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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में पारदर्शिता और नियमानुसार हुए टेंडर: डीसी
Updated Tue, 21 Nov 2017 12:14 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के टेंडरों का मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है तो सोमवार को उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर टेंडर प्रक्रिया में पूर्ण रुप से पारदर्शिता बरतने और नियमानुसार टेंडर देने का दावा किया। कटारिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 के आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी कार्यों के लिए पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। इस पार्टी ने ऑन लाइन टेंडर भरने के बाद जिसने सबसे कम रेट दिया, उस पार्टी को ही ठेका दिया गया है।
उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को लेकर तमाम चर्चाओं का खंडन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से जितने भी कार्यों के लिए टेंडर दिए गए हैं, उसके लिए पूरी प्रक्रिया को मापदंडों के अनुसार अपनाया गया है। सबसे पहले देशभर की पार्टियों से ऑन लाइन टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसके लिए बाकायदा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से अलग-अलग कमेटियों का कार्य अनुसार गठन किया गया। प्रत्येक कमेटी में कुछ अधिकारियों के साथ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्यों को भी कमेटी के मेंबर के रूप में शामिल किया गया। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूजा चांवरिया ने कहा कि कमेटी के सदस्यों और टेंडर भरने वाली सभी पार्टियों के लोगों के समक्ष टेंडर की सील खोली गई। बाकायदा वीडियोग्राफी करवाई गई। टेंडर खुलने के बाद जिस पार्टी का रेट सबसे कम था, उस पार्टी को कार्य आवंटित किया गया। इतना ही नहीं इन सभी टेंडरों की प्रक्रिया की अंतिम अनुमति कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के उच्च अधिकारियों से भी ली गई है। उन्होंने कहा कि सभी टेंडर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई। इसकी जानकारी कोई भी व्यक्ति आरटीआई के तहत भी हासिल कर सकता है।
कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने इन मामलों पर राष्ट्रपति से जांच की मांग
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने सोमवार को महामहिम राष्ट्रपति को शिकायत पत्र भेज कर गीता महोत्सव के टेंडरों और अन्य अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को दो साल में नौ एकड़ भूमि अलॉट करने के मामले की भी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने शिकायत पत्र में लिखा है कि पिछले 30 वर्षों में गीता जयंती में स्वामी ज्ञानानंद का कोई योगदान नहीं रहा। इसके बाद भी गीता जयंती पर स्वामी ज्ञानानंद की गीता प्रेरणा को 600 रुपये में खरीदा गया है। गौरतलब है कि रविवार को गर्ग ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया था कि सरकारी पैसे से स्वामी ज्ञानानंद की सैकड़ों की गीता प्रेरणा की प्रतियां 600 रुपये प्रति कॉपी के हिसाब से खरीदी जा चुकी हैं। जबकि, मार्केट में गोरखपुर की प्रसिद्ध गीता पुस्तक 50 से 100 रुपये में उपलब्ध है।
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टेंडर पर दिया, मगर गीता पर नहीं आया प्रशासन जवाब
गीता महोत्सव में टेंडरों की अनियमितता को लेकर प्रशासन ने विज्ञप्ति जारी कर टेंडरों में पारदर्शिता बरतने की बात रखी है। लेकिन, गीता जयंती आयोजन के दौरान स्वामी ज्ञानानंद की संस्था से कितनी खरीदी गई या नहीं खरीदी गई। यदि खरीदी गई तो किससे खरीदी गई और कितने की खरीद हुई। इस पर न ही डीसी सुमेधा कटारिया की ओर से विज्ञप्ति में कुछ गया किया है। न ही कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर पूजा चांवरिया की ओर से इस पर स्पष्ट किया गया।
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कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के टेंडरों का मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है तो सोमवार को उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर टेंडर प्रक्रिया में पूर्ण रुप से पारदर्शिता बरतने और नियमानुसार टेंडर देने का दावा किया। कटारिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 के आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी कार्यों के लिए पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। इस पार्टी ने ऑन लाइन टेंडर भरने के बाद जिसने सबसे कम रेट दिया, उस पार्टी को ही ठेका दिया गया है।
उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को लेकर तमाम चर्चाओं का खंडन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से जितने भी कार्यों के लिए टेंडर दिए गए हैं, उसके लिए पूरी प्रक्रिया को मापदंडों के अनुसार अपनाया गया है। सबसे पहले देशभर की पार्टियों से ऑन लाइन टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसके लिए बाकायदा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से अलग-अलग कमेटियों का कार्य अनुसार गठन किया गया। प्रत्येक कमेटी में कुछ अधिकारियों के साथ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्यों को भी कमेटी के मेंबर के रूप में शामिल किया गया। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूजा चांवरिया ने कहा कि कमेटी के सदस्यों और टेंडर भरने वाली सभी पार्टियों के लोगों के समक्ष टेंडर की सील खोली गई। बाकायदा वीडियोग्राफी करवाई गई। टेंडर खुलने के बाद जिस पार्टी का रेट सबसे कम था, उस पार्टी को कार्य आवंटित किया गया। इतना ही नहीं इन सभी टेंडरों की प्रक्रिया की अंतिम अनुमति कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के उच्च अधिकारियों से भी ली गई है। उन्होंने कहा कि सभी टेंडर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई। इसकी जानकारी कोई भी व्यक्ति आरटीआई के तहत भी हासिल कर सकता है।
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कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने इन मामलों पर राष्ट्रपति से जांच की मांग
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने सोमवार को महामहिम राष्ट्रपति को शिकायत पत्र भेज कर गीता महोत्सव के टेंडरों और अन्य अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को दो साल में नौ एकड़ भूमि अलॉट करने के मामले की भी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने शिकायत पत्र में लिखा है कि पिछले 30 वर्षों में गीता जयंती में स्वामी ज्ञानानंद का कोई योगदान नहीं रहा। इसके बाद भी गीता जयंती पर स्वामी ज्ञानानंद की गीता प्रेरणा को 600 रुपये में खरीदा गया है। गौरतलब है कि रविवार को गर्ग ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया था कि सरकारी पैसे से स्वामी ज्ञानानंद की सैकड़ों की गीता प्रेरणा की प्रतियां 600 रुपये प्रति कॉपी के हिसाब से खरीदी जा चुकी हैं। जबकि, मार्केट में गोरखपुर की प्रसिद्ध गीता पुस्तक 50 से 100 रुपये में उपलब्ध है।
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टेंडर पर दिया, मगर गीता पर नहीं आया प्रशासन जवाब
गीता महोत्सव में टेंडरों की अनियमितता को लेकर प्रशासन ने विज्ञप्ति जारी कर टेंडरों में पारदर्शिता बरतने की बात रखी है। लेकिन, गीता जयंती आयोजन के दौरान स्वामी ज्ञानानंद की संस्था से कितनी खरीदी गई या नहीं खरीदी गई। यदि खरीदी गई तो किससे खरीदी गई और कितने की खरीद हुई। इस पर न ही डीसी सुमेधा कटारिया की ओर से विज्ञप्ति में कुछ गया किया है। न ही कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर पूजा चांवरिया की ओर से इस पर स्पष्ट किया गया।