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गांवों के विकास का खाका खिंचने तक सिमटी सरकार तो अधिकारी आश्वासन पर ही अटके

Sun, 20 Aug 2017 10:32 PM IST
Updated Sun, 20 Aug 2017 10:32 PM IST
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गांवों के विकास का खाका खिंचने तक सिमटी सरकार तो अधिकारी आश्वासन पर ही अटके
चुनाव के बाद डेढ़ वर्ष में कई ग्राम पंचायतों को नहीं मिल पाया ग्रांट का एक भी पैसा
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फोटो 2,3
सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार गांवों के विकास को लेकर योजनाओं का खाका खींच चुकी है और अब तक के कार्यकाल में भी गांवों की तस्वीर बदल दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। ग्राम पंचायतों के चुनाव के करीब डेढ़ वर्ष बाद भी आज तक अधिकतर ग्राम पंचायतें ग्रांट की बाट जोह रही है। इससे न केवल गांवों के विकास कार्य अटके हुए हैं बल्कि सरपंचों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में भी सरकार के प्रति रोष दिखाई देने लगा है। कम से कम कुरुक्षेत्र जिला में तो यही हालात बने हुए हैं, जहां अधिकतर सरपंच अधिकारियों से लेकर विधायकों के भी ग्रांट लेने के लिए चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
अभी तक उन्हें महज आश्वासन ही मिलते रहे हैं तो अब वर्ष 2018 के बजट में ही ग्रांट मिलने की उम्मीद की जा रही है। ग्रांट न मिलने से उन ग्राम पंचायतों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जहां पंचायत की अपनी आमदन का भी कोई जरिया नहीं है जबकि अधिकतर अन्य ग्राम पंचायतें सरकार की ओर से ग्रांट मिलने की बाट जोहने के बाद अपने संसाधनों से जुटाई आय से ही विकास कार्यों को पूरा करने में जुटी है।
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बता दें कि जिले में दर्जनों ग्राम पंचायतें हैं, जिनके पास न कृषि भूमि है तो न ही आय का कोई दूसरा संसाधन है और ये ग्राम पंचायतें पूरी तरह से विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली ग्रांट पर ही निर्भर हैं। ऐसे में इन ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों में न केवल रोष पनप रहा है बल्कि गांव के लोग उन पर तंज भी कसने लगे हैं। ऐसे में कई सरपंचों का यहां तक कहना है कि ऐसी चौधर का कोई फायदा नहीं, जिससे गांव में एक गली तक का निर्माण न किया जा सके।
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डेढ़ वर्ष में कुछ भी नहीं मिला : राजेंद्र
गांव मुंडाखेड़ा के सरपंच राजेंद्र सिंह का कहना है कि डेढ़ वर्ष में आज तक ग्रांट के रूप में कुछ भी नहीं मिल पाया है। हर रोज सरकारी कार्यालयों व विधायकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन आश्वासन ही मिलते रहे हैं। अब अधिकारी वर्ष 2018 में आने वाले बजट से ही ग्रांट मिलने की बात कहने लगे हैं। ऐसे में गांवों का विकास कैसे हो पाएगा? वे हर वर्ष ग्राम पंचायत की ओर से होने वाली कुछ आमदन से ही गांव में कार्य करवा रहे हैं।
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ग्रांट का एक पैसा भी नहीं मिला : रजत
गांव दयालपुर के सरपंच रजत का कहना है कि हालांकि प्रधानमंत्री ग्राम विकास योजना के अलावा गांव के विकास के लिए ग्रांट के रूप में सरकार की ओर से एक भी पैसा नहीं मिल पाया है। संबंधित अधिकारियों व विधायक से भी इस संबंध में कई बार बातचीत की गई, लेकिन ग्रांट की जगह आश्वासन ही मिलते रहे हैं।


यह सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला: डीडीपीओ
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रताप सिंह का कहना है कि यह सरकार के स्तर का मामला है। मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों और विधायकों की घोषणाओं का पैसा पंचायतों को जारी किया जा रहा है। सामान्य ग्रांट जैसे ही सरकार की ओर से जारी होगी, पंचायतों को दे दी जाएगी।
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