फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   रोडवेज बसों में सीटी-हार्न बजाने को तैयार सिविल इंजीनियर,एमबीए पास

रोडवेज बसों में सीटी-हार्न बजाने को तैयार सिविल इंजीनियर,एमबीए पास

Sun, 21 Oct 2018 12:04 AM IST
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:04 AM IST
विज्ञापन
रोडवेज बसों में सीटी-हार्न बजाने को तैयार सिविल इंजीनियर,एमबीए पास
फोटो नंबर-36 से 39,43 से 45
विज्ञापन

बेरोजगारी की कसक
-रोडवेज बसों में सीटी-हॉर्न बजाने को तैयार सिविल इंजीनियर, एमबीए पास
- ड्राइवर-कंडक्टर के लिए आवेदनों की भरमार, लाइन में लगे कई होनहार
- बस यात्रियों की समस्या के बीच बेरोजगारों को दिख रही उम्मीद की किरण
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। बेरोजगारी का दाग धोने की कसक सिविल इंजीनियर, एमबीए, बीएससी और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को हरियाणा रोडवेज की दहलीज पर ले आई है। लिहाजा अब वे रोडवेज के कंडक्टर-ड्राइवर बनकर सीटी और हॉर्न बजाने को भी तैयार हैं। रोजगार हासिल करने की जंग में ये युवा ऊंची उड़ान भरने का ख्वाब छोड़ कंडक्टर- ड्राइवर के बनने के लिये फॉर्म जमा करा रहे हैं।
सरकार और राज्य परिवहन के कर्मचारी संगठनों के बीच बढ़ रही रार से प्रदेश में 22 तक बसों का चक्का जाम है। इस बीच राज्य सरकार नये ड्राइवर कंडक्टरों की भर्ती कर हड़ताल पर बैठे रोडवेज कर्मचारियों को सबक सिखाने के मूड में है। इधर रोडवेज कर्मचारी संगठन ऐलान कर चुके हैं कि जब तक राज्य सरकार प्राइवेट कंपनियों की 720 बसें महंगे रेट पर हायर करने का फैसला वापिस नहीं लेगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी। बहरहाल सरकार और रोडवेज संगठनों के बीच सुलह न होने का खामियाजा बस यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है और दूसरी और राज्य परिवार को प्रतिदिन भारी आर्थिक क्षति हो रही है। पांचवें दिन तक हरियाणा रोडवेज को 50 लाख से अधिक का नुकसान हो चुका है। इस पूरे विवाद के बीच बेरोजगार युवाओं को नौकरी हासिल करने की उम्मीद की एक किरण बस अड्डों पर खींच रही है। बस अड्डों पर मौजूदा हालात ये है कि यात्रियों से ज्यादा संख्या नौकरी के लिये फार्म भरने और जमा कराने वाले युवाओं की दिखती है। हालांकि इन युवाओं को फार्म लेने से लेकर जमा कराने तक की जद्दोजहद के बाद नौकरी मिलेगी या नहीं ? इस पर रोडवेज कर्मचारी ही सवाल खड़े कर रहे हैं। रोडवेज कर्मचारियों की मानें तो इन युवाओं को नौकरी देने का झूठा सपना दिखाया जा रहा है, जबकि हकीकत अगले दिनों में सामने होगी। सरकार द्वारा राज्य परिवहन में ड्राइवर कंडक्टर की भर्ती करने की घोषणा के बाद कुुरुक्षेत्र डिपो में आवेदनकर्ताओं के फॉर्मों के ढेर लग चुके हैं। इनमें से खास बात ये है कि इनमें से सिविल इंजीनियर, एमबीए, होटल मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा प्राप्त अनेक ऐसे विद्यार्थी है, अच्छी नौकरी के सपनों को तिलांजलि देकर बसों का स्टेयरिंग संभालने और सीटी बजाकर टिकट काटने को भी तैयारी कर चुके हैं।
विज्ञापन


सिविल इंजीनियर बोला- किसी भ्रम में रह कर समय गंवाना नहीं चाहता
सिविल इंजीनियर की डिग्री प्राप्त 27 वर्षीय शुभम और बीएससी पास आउट विकास कुमार ने कहा कि प्रदेशभर में बेरोजगारों की भरमार है। उन्होंने जो डिग्री ली है, उस पर तो अभी तक नौकरी नहीं मिली, लेकिन अब उन्होंने बेरोजगारी से निजात पाने के लिए कंडक्टर के लिए आवेदन कर दिया है। इन्होंने कहा कि जब ग्रुप डी की भर्ती के लिए पीएचडी स्कालर आवेदन कर रहे हैं तो इन हालात में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को किसी भ्रम में रह समय गंवाना नहीं चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


शुक्रवार को 850 शनिवार को 911 आवेदन फॉर्म जमा
कुरुक्षेत्र में शुक्रवार को ड्राइवर और कंडक्टर के लिए 850 आवेदन फार्म जमा हुए थे, जबकि शनिवार को 911 आवेदन फॉर्म जमा हुए हैं। कुरुक्षेत्र डिपो पर सुबह से ही फॉर्म जमा कराने वालों की बस अड्डे पर कतारें दिखने लगी थी। शनिवार शाम तक ड्राइवर के लिए 285 और कंडक्टर के लिए 626 आवेदन फॉर्म जमा कराए गए।

न खाता न बही, जो कह दो वो सही
रोडवेज की बसों का चक्का जाम होने के चलते सहकारी बसें और कुछेक प्राइवेट स्कूलों की बसों को भी आसपास के रूट पर दौड़ाया जा रहा है। यहां खास बात यह है कि प्राइवेट स्कूल के बस परिचालक के पास यात्रियों को देने के लिए टिकट तो नहीं है, लेकिन एक रुपये किलो मीटर के हिसाब से पैसे लिये जा रहे हैं। दिन भर में कितने पैसे एकत्रित होते हैं, यह प्राइवेट स्कूल के कंडक्टर की ईमानदारी पर निर्भर है।

और प्राइवेट स्कूल बस ड्राइवरों व कंडक्टरों का है ये दर्द
इन स्कूल बसों के कंडक्टरों का दर्द भी कम नहीं है। इनका कहना है कि अभी तक उनकी ड्यूटी स्कूल बसों पर थी, लेकिन अब उन्हें दोगुनी ड्यूटी करनी पड़ रही है और इसकी एवज में उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। प्राइवेट स्कूल बसे के कंडक्टर नरेंद्र का कहना है कि शुक्रवार को लाडवा से शाहाबाद के बीच एक सहकारी बस के चालक ने ईर्ष्यावश उनकी स्कूल बस को साइड तक मारने का प्रयास किया, वह इसकी शिकायत एसडीएम को दे चुके हैं।


चार दिन में 50 लाख गंवाए, स्कूल बसों से 27 हजार 992 पाये
जिला प्रशासन ने बस यात्रियों की समस्या को देखते हुए प्राइवेट स्कूलों की 20 बसें हायर की हैं। कुरुक्षेत्र डिपो से मिली जानकारी के अनुसार इन बसों में जिन यात्रियों ने सफर किया, उनसे 27 हजार 992 रुपये प्राप्त हुए। यह राशि कुरुक्षेत्र डिपो की कैश ब्रांच में जमा कराई जा चुकी है, यानी जिस कैश ब्रांच में प्रतिदिन 13 से 14 लाख रुपये जमा होता था, लेकिन हड़ताल की वजह से केवल कुरुक्षेत्र डिपो को 50 लाख से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed