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सिविल अस्पताल के प्रसूति विभाग में व्यवस्था भंग, 34 बेड पर दाखिल 172 जच्चा-बच्चा
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:18 AM IST
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सिविल अस्पताल के प्रसूति विभाग में व्यवस्था भंग, 34 बेड पर दाखिल 172 जच्चा-बच्चा
- एक बेड पर तीन-चार महिलाएं दाखिल, पर्याप्त बेड के अभाव में डिलीवरी के अंतिम दिनों में गर्भवती महिलाएं फर्श पर बैठने को मजबूर
- प्रदेश सरकार के बेहतर सुविधाओं संबंधी दावे हवा-हवाई, उच्चाधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। सीएम, स्वास्थ्य मंत्री एवं विभागीय उच्चाधिकारियों के कई-कई बार दौरा करने के बाद भी सिविल अस्पताल के हालातों में कोई सुधार नहीं हो पाया है। एलएनजेपी अस्पताल के प्रसूूति विभाग में अव्यवस्था के चलते बनी भयावह स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रदेश सरकार को भी शर्मसार करने में कसर नहीं छोड़ी है। उच्चाधिकारियों की अनदेखी से प्रसूति विभाग में केवल 34 बेड पर दाखिल 172 जच्चा-बच्चा ने सिविल अस्पताल के प्रबंधों की पोल खोल दी है।
यही नहीं, कई गर्भवती महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनका डिलीवरी का समय बिल्कुल नजदीक आ चुका है और अंतिम पड़ाव के दौरान भी महिलाओं को पर्याप्त बेड की सुविधा नहीं मिल पाना स्वास्थ्य विभाग की बदतर व्यवस्था को दर्शाने के लिए काफी है। प्रसूता विभाग में दाखिल महिलाओं का दबी जुबान में कहना है कि यहां स्थिति डावांडोल है। एक ही बेड पर कई-कई प्रसूताएं लेटी हुई हैं। सीएमओ से लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी कुछ उपाय नहीं कर रहे। बताया कि प्रसूताओं के लावा गर्भवती महिलाएं भी बेड न मिलने से नीचे फर्श पर ही बैठने को मजबूर हैं।
शनिवार रात 12 बजे तक के रिकॉर्ड के अनुसार 34 बेड पर कुल 172 प्रसूताएं दाखिल थीं, जिनमें से 80 जच्चा-बच्चा और 92 गर्भवती महिलाएं हैं। एक बेड पर औसतन चार से पांच जच्चा-बच्चा दाखिल हैं। कुल 100 बेड वाले सिविल अस्पताल में बाकी के 66 बेड की हालत भी काफी दयनीय है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, प्रसूति विभाग के 34 बेड के अलावा अन्य वार्डों में स्थित 66 बेड पर भी रविवार को क्षमता से अधिक करीब 300 के आसपास मरीज दाखिल बताए गए। मरीजों साथ आने वाले तीमारदारों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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अस्पताल में केवल एक गायनी स्पेशलिस्ट
अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ केवल एक ही है और दो चिकित्सा अधिकारी हैं। ऐसे में समय पर गर्भवती महिलाओं की देखरेख नहीं हो पाती। गर्भवती महिलाओं के परिजनों ने विरोध स्वरूप 28 अगस्त को सिविल अस्पताल के समक्ष जाम भी लगाया था। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने दो चिकित्सा अधिकारियों को एलएनजेपी में डेपुटेशन पर तैनात किया, लेकिन समस्याएं फिर भी पहले की तरह हैं। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में प्रति माह औसतन 350 डिलीवरी होती हैं। शनिवार को देर रात तक कुल 11 डिलीवरी हुई, जिनमें से 8 डिलीवरी सामान्य और तीन सिजेरियन रहीं। वहीं रविवार दोपहर बाद तक 6 डिलीवरी हुईं।
मरीजों के मुकाबले बेड कम, लेकिन जल्द करेंगे सुधार : डॉ. मनजीत
मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि मरीजों के मुकाबले बेड की दिक्कत जरूर है, लेकिन इस असुविधा में जल्द ही सुधारा किया जाएगा। सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग तैयार हो रही है, जिसमें अलग से 200 बेड की व्यवस्था होगी। इसके बाद अस्पताल में 300 बेेड होने से समस्या से निजात मिल जाएगी।
- डॉ. मनजीत सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, एलएनजेपी अस्पताल
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सिविल अस्पताल के प्रसूति विभाग में व्यवस्था भंग, 34 बेड पर दाखिल 172 जच्चा-बच्चा
- एक बेड पर तीन-चार महिलाएं दाखिल, पर्याप्त बेड के अभाव में डिलीवरी के अंतिम दिनों में गर्भवती महिलाएं फर्श पर बैठने को मजबूर
- प्रदेश सरकार के बेहतर सुविधाओं संबंधी दावे हवा-हवाई, उच्चाधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। सीएम, स्वास्थ्य मंत्री एवं विभागीय उच्चाधिकारियों के कई-कई बार दौरा करने के बाद भी सिविल अस्पताल के हालातों में कोई सुधार नहीं हो पाया है। एलएनजेपी अस्पताल के प्रसूूति विभाग में अव्यवस्था के चलते बनी भयावह स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रदेश सरकार को भी शर्मसार करने में कसर नहीं छोड़ी है। उच्चाधिकारियों की अनदेखी से प्रसूति विभाग में केवल 34 बेड पर दाखिल 172 जच्चा-बच्चा ने सिविल अस्पताल के प्रबंधों की पोल खोल दी है।
यही नहीं, कई गर्भवती महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनका डिलीवरी का समय बिल्कुल नजदीक आ चुका है और अंतिम पड़ाव के दौरान भी महिलाओं को पर्याप्त बेड की सुविधा नहीं मिल पाना स्वास्थ्य विभाग की बदतर व्यवस्था को दर्शाने के लिए काफी है। प्रसूता विभाग में दाखिल महिलाओं का दबी जुबान में कहना है कि यहां स्थिति डावांडोल है। एक ही बेड पर कई-कई प्रसूताएं लेटी हुई हैं। सीएमओ से लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी कुछ उपाय नहीं कर रहे। बताया कि प्रसूताओं के लावा गर्भवती महिलाएं भी बेड न मिलने से नीचे फर्श पर ही बैठने को मजबूर हैं।
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शनिवार रात 12 बजे तक के रिकॉर्ड के अनुसार 34 बेड पर कुल 172 प्रसूताएं दाखिल थीं, जिनमें से 80 जच्चा-बच्चा और 92 गर्भवती महिलाएं हैं। एक बेड पर औसतन चार से पांच जच्चा-बच्चा दाखिल हैं। कुल 100 बेड वाले सिविल अस्पताल में बाकी के 66 बेड की हालत भी काफी दयनीय है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, प्रसूति विभाग के 34 बेड के अलावा अन्य वार्डों में स्थित 66 बेड पर भी रविवार को क्षमता से अधिक करीब 300 के आसपास मरीज दाखिल बताए गए। मरीजों साथ आने वाले तीमारदारों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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अस्पताल में केवल एक गायनी स्पेशलिस्ट
अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ केवल एक ही है और दो चिकित्सा अधिकारी हैं। ऐसे में समय पर गर्भवती महिलाओं की देखरेख नहीं हो पाती। गर्भवती महिलाओं के परिजनों ने विरोध स्वरूप 28 अगस्त को सिविल अस्पताल के समक्ष जाम भी लगाया था। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने दो चिकित्सा अधिकारियों को एलएनजेपी में डेपुटेशन पर तैनात किया, लेकिन समस्याएं फिर भी पहले की तरह हैं। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में प्रति माह औसतन 350 डिलीवरी होती हैं। शनिवार को देर रात तक कुल 11 डिलीवरी हुई, जिनमें से 8 डिलीवरी सामान्य और तीन सिजेरियन रहीं। वहीं रविवार दोपहर बाद तक 6 डिलीवरी हुईं।
मरीजों के मुकाबले बेड कम, लेकिन जल्द करेंगे सुधार : डॉ. मनजीत
मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि मरीजों के मुकाबले बेड की दिक्कत जरूर है, लेकिन इस असुविधा में जल्द ही सुधारा किया जाएगा। सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग तैयार हो रही है, जिसमें अलग से 200 बेड की व्यवस्था होगी। इसके बाद अस्पताल में 300 बेेड होने से समस्या से निजात मिल जाएगी।
- डॉ. मनजीत सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, एलएनजेपी अस्पताल