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केयू मेस कर्मी लंबे समय से आंदोलन की राह पर, चाफ वार्डन बोले वे केयू कर्मचारी नहीं
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:44 AM IST
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केयू मेस कर्मी कर रहे आंदोलन, चीफ वार्डन बोले-वे केयू कर्मचारी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
केयू मेस वर्कर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो केयू चीफ वार्डन प्रो. सीपी सिंह का कहना है कि मेस कर्मचारियों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेस कर्मचारियों के वेतन में आंशिक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। उसे मेस कर्मचारियों ने ठुकरा दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन मेस कर्मचारियों को बातचीत के लिए तीन बार आमंत्रित कर चुका है। उन्होंने कर्मचारियों से आंदोलन छोड़ काम पर लौटने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि मेस कर्मी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कर्मचारी नहीं हैं, उनकी प्रत्येक हॉस्टल की मेस कमेटी के माध्यम से प्रत्येक वर्ष नई नियुक्तियां की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि मेस कमेटी ही इन्हें प्रति वर्ष शैक्षिक सत्र में मेस संबंधित कार्यों के लिए रखती है। पिछले लगभग 20 वर्षों से इन कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं से संबंधित अधिकारों के लिए कोर्ट केस कर रखा है। यह इस समय भी पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। मेस वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों से तीन बार बातचीत हो चुकी है। उन्हें सामयिक और आंशिक वेतन वृद्धि का प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन वे नहीं माने। यूनियन केवल डीसी रेट चाहती है, जिसे कोर्ट केस होने की वजह से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने मेस कर्मचारियों से अपील की कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वह प्रस्ताव को मानें और कोर्ट के फैसले आने तक अपने इस आंदोलन को वापस लें।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
केयू मेस वर्कर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो केयू चीफ वार्डन प्रो. सीपी सिंह का कहना है कि मेस कर्मचारियों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेस कर्मचारियों के वेतन में आंशिक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। उसे मेस कर्मचारियों ने ठुकरा दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन मेस कर्मचारियों को बातचीत के लिए तीन बार आमंत्रित कर चुका है। उन्होंने कर्मचारियों से आंदोलन छोड़ काम पर लौटने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि मेस कर्मी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कर्मचारी नहीं हैं, उनकी प्रत्येक हॉस्टल की मेस कमेटी के माध्यम से प्रत्येक वर्ष नई नियुक्तियां की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि मेस कमेटी ही इन्हें प्रति वर्ष शैक्षिक सत्र में मेस संबंधित कार्यों के लिए रखती है। पिछले लगभग 20 वर्षों से इन कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं से संबंधित अधिकारों के लिए कोर्ट केस कर रखा है। यह इस समय भी पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। मेस वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों से तीन बार बातचीत हो चुकी है। उन्हें सामयिक और आंशिक वेतन वृद्धि का प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन वे नहीं माने। यूनियन केवल डीसी रेट चाहती है, जिसे कोर्ट केस होने की वजह से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने मेस कर्मचारियों से अपील की कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वह प्रस्ताव को मानें और कोर्ट के फैसले आने तक अपने इस आंदोलन को वापस लें।
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