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जिला भर के निजी अस्पतालों में नहीं हो पाई करीब 2500 ओपीडी
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:50 PM IST
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निजी डॉक्टर उतरे हड़ताल पर, मरीज रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। जिला भर के निजी अस्पतालों के डॉक्टर आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को हड़ताल पर रहे, जिसके चलते अस्पतालों में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा तो वहीं एमरजेंसी मरीजों के अलावा करीब 2500 ओपीडी नहीं हो पाई। हड़ताल के चलते ओपीडी न होने से मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तो वहीं डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया व जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा। पहले से ही तय कार्यक्रम के अनुसार आईएमए के बैनर तले जिला भर के डॉक्टर सुबह ही जिला सचिवालय में एकत्रित हुए, जहां उन्होंने एक अपनी मांगों को लेकर जमकर रोष व्यक्त किया तो वहीं इसके उपरांत जिला उपायुक्त को केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान डॉ अजय अग्रवाल ने बताया कि आईएमए के आह्वान पर केंद्र सरकार की निजी अस्पतालों को लेकर बनाई गई नीतियों के विरोध में आज देश भर में सुबह नौ बजे से लेकर सांय पांच बजे तक हड़ताल रही है, लेकिन सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया तो यह रोष और भी गहरा सकता है। उधर निजी अस्पतालों में एमरजेंसी सेवाएं जारी रखी तो वहीं हड़ताल के चलते करीब 2500 ओपीडी नहीं हो पाई और मरीजों को भटकने को मजबूर होना पड़ा। इस दौरान डॉ एस के अग्रवाल, डॉ केसी नागपाल, डॉ सुभार्ष गर्ग, डॉ प्रदीप गुप्ता, डॉ आनंद, डॉ विजय गुप्ता के अलावा अन्य डॉक्टर भी रोष प्रदर्शन में शामिल रहे।
मायूसी के साथ लौटे मरीज
निजी अस्पतालों में जहां हर रोज करीब 2500 ओपीडी जिला भर में होती रही है वहीं मंगलवार को भी लगभग इतने ही मरीज इन अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन ओपीडी बंद होने से उन्हें मायूसी के साथ लौटना पड़ा। हालांकि इस दौरान जिला भर में किसी गंभीर में पहुंचे मरीज की सूचना नहीं, लेकिन रूटिन के मरीजों को भी हड़ताल से परेशानी उठानी पड़ी। गांव सुनहेड़ी से आए गुरदीप, कनिपला से आए अजमेर व गांव मिर्जापुर से आए संदीप सहित कई अन्य मरीजों का कहना था कि उन्हें हड़ताल के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उधर अनेकों मरीजों को सिविल अस्पतालों का भी रूख करना पड़ा। कई अस्पतालों के कर्मियों ने बताया कि अस्पतालों में मरीज सामान्य दिनों की तरह ही आते रहे, लेकिन उन्हें बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
ये रही मुख्य मांगे
रोष जता रहे निजी डॉक्टरों की मुख्य मांगों में छोटे अस्पतालों को बचाने के लिए नीति बनाना, अस्पतालों को डेयरियों की तर्ज पर शहर से बाहर करने पर रोक लगाना, डॉक्टरों के साथ मारपीट किए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना, डॉक्टरों के लिए व्यापार लाईसेंस नीति खत्म करना व एमबीबीएस के बाद डॉक्टरों को इलाज के लिए अधिकार देना शामिल है।
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दिल्ली में भी पहुुंचे दर्जनों डॉक्टर: मेहता
आईएमए जिला प्रधान डॉ एस मेहता ने बताया कि जहां जिला भर में हड़ताल पूर्ण रूप से सफल रही वहीं निजी अस्पतालों में केवल एमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी गई। हड़ताल को लेकर सभी डॉक्टर एकजुट भी नजर आए। अधिकतर डॉक्टर जिला स्तर पर किए गए प्रदर्शन में शामिल रहे तो दर्जनों डॉक्टर दिल्ली में जताए गए रोष में भी पहुंचे। सरकार को देश भर में जताए गए इस रोष को गंभीरता से लेना चाहिए।
सिविल अस्पताल में बढ़ाई व्यवस्था : डॉ मुकेश
निजी अस्पतालों में हड़ताल के चलते स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट रहा। लोक नायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल में ओपीडी बढने की उम्मीद के चलते विशेष व्यवस्था की गई। अस्पताल के एमएस डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि जहां अस्पताल के सभी डॉक्टरों व अन्य कर्मियों को सर्तक रहने के निर्देश दिए गए तो वहीं एमरजेंसी वार्ड में भी दो अतिरिक्त डॉक्टर तैनात किए गए थे। लेकिन यहां ओपीडी अन्य दिनों की तरह करीब 1300 तक ही रही।
फोटो 21
मांगों को लेकर निजी चिकित्सकों ने रखे अपने अस्पताल बंद
- एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
शाहाबाद । मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी चिकित्सकों ने अपने अस्पताल बंद रखे, लेकिन एमरजेंसी सेवाएं जारी रखी। आईएम के प्रधान डा. आरएल आर्या व सचिव डा. राहुल गांधी ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर शाहाबाद के सभी चिकित्सकों ने एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि जनता आए दिन चिकित्सकों के प्रति हिंसात्मक रूख अपना रही है जिसके लिए सरकार को कड़ा कानून बनाना होगा अन्यथा चिकित्सकों के लिए कार्य करना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार नित नए कडे कानून बनाकर छोटे अस्पतालों को बंद करने पर उतारू है जिससे सभी चिकित्सक परेशान है और केवल बड़े बडे अस्पताल ही रह जाएंगे जिससे चिकित्सा सेवाएं आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार को दवाओं की कीमत पर नियंत्रण करके एक समान नीति बनानी होगी। विभिन्न कंपनियों द्वारा एक ही दवाई की अलग अलग कीमत वसूलने पर भी रोक लगानी होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। जिला भर के निजी अस्पतालों के डॉक्टर आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को हड़ताल पर रहे, जिसके चलते अस्पतालों में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा तो वहीं एमरजेंसी मरीजों के अलावा करीब 2500 ओपीडी नहीं हो पाई। हड़ताल के चलते ओपीडी न होने से मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तो वहीं डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया व जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा। पहले से ही तय कार्यक्रम के अनुसार आईएमए के बैनर तले जिला भर के डॉक्टर सुबह ही जिला सचिवालय में एकत्रित हुए, जहां उन्होंने एक अपनी मांगों को लेकर जमकर रोष व्यक्त किया तो वहीं इसके उपरांत जिला उपायुक्त को केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान डॉ अजय अग्रवाल ने बताया कि आईएमए के आह्वान पर केंद्र सरकार की निजी अस्पतालों को लेकर बनाई गई नीतियों के विरोध में आज देश भर में सुबह नौ बजे से लेकर सांय पांच बजे तक हड़ताल रही है, लेकिन सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया तो यह रोष और भी गहरा सकता है। उधर निजी अस्पतालों में एमरजेंसी सेवाएं जारी रखी तो वहीं हड़ताल के चलते करीब 2500 ओपीडी नहीं हो पाई और मरीजों को भटकने को मजबूर होना पड़ा। इस दौरान डॉ एस के अग्रवाल, डॉ केसी नागपाल, डॉ सुभार्ष गर्ग, डॉ प्रदीप गुप्ता, डॉ आनंद, डॉ विजय गुप्ता के अलावा अन्य डॉक्टर भी रोष प्रदर्शन में शामिल रहे।
मायूसी के साथ लौटे मरीज
निजी अस्पतालों में जहां हर रोज करीब 2500 ओपीडी जिला भर में होती रही है वहीं मंगलवार को भी लगभग इतने ही मरीज इन अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन ओपीडी बंद होने से उन्हें मायूसी के साथ लौटना पड़ा। हालांकि इस दौरान जिला भर में किसी गंभीर में पहुंचे मरीज की सूचना नहीं, लेकिन रूटिन के मरीजों को भी हड़ताल से परेशानी उठानी पड़ी। गांव सुनहेड़ी से आए गुरदीप, कनिपला से आए अजमेर व गांव मिर्जापुर से आए संदीप सहित कई अन्य मरीजों का कहना था कि उन्हें हड़ताल के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उधर अनेकों मरीजों को सिविल अस्पतालों का भी रूख करना पड़ा। कई अस्पतालों के कर्मियों ने बताया कि अस्पतालों में मरीज सामान्य दिनों की तरह ही आते रहे, लेकिन उन्हें बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
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ये रही मुख्य मांगे
रोष जता रहे निजी डॉक्टरों की मुख्य मांगों में छोटे अस्पतालों को बचाने के लिए नीति बनाना, अस्पतालों को डेयरियों की तर्ज पर शहर से बाहर करने पर रोक लगाना, डॉक्टरों के साथ मारपीट किए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना, डॉक्टरों के लिए व्यापार लाईसेंस नीति खत्म करना व एमबीबीएस के बाद डॉक्टरों को इलाज के लिए अधिकार देना शामिल है।
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दिल्ली में भी पहुुंचे दर्जनों डॉक्टर: मेहता
आईएमए जिला प्रधान डॉ एस मेहता ने बताया कि जहां जिला भर में हड़ताल पूर्ण रूप से सफल रही वहीं निजी अस्पतालों में केवल एमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी गई। हड़ताल को लेकर सभी डॉक्टर एकजुट भी नजर आए। अधिकतर डॉक्टर जिला स्तर पर किए गए प्रदर्शन में शामिल रहे तो दर्जनों डॉक्टर दिल्ली में जताए गए रोष में भी पहुंचे। सरकार को देश भर में जताए गए इस रोष को गंभीरता से लेना चाहिए।
सिविल अस्पताल में बढ़ाई व्यवस्था : डॉ मुकेश
निजी अस्पतालों में हड़ताल के चलते स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट रहा। लोक नायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल में ओपीडी बढने की उम्मीद के चलते विशेष व्यवस्था की गई। अस्पताल के एमएस डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि जहां अस्पताल के सभी डॉक्टरों व अन्य कर्मियों को सर्तक रहने के निर्देश दिए गए तो वहीं एमरजेंसी वार्ड में भी दो अतिरिक्त डॉक्टर तैनात किए गए थे। लेकिन यहां ओपीडी अन्य दिनों की तरह करीब 1300 तक ही रही।
फोटो 21
मांगों को लेकर निजी चिकित्सकों ने रखे अपने अस्पताल बंद
- एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
शाहाबाद । मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी चिकित्सकों ने अपने अस्पताल बंद रखे, लेकिन एमरजेंसी सेवाएं जारी रखी। आईएम के प्रधान डा. आरएल आर्या व सचिव डा. राहुल गांधी ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर शाहाबाद के सभी चिकित्सकों ने एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि जनता आए दिन चिकित्सकों के प्रति हिंसात्मक रूख अपना रही है जिसके लिए सरकार को कड़ा कानून बनाना होगा अन्यथा चिकित्सकों के लिए कार्य करना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार नित नए कडे कानून बनाकर छोटे अस्पतालों को बंद करने पर उतारू है जिससे सभी चिकित्सक परेशान है और केवल बड़े बडे अस्पताल ही रह जाएंगे जिससे चिकित्सा सेवाएं आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार को दवाओं की कीमत पर नियंत्रण करके एक समान नीति बनानी होगी। विभिन्न कंपनियों द्वारा एक ही दवाई की अलग अलग कीमत वसूलने पर भी रोक लगानी होगी।