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कुरुक्षेत्र: 18 किलोमीटर लंबी पैरलल ड्रेन बनेगी सरस्वती के जीर्णोद्धार का आधार
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सरस्वती नदी का दृश्य।
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में ही गंदे नाले का रूप ले चुकी आस्था की प्रतीक सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार की उम्मीद जगी है। इस जीर्णोद्धार का आधार अब सरस्वती के साथ बनाई गई पैरलल ड्रेन ही बनेगी। पीडब्ल्यूडी बीएंड आर व हुडा विभाग द्वारा लावारिस छोड़ी गई इस ड्रेन को सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड ने अपने अधीन ले लिया है, जिसके चलते अब गंदा पानी सरस्वती में नहीं बल्कि इस ड्रेन में चलाया जाएगा। इसके लिए विशेष परियोजना तैयार की गई है, जिसे इस माह अमलीजामा पहनाया जाना है। इस ड्रेन के जरिए गंदे पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा ताकि साफ पानी अन्य प्रयोग में लाया जा सके।
बता दें कि करीब 12 साल पहले करोड़ों रुपये खर्च कर सरस्वती के पैरलल खेड़ी मारकंडा स्थित दधीचि ऋषि के नाम से सरस्वती तट पर स्थित घाट से नरकातारी तक 18 किलोमीटर लंबी ड्रेन बनाई गई थी, जिसमें आज तक न गंदा पानी चलाया जा सका है और न ही किसी विभाग ने इसकी सफाई करवाने की ही जहमत उठाई है। इसका न लोगों को फायदा हो सका और न ही सरस्वती नदी को ही नया स्वरूप मिल पाया। हालात यह है कि सरस्वती नदी ही गंदे नाले का रूप ले चुकी है। यह पहला मौका होगा जब इतने साल बाद इस ड्रेन की सफाई कराई जाएगी तो वहीं इसकी मरम्मत का काम भी सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड द्वारा कराया जाएगा। इसके साथ ही सरस्वती का भी जीर्णोद्धार शुरू किया जाएगा।
पहले ड्रेन की सफाई, फिर सरस्वती का गंदा पानी होगा डायवर्ट
ड्रेन की पहले सफाई कराई जाएगी, जिसके बाद सरस्वती नदी में बह रहा गंदा पानी इसमें खेड़ी मारकंडा से ही डायवर्ट किया जाएगा। जिसके बाद सरस्वती नदी की भी सफाई कराई जाएगी। तटों को फिर से बनाया जाएगा तो वहीं नदी को नया स्वरूप भी मिलेगा। खेड़ी मारकंडा व नरकातारी स्थित दोनों एसटीपी पर इस ड्रेन के जरिए गंदा पानी पहुंचाया जाएगा।
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इसी माह पूरा किया जाएगा कार्य, सरस्वती के प्रति बढ़ेगी आस्था : धुम्मन
सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड के अध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि सरस्वती को नया स्वरूप देने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके गंदे पानी को पैरलल बनाई गई ड्रेन में चलाया जाएगा, जिसकी पहले सफाई कराई जाएगी। इसका लेवल भी दुरुस्त किया जाएगा तो रखरखाव भी बोर्ड द्वारा ही किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों को पत्र भी लिखा गया है।
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बता दें कि करीब 12 साल पहले करोड़ों रुपये खर्च कर सरस्वती के पैरलल खेड़ी मारकंडा स्थित दधीचि ऋषि के नाम से सरस्वती तट पर स्थित घाट से नरकातारी तक 18 किलोमीटर लंबी ड्रेन बनाई गई थी, जिसमें आज तक न गंदा पानी चलाया जा सका है और न ही किसी विभाग ने इसकी सफाई करवाने की ही जहमत उठाई है। इसका न लोगों को फायदा हो सका और न ही सरस्वती नदी को ही नया स्वरूप मिल पाया। हालात यह है कि सरस्वती नदी ही गंदे नाले का रूप ले चुकी है। यह पहला मौका होगा जब इतने साल बाद इस ड्रेन की सफाई कराई जाएगी तो वहीं इसकी मरम्मत का काम भी सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड द्वारा कराया जाएगा। इसके साथ ही सरस्वती का भी जीर्णोद्धार शुरू किया जाएगा।
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पहले ड्रेन की सफाई, फिर सरस्वती का गंदा पानी होगा डायवर्ट
ड्रेन की पहले सफाई कराई जाएगी, जिसके बाद सरस्वती नदी में बह रहा गंदा पानी इसमें खेड़ी मारकंडा से ही डायवर्ट किया जाएगा। जिसके बाद सरस्वती नदी की भी सफाई कराई जाएगी। तटों को फिर से बनाया जाएगा तो वहीं नदी को नया स्वरूप भी मिलेगा। खेड़ी मारकंडा व नरकातारी स्थित दोनों एसटीपी पर इस ड्रेन के जरिए गंदा पानी पहुंचाया जाएगा।
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इसी माह पूरा किया जाएगा कार्य, सरस्वती के प्रति बढ़ेगी आस्था : धुम्मन
सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड के अध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि सरस्वती को नया स्वरूप देने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके गंदे पानी को पैरलल बनाई गई ड्रेन में चलाया जाएगा, जिसकी पहले सफाई कराई जाएगी। इसका लेवल भी दुरुस्त किया जाएगा तो रखरखाव भी बोर्ड द्वारा ही किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों को पत्र भी लिखा गया है।