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मारकंडा नदी में आया 4500 क्यूसिक पानी
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:33 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
रविवार तड़के मारकंडा नदी में 6594 क्यूसिक पानी आ गया, जो सोमवार तक 4500 क्यूसिक रह गया। हालांकि जलस्तर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन सौभाग्यवश बरसात न होने के कारण पानी कम हो गया। नदी में आए इस पानी की मार साथ लगते खेतों व गौशाला में पड़ी है। हालांकि प्रशासन ने पहले ही नदी के पास स्थित डेरों, गोशालाओं को अलर्ट किया था कि नदी में पानी आ सकता है। नदी का पानी गोशाला में घुस गया लेकिन सेवादारों ने पहले ही गोशाला में स्थित ऊंचे स्थानों पर गायों को बांध दिया था। इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ है। अगर पानी की मात्रा में इजाफा होता है तो यह पानी अरूप नगर, कठवा, मलिक पुर, गुमटी, मदन पुर, कलसाना, आदि गांवों के डेरों पर मार कर सकता है। लेकिन प्रशासन की चौकन्नी नजर नदी के पानी पर है। नदी में पानी की मात्रा बढ़ने से आस-पास के गांवों के लोग भयभीत हो उठे और उन्होंने पूरा ध्यान नदी पर केंद्रित कर दिया। हालांकि प्रशासन ने भी राहत के पूरे प्रबंध किए थे और सभी पटवारी भी रात की ड्यूटी पर थे। मारकंडा नदी के साथ लगते खेतों को पानी से नुकसान अवश्य हुआ है। अदालत के आदेशानुसार माइनिंग का कार्य बंद है, लेकिन कुछ समय के लिए खोला गया था जिससे मारकंडा नदी की सफाई भी हुई थी और इसकी गहराई भी बढ़ गई थी, जिससे बाढ़ का पानी इसमें समा जाता था।
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गांव वासी रख रहे हैं नजर : सरपंच
गांव कठवा के सरपंच अमरेंद्र सिंह ने कहा कि गांववासी अपने स्तर पर नदी पर नजर रखें, ताकि अगर पानी बढ़ता है तो राहत के पुख्ता इंतजाम किए जा सके। हालांकि बारिश की स्थिति को देखकर प्रशासन ने पहले सही कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
बाक्स
श्रद्धालु हैं प्रसन्न
वहीं नदी में पानी आने से श्रद्धालु प्रसन्न हैं और वह नदी पर पहुंचकर पूजा करने में जुट गए हैं। जनश्रुति के मुताबिक मारकंडा नदी के पानी में स्नान करने से शरीर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
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शाहाबाद।
रविवार तड़के मारकंडा नदी में 6594 क्यूसिक पानी आ गया, जो सोमवार तक 4500 क्यूसिक रह गया। हालांकि जलस्तर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन सौभाग्यवश बरसात न होने के कारण पानी कम हो गया। नदी में आए इस पानी की मार साथ लगते खेतों व गौशाला में पड़ी है। हालांकि प्रशासन ने पहले ही नदी के पास स्थित डेरों, गोशालाओं को अलर्ट किया था कि नदी में पानी आ सकता है। नदी का पानी गोशाला में घुस गया लेकिन सेवादारों ने पहले ही गोशाला में स्थित ऊंचे स्थानों पर गायों को बांध दिया था। इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ है। अगर पानी की मात्रा में इजाफा होता है तो यह पानी अरूप नगर, कठवा, मलिक पुर, गुमटी, मदन पुर, कलसाना, आदि गांवों के डेरों पर मार कर सकता है। लेकिन प्रशासन की चौकन्नी नजर नदी के पानी पर है। नदी में पानी की मात्रा बढ़ने से आस-पास के गांवों के लोग भयभीत हो उठे और उन्होंने पूरा ध्यान नदी पर केंद्रित कर दिया। हालांकि प्रशासन ने भी राहत के पूरे प्रबंध किए थे और सभी पटवारी भी रात की ड्यूटी पर थे। मारकंडा नदी के साथ लगते खेतों को पानी से नुकसान अवश्य हुआ है। अदालत के आदेशानुसार माइनिंग का कार्य बंद है, लेकिन कुछ समय के लिए खोला गया था जिससे मारकंडा नदी की सफाई भी हुई थी और इसकी गहराई भी बढ़ गई थी, जिससे बाढ़ का पानी इसमें समा जाता था।
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गांव वासी रख रहे हैं नजर : सरपंच
गांव कठवा के सरपंच अमरेंद्र सिंह ने कहा कि गांववासी अपने स्तर पर नदी पर नजर रखें, ताकि अगर पानी बढ़ता है तो राहत के पुख्ता इंतजाम किए जा सके। हालांकि बारिश की स्थिति को देखकर प्रशासन ने पहले सही कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
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श्रद्धालु हैं प्रसन्न
वहीं नदी में पानी आने से श्रद्धालु प्रसन्न हैं और वह नदी पर पहुंचकर पूजा करने में जुट गए हैं। जनश्रुति के मुताबिक मारकंडा नदी के पानी में स्नान करने से शरीर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
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