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चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल.....
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:59 PM IST
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चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल.....
- चुपके-चुपके रात दिन आसूं बहाना याद है...
-शाम-ए-गजल में दी गजलों की प्रस्तुति, श्रोता हुए कायल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मखमली आवाज, मधुर संगीत और बेहतरीन गजलों का जब संगम होता है तो माहौल वास्तव में मनमोहक हो जाता है। ऐसे में श्रोता स्वयं को झूमने से नहीं रोक पाते। ऐसा ही कुछ देखने को मिला मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर की भरतमुनि रंगशाला में। हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में गजल संध्या का आयोजन किया गया। डा. सुधीर शर्मा की मधुर आवाज में लगभग ढेड़ घंटे तक श्रोताओं ने गजलों का आनंद लिया। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रुप में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलसचिव डा. जितेंद्र भारद्वाज उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार और भगवान परशुराम कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष मंगल राम अत्री ने की। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी बृजशर्मा द्वारा किया गया। तुमको देखा तो ये ख्याल आया से गजल संध्या का आगाज किया गया। इसके बाद होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है, इश्क कीजे फिर समझिए जिंदगी क्या चीज है, झुकी-झुकी सी नजर बेकरार है के नहीं, दिल ना मिलता तो मुलाकात अधुरी रहती, चुपके-चुपके रात दिन आसूं बहाना याद है जैसे बेहतरीन गजलों के माध्यम से डा. सुधीर शर्मा ने खूब समां बांधा। कार्यक्रम में कुशल संचालन कर रहे बृजशर्मा की उम्दा शायरी भी उपस्थिति को भावविभोर करने में कामयाब रही। एक के बाद एक गजल ने सभी से भरपूर तालियां बटौरी। दिल की बात जुबां पर ना आती अब तक हम सहते हैं, हमने सुना इस बस्ती में दिवाने भी रहते हैं, मेरी नजर से ना हो दूर इक पल के लिए, चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल इक तू ही धनवान है गौरी बाकी सब कंगाल जैसी गजलों पर श्रोता झूमते नजर आए। वहीं सभी की फरमाईश पर सुधीर शर्मा ने हम तो हैं परदेश में देश में निकला होगा चांद, तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है, वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां भी सुनाकर भरपूर वाहवाही लूटी। गजल संध्या में तबले पर चेतन शर्मा, ढोलक पर प्रदीप, गिटार पर हसीन तथा ऑक्टोपैड पर बंटी ने संगत दी। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों तथा अतिथियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर मैक समन्वयक मदन डागर, सीमा काम्बोज, कृष्ण पांचाल, डॉ शालिनी शर्मा, योगश योगी सहित भारी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित रही।
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चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल.....
- चुपके-चुपके रात दिन आसूं बहाना याद है...
-शाम-ए-गजल में दी गजलों की प्रस्तुति, श्रोता हुए कायल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मखमली आवाज, मधुर संगीत और बेहतरीन गजलों का जब संगम होता है तो माहौल वास्तव में मनमोहक हो जाता है। ऐसे में श्रोता स्वयं को झूमने से नहीं रोक पाते। ऐसा ही कुछ देखने को मिला मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर की भरतमुनि रंगशाला में। हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में गजल संध्या का आयोजन किया गया। डा. सुधीर शर्मा की मधुर आवाज में लगभग ढेड़ घंटे तक श्रोताओं ने गजलों का आनंद लिया। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रुप में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलसचिव डा. जितेंद्र भारद्वाज उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार और भगवान परशुराम कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष मंगल राम अत्री ने की। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी बृजशर्मा द्वारा किया गया। तुमको देखा तो ये ख्याल आया से गजल संध्या का आगाज किया गया। इसके बाद होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है, इश्क कीजे फिर समझिए जिंदगी क्या चीज है, झुकी-झुकी सी नजर बेकरार है के नहीं, दिल ना मिलता तो मुलाकात अधुरी रहती, चुपके-चुपके रात दिन आसूं बहाना याद है जैसे बेहतरीन गजलों के माध्यम से डा. सुधीर शर्मा ने खूब समां बांधा। कार्यक्रम में कुशल संचालन कर रहे बृजशर्मा की उम्दा शायरी भी उपस्थिति को भावविभोर करने में कामयाब रही। एक के बाद एक गजल ने सभी से भरपूर तालियां बटौरी। दिल की बात जुबां पर ना आती अब तक हम सहते हैं, हमने सुना इस बस्ती में दिवाने भी रहते हैं, मेरी नजर से ना हो दूर इक पल के लिए, चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल इक तू ही धनवान है गौरी बाकी सब कंगाल जैसी गजलों पर श्रोता झूमते नजर आए। वहीं सभी की फरमाईश पर सुधीर शर्मा ने हम तो हैं परदेश में देश में निकला होगा चांद, तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है, वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां भी सुनाकर भरपूर वाहवाही लूटी। गजल संध्या में तबले पर चेतन शर्मा, ढोलक पर प्रदीप, गिटार पर हसीन तथा ऑक्टोपैड पर बंटी ने संगत दी। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों तथा अतिथियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर मैक समन्वयक मदन डागर, सीमा काम्बोज, कृष्ण पांचाल, डॉ शालिनी शर्मा, योगश योगी सहित भारी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित रही।