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ब्रह्मसरोवर परिसर की शोभा बढ़ाएंगी 21 समकालीन मूर्तियां
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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर परिसर में रखीं 21 कलाकारों द्वारा तैयार की गईं समकालीन मूर्तियां।
- फोटो : Kurukshetra
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा 18 दिन में तैयार की गई 21 समकालीन मूर्तियों को ब्रह्मसरोवर परिसर की शोभा बढ़ाएंगी। ब्रह्मसरोवर परिसर में इन्हें अलग-अलग जगह स्थापित किया जाएगा। इतना ही नहीं प्रत्येक मूर्ति का एक बेस बनाया जाएगा, जिस पर टाइटिल, कलाकार का नाम और मूर्ति के बारे में जानकारी होगी। इस बेस पर मूर्तियों को स्थापित कर फाइनल वॉश भी किया जाएगा। इतना ही नहीं मूर्तियों के आसपास लाइटें भी लगेंगी, जिससे इनकी सुंदरता दूर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। फिलहाल ये मूर्तियां पुरुषोत्तमपुरा बाग में द्रोपदी कूप के पास खड़ी की हुई हैं, जो कि अभी से पर्यटकों का ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
काले संगमरमर से बनी ये मूर्तियां हरियाणा, असम, तेलंगाना, राजस्थान, ओडिशा और चंडीगढ़ के कलाकारों ने एक ही चट्टान के टुकड़ों को तराश कर तैयार की हैं। इस मूर्तियों का खर्च हरियाणा कला और सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा वहन किया गया है। हरियाणा कला और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के कला और सांस्कृतिक अधिकारी हृदय कौशल ने का कहना है कि सभी मूर्तियां महाभारत पर आधारित विषयों पर तैयार की गई हैं। वहीं इनमें आजादी का अमृत महोत्सव और गीता को भी दर्शाया गया है। 21 कलाकारों और उनके सहायकों सहित 42 व्यक्तियों की एक टीम द्वारा मात्र 18 दिन में इन कलाकृतियां को तैयार किया गया है।
आमतौर पर, ऐसी मूर्तियां बनाने में चार से पांच माह का समय लगता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मूर्ति का वजन 5 टन से 12 टन के बीच है। परियोजना का उद्देश्य हरियाणा में लुप्त होती कला को बढ़ावा देना, ब्रह्म सरोवर के सौंदर्य को बढ़ाना और युवा कलाकारों को एक मंच प्रदान करना है। यहां कलाकारों ने अपनी रचनाओं में चौपड़, शंख, शक्ति स्तंभ, कछुआ, अर्जुन का धनुष, टटीरी वाली घंटी, सुदर्शन चक्र,ज्ञान की पोटली, सैनिकों की राइफल सहित महाभारत के विभिन्न पात्रों का इस्तेमाल किया है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि इन मूर्तियों की गैलरी में सुंदर लाइटें ब्रह्मसरोवर की शोभा को और बढ़ा देंगी। 18 दिन कलाकारों ने कड़ी मेहनत से इन मूर्तियों को तैयार किया है। ये समकालीन मूर्तियां पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी। ब्रह्मसरोवर पर मूर्तियों को बनाने का कार्यक्रम कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित किया गया था, जोकि प्रधान सचिव डी सुरेश व निदेशक प्रतिमा चौधरी के मार्गदर्शन में हुआ।
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इन कलाकारों ने तैयार की समकालीन मूर्तियां
असम से अरुणा धती चौधरी, ओडीशा से राकेश पटनायक, राजस्थान से नेमा राम जांगीर, चंडीगढ़ से वीरेंद्र राणा, हरियाणा से हृदय कौशल, हरपाल (सिरसा), दिनेश (रोहतक), महिपाल (सोनीपत), स्वीप राज (सोनीपत), अनूप (भिवानी), गोल्डी (कुरुक्षेत्र), प्रिंस (कुरुक्षेत्र), कुलदीप (करनाल), अमित, नरेंद्र (झज्जर), मदन, मीनाक्षी शर्मा, सुशांक, मोनू खंडेरवाल व राहुल।
बैठक में स्थान किए जाएंगे निर्धारित अनुभव मेहता
केडीबी के सीईओ अनुभव मेहता ने कहा कि हमें डायरेक्टर कल्चर से लेटर प्राप्त हो चुका है। अब एक कमेटी बनाकर इन्हें स्थापित करने के अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाएंगे। जगह ऐसी होंगी, जहां से सेल्फी प्वाइंट भी बन सकें और इसके बारे जानकारी मिले। कलाकार ने इसे क्या सोच रखकर बनाया इस बारे भी पर्यटकों को पता चले।
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काले संगमरमर से बनी ये मूर्तियां हरियाणा, असम, तेलंगाना, राजस्थान, ओडिशा और चंडीगढ़ के कलाकारों ने एक ही चट्टान के टुकड़ों को तराश कर तैयार की हैं। इस मूर्तियों का खर्च हरियाणा कला और सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा वहन किया गया है। हरियाणा कला और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के कला और सांस्कृतिक अधिकारी हृदय कौशल ने का कहना है कि सभी मूर्तियां महाभारत पर आधारित विषयों पर तैयार की गई हैं। वहीं इनमें आजादी का अमृत महोत्सव और गीता को भी दर्शाया गया है। 21 कलाकारों और उनके सहायकों सहित 42 व्यक्तियों की एक टीम द्वारा मात्र 18 दिन में इन कलाकृतियां को तैयार किया गया है।
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आमतौर पर, ऐसी मूर्तियां बनाने में चार से पांच माह का समय लगता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मूर्ति का वजन 5 टन से 12 टन के बीच है। परियोजना का उद्देश्य हरियाणा में लुप्त होती कला को बढ़ावा देना, ब्रह्म सरोवर के सौंदर्य को बढ़ाना और युवा कलाकारों को एक मंच प्रदान करना है। यहां कलाकारों ने अपनी रचनाओं में चौपड़, शंख, शक्ति स्तंभ, कछुआ, अर्जुन का धनुष, टटीरी वाली घंटी, सुदर्शन चक्र,ज्ञान की पोटली, सैनिकों की राइफल सहित महाभारत के विभिन्न पात्रों का इस्तेमाल किया है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि इन मूर्तियों की गैलरी में सुंदर लाइटें ब्रह्मसरोवर की शोभा को और बढ़ा देंगी। 18 दिन कलाकारों ने कड़ी मेहनत से इन मूर्तियों को तैयार किया है। ये समकालीन मूर्तियां पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी। ब्रह्मसरोवर पर मूर्तियों को बनाने का कार्यक्रम कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित किया गया था, जोकि प्रधान सचिव डी सुरेश व निदेशक प्रतिमा चौधरी के मार्गदर्शन में हुआ।
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इन कलाकारों ने तैयार की समकालीन मूर्तियां
असम से अरुणा धती चौधरी, ओडीशा से राकेश पटनायक, राजस्थान से नेमा राम जांगीर, चंडीगढ़ से वीरेंद्र राणा, हरियाणा से हृदय कौशल, हरपाल (सिरसा), दिनेश (रोहतक), महिपाल (सोनीपत), स्वीप राज (सोनीपत), अनूप (भिवानी), गोल्डी (कुरुक्षेत्र), प्रिंस (कुरुक्षेत्र), कुलदीप (करनाल), अमित, नरेंद्र (झज्जर), मदन, मीनाक्षी शर्मा, सुशांक, मोनू खंडेरवाल व राहुल।
बैठक में स्थान किए जाएंगे निर्धारित अनुभव मेहता
केडीबी के सीईओ अनुभव मेहता ने कहा कि हमें डायरेक्टर कल्चर से लेटर प्राप्त हो चुका है। अब एक कमेटी बनाकर इन्हें स्थापित करने के अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाएंगे। जगह ऐसी होंगी, जहां से सेल्फी प्वाइंट भी बन सकें और इसके बारे जानकारी मिले। कलाकार ने इसे क्या सोच रखकर बनाया इस बारे भी पर्यटकों को पता चले।