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कुलसचिव और कुंटिया के बीच दस मिनट चली असफल बैठक, शाम को दिया रूका वेतन डालने के आदेश
Updated Wed, 05 Sep 2018 12:20 AM IST
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कुलसचिव और कुंटिया के बीच दस मिनट चली असफल बैठक, शाम को दिया रुका वेतन डालने के आदेश -केयू प्रशासन के निर्देश पर परीक्षा शाखा लगाएगी विद्यार्थियों की परेशानियों को दूर करने के लिए हेल्प डेस्क
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। केयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कुलपति कार्यालय के समक्ष धरना देकर केयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को देखते हुए कुलसचिव डॉ नीता खन्ना ने मंगलवार को कुंटिया प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था, जिसमें केयू द्वारा बनाई गई कमेटी भी मौजूद रही। इस बैठक में कर्मचारी अगस्त माह का रुके हुए वेतन जारी करने की मांग पर अड़े रहे और दोनों पक्षों की यह बैठक असफल रही। हालांकि केयू कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना ने प्रेस विज्ञप्ति में कर्मचारियों का वेतन जारी करने की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि अब कर्मचारियों को तय करना है कि यूनिवर्सिटी को किस दिशा में लेकर जाना है। कुंटिया के पदाधिकारियों से साथ उनकी मांगों को लेकर दो बार बातचीत हुई, लेकिन कर्मचारियों के अड़ियल रवैये के चलते हड़ताल खत्म नहीं हो सकी। प्रशासन ने कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को पूरा कर दिया है। बावजूद इसके गैर शिक्षक कर्मचारियों का यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन का नेतृृत्व कर रहे कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि इन दिनों कुलपति के निर्देशानुसार यूनिवर्सिटी में सभी कार्य असंवैधानिक हो रहे हैं। यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार केवल सभी गैर-शिक्षक कर्मचारियों के अगस्त माह के वेतन को रोककर सबसे बड़ा असंवैधानिक कार्य किया है। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने कर्मचारियों के पीएफ एवं एनपीएस की राशी में घोटाला किया है। पिछले 5-6 माह से पीएफ की राशि पीएफ खाते में नहीं डाली गई। उन्होंने केयू प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि विद्यार्थियों एवं यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा का देखते हुए कर्मचारियों का बकाया एरियर, चतुर्थ श्रेणी की प्रमोशन और वरिष्ठता के आधार पर सभी सहायक कुलसचिव की प्रमोशन करनी मांग की। कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा, महासचिव रविंद्र तोमर, कोषाध्यक्ष अनिल लोहाट एवं प्रैस सचिव मनीश बालदा ने कहा कि कुलपति एवं कुलसचिव अपने पदों पर रहने के अधिकार खो चुके हैं। वे अपने कर्मचारियों के हकों का हल निकालने की बजाये अपने तुगलकी आदेश जारी कर इस आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कुंटिया का एक शिष्ट मंडल शीघ्र ही कुलाधिपति और मुख्यमंत्री से मिलकर इस तानाशाह कुलपति को हटाने की मांग करेंगें। वहीं कर्मचारियों की इस हड़ताल का छात्र संगठनों एसएफआई, एनएसयूआई, रोडवेज यूनियन, बिजली बोर्ड यूनियन, हरियाणा अध्यापक संघ, जन संघर्ष मंच, सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान धर्मवीर फोगाट ने समर्थन दिया। इस मौके पर पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़, पूर्व महासाचिव भारत भूषण, दीपक शर्मा, गुरमेल संधू, सतनारायण वर्मा, नरेंद्र वर्मा, सतीश शर्मा, दलबीर मान, संत कुमार, संदीप जढौला, रामफल, भूषण चैहान, विष्णु नाथ, कृष्ण पाण्डे, राजकुमार ढींगडा, शमसेर सिंह, टीका राम, प्रवीण मथाना, अजमेर सिंह, जगदीश खनौदा, रूपेश खन्ना, चंद्रपाल, कर्मवीर, सुनील शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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कुलसचिव और कुंटिया के बीच दस मिनट चली असफल बैठक, शाम को दिया रुका वेतन डालने के आदेश -केयू प्रशासन के निर्देश पर परीक्षा शाखा लगाएगी विद्यार्थियों की परेशानियों को दूर करने के लिए हेल्प डेस्क
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। केयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कुलपति कार्यालय के समक्ष धरना देकर केयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को देखते हुए कुलसचिव डॉ नीता खन्ना ने मंगलवार को कुंटिया प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था, जिसमें केयू द्वारा बनाई गई कमेटी भी मौजूद रही। इस बैठक में कर्मचारी अगस्त माह का रुके हुए वेतन जारी करने की मांग पर अड़े रहे और दोनों पक्षों की यह बैठक असफल रही। हालांकि केयू कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना ने प्रेस विज्ञप्ति में कर्मचारियों का वेतन जारी करने की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि अब कर्मचारियों को तय करना है कि यूनिवर्सिटी को किस दिशा में लेकर जाना है। कुंटिया के पदाधिकारियों से साथ उनकी मांगों को लेकर दो बार बातचीत हुई, लेकिन कर्मचारियों के अड़ियल रवैये के चलते हड़ताल खत्म नहीं हो सकी। प्रशासन ने कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को पूरा कर दिया है। बावजूद इसके गैर शिक्षक कर्मचारियों का यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन का नेतृृत्व कर रहे कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि इन दिनों कुलपति के निर्देशानुसार यूनिवर्सिटी में सभी कार्य असंवैधानिक हो रहे हैं। यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार केवल सभी गैर-शिक्षक कर्मचारियों के अगस्त माह के वेतन को रोककर सबसे बड़ा असंवैधानिक कार्य किया है। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने कर्मचारियों के पीएफ एवं एनपीएस की राशी में घोटाला किया है। पिछले 5-6 माह से पीएफ की राशि पीएफ खाते में नहीं डाली गई। उन्होंने केयू प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि विद्यार्थियों एवं यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा का देखते हुए कर्मचारियों का बकाया एरियर, चतुर्थ श्रेणी की प्रमोशन और वरिष्ठता के आधार पर सभी सहायक कुलसचिव की प्रमोशन करनी मांग की। कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा, महासचिव रविंद्र तोमर, कोषाध्यक्ष अनिल लोहाट एवं प्रैस सचिव मनीश बालदा ने कहा कि कुलपति एवं कुलसचिव अपने पदों पर रहने के अधिकार खो चुके हैं। वे अपने कर्मचारियों के हकों का हल निकालने की बजाये अपने तुगलकी आदेश जारी कर इस आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कुंटिया का एक शिष्ट मंडल शीघ्र ही कुलाधिपति और मुख्यमंत्री से मिलकर इस तानाशाह कुलपति को हटाने की मांग करेंगें। वहीं कर्मचारियों की इस हड़ताल का छात्र संगठनों एसएफआई, एनएसयूआई, रोडवेज यूनियन, बिजली बोर्ड यूनियन, हरियाणा अध्यापक संघ, जन संघर्ष मंच, सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान धर्मवीर फोगाट ने समर्थन दिया। इस मौके पर पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़, पूर्व महासाचिव भारत भूषण, दीपक शर्मा, गुरमेल संधू, सतनारायण वर्मा, नरेंद्र वर्मा, सतीश शर्मा, दलबीर मान, संत कुमार, संदीप जढौला, रामफल, भूषण चैहान, विष्णु नाथ, कृष्ण पाण्डे, राजकुमार ढींगडा, शमसेर सिंह, टीका राम, प्रवीण मथाना, अजमेर सिंह, जगदीश खनौदा, रूपेश खन्ना, चंद्रपाल, कर्मवीर, सुनील शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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