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शिक्षा के क्षेत्र में शुद्ध भारतीय दृष्टि लज्जाराम तोमर की ही देन : सिन्हा
Updated Sun, 19 Nov 2017 12:39 AM IST
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शिक्षा के क्षेत्र में शुद्ध भारतीय दृष्टि लज्जाराम तोमर की ही देन : सिन्हा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
राष्ट्रीय शिक्षा के पुरोधा लज्जाराम तोमर की स्मृति में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में ‘शिक्षा और संस्कृति के व्यक्तित्व : लज्जाराम तोमर’ विषय पर व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सह-संगठन मंत्री श्रीराम आरावकर ने की। मुख्य वक्ता विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के शोध निदेशक डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शुद्ध भारतीय दृष्टि लज्जाराम तोमर की ही देन है। कार्यक्रम में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान के परिसर में लगभग 400 छात्रों ने अष्टादशश्लोकी गीता का सामूहिक पाठ किया गया।
मंच संचालन करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने बताया कि लज्जाराम तोमर का शिक्षा और संस्कृति में योगदान अविस्मरणीय है। उनका गहन चिंतन और मनन भारतीय शिक्षा को ऐसे आधार प्रदान कर गया जो सागर-मंथन से निकले हुए अमृत कलश के समान मरणशील भारतीय शिक्षा को अमरत्व प्रदान कर सके। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भारतीय शिक्षा, भारतीय दर्शन पर लिखी गई उनकी पुस्तकें नवोदित छात्रों का राष्ट्र निर्माण में मार्गदर्शन कर रही हैं। उन्होंने भारतीय शिक्षा को एक नई दिशा देने का काम किया जो देशभर के लिए उनका बड़ा योगदान है। उन्होंने तोमर जी द्वारा शिक्षा पर लिखी पुस्तक अभिनव पंचपदी शिक्षण पद्धति के बारे में कहा कि इस शिक्षा पद्धति को प्रत्येक छात्र के लिए लागू किया जाए तो छात्र का ज्ञान इतना होगा कि संसार में उसका सानी नहीं होगा। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर ने कहा कि विद्यार्थियों को संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। आज संस्कृति ज्ञान परीक्षा का व्याप न केवल हिंदी या अंग्रेजी बल्कि देश की 13 भाषाओं में है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना तक सीमित नहीं है। यदि शिक्षा ग्रहण कर आप अच्छे मनुष्य न बन पाए तो सब व्यर्थ है। कार्यक्रम में प्रो. एएन मिश्रा, आईसी मित्तल, शशि मित्तल, डॉ. आर ऋषि, गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के प्राचार्य नारायण शास्त्री, सौरभ चौधरी, जितेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
राष्ट्रीय शिक्षा के पुरोधा लज्जाराम तोमर की स्मृति में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में ‘शिक्षा और संस्कृति के व्यक्तित्व : लज्जाराम तोमर’ विषय पर व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सह-संगठन मंत्री श्रीराम आरावकर ने की। मुख्य वक्ता विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के शोध निदेशक डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शुद्ध भारतीय दृष्टि लज्जाराम तोमर की ही देन है। कार्यक्रम में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान के परिसर में लगभग 400 छात्रों ने अष्टादशश्लोकी गीता का सामूहिक पाठ किया गया।
मंच संचालन करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने बताया कि लज्जाराम तोमर का शिक्षा और संस्कृति में योगदान अविस्मरणीय है। उनका गहन चिंतन और मनन भारतीय शिक्षा को ऐसे आधार प्रदान कर गया जो सागर-मंथन से निकले हुए अमृत कलश के समान मरणशील भारतीय शिक्षा को अमरत्व प्रदान कर सके। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भारतीय शिक्षा, भारतीय दर्शन पर लिखी गई उनकी पुस्तकें नवोदित छात्रों का राष्ट्र निर्माण में मार्गदर्शन कर रही हैं। उन्होंने भारतीय शिक्षा को एक नई दिशा देने का काम किया जो देशभर के लिए उनका बड़ा योगदान है। उन्होंने तोमर जी द्वारा शिक्षा पर लिखी पुस्तक अभिनव पंचपदी शिक्षण पद्धति के बारे में कहा कि इस शिक्षा पद्धति को प्रत्येक छात्र के लिए लागू किया जाए तो छात्र का ज्ञान इतना होगा कि संसार में उसका सानी नहीं होगा। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर ने कहा कि विद्यार्थियों को संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। आज संस्कृति ज्ञान परीक्षा का व्याप न केवल हिंदी या अंग्रेजी बल्कि देश की 13 भाषाओं में है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना तक सीमित नहीं है। यदि शिक्षा ग्रहण कर आप अच्छे मनुष्य न बन पाए तो सब व्यर्थ है। कार्यक्रम में प्रो. एएन मिश्रा, आईसी मित्तल, शशि मित्तल, डॉ. आर ऋषि, गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के प्राचार्य नारायण शास्त्री, सौरभ चौधरी, जितेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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