो तो पिपली-लाडवा रोड पर देखी जा सकती है। केवल 14 किलोमीटर के टुकड़े ने ही प्रशासन के लचर सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी है। हकीकत ये है कि पिछले डेढ़ वर्ष से नेताओं और अधिकारियों के दावों के बावजूद पिपली-लाडवा रोड न तो पूरी तरह चौड़ा हो पाया और न ही छोटे-बड़े वाहनों की स्पीड कंट्रोल हो सकी है। आलम ये है कि पिपली से आगे लाडवा तक करीब 14 किलोमीटर के टुकड़े में कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी नहीं होता। यहां पर तेज भागते वाहनों, बगैर जरूरी दस्तावेजों एवं बिना हेलमेट के चालकों पर शिकंजा कसने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी कमी के चलते दोपहिया, तिपहिया और अन्य छोटे-बड़े वाहन कट मारते हुए स्पीड में दौड़ते हैं। रफ्तार और इस लापरवाही का खामियाजा पिछले एक वर्ष में इस रोड पर दर्जनों राहगीर भुगत चुके हैं।
ट्रक ने किए ट्रैक्टर के दो टुकड़े तो बस ने ली शिक्षिका की जान, कई की टांग टूटी
लाडवा थाना एसएचओ सुरेंद्र सिंह भी स्वीकार करते हैं कि इन हालात में कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। नवंबर में तेज रफ्तार कार ने गांव सोंटी के निकट बाइक चालक गंभीर रूप से जख्मी हुआ था। निवारसी मोड़ के निकट दिसंबर माह में तेज रफ्तार ट्रक ने ट्रैक्टर के दो टुकड़े कर दिए थे। हादसा इतना भयंकर था कि ट्रैक्टर चालक करीब 20 मीटर दूर खेतों में जा गिरा था। उसकी कुछ देर बाद अस्पताल में मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि वाहनों के भिड़ने के अतिरिक्त लावारिस पशुओं और कुत्तों के कारण भी पिछले दो माह में आधा दर्जन के करीब हादसे हो चुके हैं। गनीमत रही कि इनमें किसी की जान नहीं गई।
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महिला शिक्षक जा चुकी है जान
पिपली थाना के अंतर्गत पिछले वर्ष गांव बीड मथाना मोड़ के निकट तेज रफ्तार बस की टक्कर से कार में बैठी महिला शिक्षक की जान जा चुकी है। दो माह पहले रात के समय गांव सिरसमा से बीड़ मथाना के निकट पत्रकार सहित कुछ अन्य राहगीरों को सही दिशा में चलने के बावजूद तेज गति पिकअप ने पीछे से टक्कर मार दी थी। इसमें पीड़ितों को गंभीर चोटें आई थीं। पिपली थाना एसएचओ निर्मल के अनुसार पिछले दो माह में इस रोड पर दस हादसे हुए। इनमें कैंटर-कार की टक्कर में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। तीन हादसे गोवंश, नीलगाय और कुत्तों के कारण हुए।
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रात में घायल को उठाना भी राहगीरों के लिए चुनौतीपूर्ण
नाइट विजन कैमरा और स्ट्रीट लाइट के अभाव में पिपली-लाडवा रोड पर रात को अंधेरे में सफर करना डरावने जंगल से गुजरने के समान है। इसी अंधेरे का फायदा उठा तेज रफ्तार वाहन चालक किसी गाड़ी को ठोकने के बाद भाग निकलते हैं। स्थिति इतनी पेचीदा है कि टक्कर के बाद गिर पड़े वाहन सवार को उठाना भी राहगीरों के लिए आसान नहीं रहता। कोई पुलिस की कार्रवाई से डरता है तो कोई शराबी समझकर व्यक्ति को उठाने से कतराता है। नतीजा ये कि जब तक कोई दरियादिल घायल को संभाल एंबुलेंस का प्रबंध करता है, तब तक अधिकांश घायल सड़क पर तड़पते रहते हैं।
जानलेवा सड़क पर नहीं परमानेंट एंबुलेंस
आए दिन होते सड़क हादसों और समय पर एंबुलेंस मिलने के अभाव में कई पीड़ित मर चुके हैं। इसके बाद भी न तो जिला प्रशासन, न स्वास्थ्य विभाग, न ट्रैफिक पुलिस और न ही आरटीए इससे सबक लेते दिख रहे हैं। यही कारण है कि पिपली-लाडवा रोड पर एक भी स्थाई एंबुलेंस नहीं है। हादसे के लंबे समय बाद कोई गाड़ी पहुंचती है या फिर पुलिस मौके पर आकर एंबुलेंस का प्रबंध कराती है। सीएम, मंत्री और सरकार के बड़े नुमाइंदे लाव लश्कर के साथ यहां से निकल जाते हैं, लेकिन आमजन के प्रति यह सभी संवेदनहीन नजर आते हैं।

नहीं है इंटरसेप्टर मशीन
अधिक स्पीड में चलने वाले वाहनों को काबू में करने का भी पिपली-लाडवा रोड पर कोई बंदोबस्त नहीं है। करीब 14 किलोमीटर के रास्ते में न ट्रैफिक पुलिस मौजूद है और न ही हाईवे अथॉरिटी की तरफ से चालान काटने वाला इंटरसेप्टर उपकरण लगाया गया है। यह उपकरण करीब एक किलोमीटर दूर से ही तेज रफ्तार वाहन पर नजर रखने में सक्षम है। इसी का फायदा उठाकर तेज रफ्तार गाड़ियां राहगीर को टक्कर मारने के बाद आसानी से भाग निकलती हैं।
लाडवा विधायक पवन सैनी नहीं बना सके व्यवस्था
हलका लाडवा विधायक पवन सैनी क्षेत्र में विकास का दावा करते रहे हैं। लेकिन, विकास की हकीकत इस सड़क को देखकर समझी जा सकती है। विधायक ने न तो तेज रफ्तार वाहनों की स्पीड कंट्रोल करने की कोई व्यवस्था बनाई, न उनके अंतर्गत आने वाले टुकड़े में लाइटें लगर्वाइं, न ही इंटरसेप्टर मशीन के प्रयास कराए। वह इस क्षेत्र में एंबुलेंस एवं आपात स्थिति में एक्सिडेंटल गाड़ी साइड हटाने के लिए किसी क्रेन का प्रबंध तक नहीं करा सके हैं।


रफ्तार नियंत्रण जरूरी, इंटरसेप्टर के लिए उच्चाधिकारियों को लिखेंगे : एडीसी धर्मवीर
एडीसी एवं आरटीए इंचार्ज धर्मवीर सिंह ने कहा कि पिपली-लाडवा रोड से गुजरते तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण करना और लोगों की जान बचाना बेहद जरूरी है। फिलहाल इस हाईवे पर उनके पास तेज गाड़ियों को दूर से ही ट्रेस करने वाली इंटरसेप्टर मशीन नहीं है। इसकी व्यवस्था कराने के लिए वे उच्च अधिकारियों को लिखेंगे। इसके अलावा क्रेन, स्थाई एंबुलेंस और ट्रैफिक पुलिस का इंतजाम कराने की भी संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे। जल्द ही राहगीरों की सड़क संबंधी समस्याओं को दूर किया जाएगा।
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