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कुंटिया के धरने से दो घंटे ठप रहा काम
Updated Thu, 19 Sep 2013 12:09 AM IST
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कुरुक्षेत्र में यूनिवर्सिटी कर्मचारियों की लंबित मांगों और कुंटिया के अंदरूनी मामलों में केयू प्रशासन की हस्तक्षेप के विरोध में वीसी कार्यालय के सामने कुंटिया की ओर से दूसरे दिन भी दो घंटे का धरना दिया गया। इस दौरान कुंटिया अध्यक्ष मान सिंह की अध्यक्षता में कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की।
मान सिंह ने कहा कि यदि केयू प्रशासन कुंटिया के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने से बाज नहीं आया तो कुंटिया का धरना इसी प्रकार जारी रहेगा।केयू प्रशासन के खिलाफ प्रतिदिन दो घंटे रोष प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने केयू प्रशासन को चेतावनी दी कि सभी मांगें जल्द से जल्द नहीं मानी गई तो केयू प्रशासन को इस के गंभीर परिणाम भुगतने होगें।
इस दौरान कुंटिया महासचिव सुनील कक्कड़ ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केयू प्रशासन कर्मचारियों का काफी समय से शोषण कर रहा है। उन्होंने केयू प्रशासन से अपील की है कि केयू में रिक्त पड़े पदों पर जल्द से जल्द कर्मचारियों की भर्ती की जाए, 2003 में पक्के किए गए कर्मचारियों के वेतन में वार्षिक वृद्धि की जाए, प्रेस एवं निर्माण शाखा में कार्यरत कर्मचारियों को हरियाणा सरकार की ओर से मंजूर 38 महीने का एरियर जल्द से जल्द दिया जाए।
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उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों को केयू प्रशासन ने पूरा नहीं किया तो यह आंदोलन भविष्य में हरियाणा के कर्मचारियों का आंदोलन बन जाएगा। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष पोली राम, कोषाध्यक्ष विजय शर्मा, प्रेस प्रवक्ता अमित कुमार, जयपाल सैनी, राजीव शर्मा, विक्रम सिंह, सतीश राणा, राजबीर सिंह, दीपक जोशी, दरबारा सिंह, जयप्रकाश, नीलकंठ शर्मा, रोताश शर्मा, नरेंद्र सिंह, आजाद सिंह, राम लाल, विजय, सुरेंद्र मलिक, नरेंद्र सिंह, भीम सिंह मौन, जगदीश सिंह, हनुमान, संतोष, कर्मवीर, नरेश, सतीश शर्मा, विनोद कुमार, कमला और विश्वास कुमार मौजूद रहे।
जायज मांगें मान ली थी केयू प्रशासन ने : केयू प्रवक्ता
केयू प्रशासन ने कुंटिया को कमजोर करने के आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा कि कुंटिया के पदाधिकारियों का यह बयान गैर-जिम्मेदाराना है। केयू प्रवक्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन किसी भी रूप में कर्मचारियों के किसी भी संघ के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता एवं सभी को अपना मत रखने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्हाेंने कहा कि कर्मचारियों से सदस्यता के रूप में दस रुपये प्रति माह वेतन से तभी काटे जाएंगे जब वे हस्ताक्षर करके इसके लिए निवेदन करेंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि केयू कुलसचिव ने कुंटिया के पदाधिकारियों को बातचीत करने के लिए 17 व 18 सितंबर को आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की जायज मांगें मान ली गई हैं। केयू प्रशासन ने कुंटिया से अपील की है कि वह यूनिवर्सिटी के काम को सुचारू रूप से चलाने में बाधा न डाले और यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विद्यार्थियों के कीमती वक्त को खराब न करें।
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मान सिंह ने कहा कि यदि केयू प्रशासन कुंटिया के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने से बाज नहीं आया तो कुंटिया का धरना इसी प्रकार जारी रहेगा।केयू प्रशासन के खिलाफ प्रतिदिन दो घंटे रोष प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने केयू प्रशासन को चेतावनी दी कि सभी मांगें जल्द से जल्द नहीं मानी गई तो केयू प्रशासन को इस के गंभीर परिणाम भुगतने होगें।
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इस दौरान कुंटिया महासचिव सुनील कक्कड़ ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केयू प्रशासन कर्मचारियों का काफी समय से शोषण कर रहा है। उन्होंने केयू प्रशासन से अपील की है कि केयू में रिक्त पड़े पदों पर जल्द से जल्द कर्मचारियों की भर्ती की जाए, 2003 में पक्के किए गए कर्मचारियों के वेतन में वार्षिक वृद्धि की जाए, प्रेस एवं निर्माण शाखा में कार्यरत कर्मचारियों को हरियाणा सरकार की ओर से मंजूर 38 महीने का एरियर जल्द से जल्द दिया जाए।
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उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों को केयू प्रशासन ने पूरा नहीं किया तो यह आंदोलन भविष्य में हरियाणा के कर्मचारियों का आंदोलन बन जाएगा। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष पोली राम, कोषाध्यक्ष विजय शर्मा, प्रेस प्रवक्ता अमित कुमार, जयपाल सैनी, राजीव शर्मा, विक्रम सिंह, सतीश राणा, राजबीर सिंह, दीपक जोशी, दरबारा सिंह, जयप्रकाश, नीलकंठ शर्मा, रोताश शर्मा, नरेंद्र सिंह, आजाद सिंह, राम लाल, विजय, सुरेंद्र मलिक, नरेंद्र सिंह, भीम सिंह मौन, जगदीश सिंह, हनुमान, संतोष, कर्मवीर, नरेश, सतीश शर्मा, विनोद कुमार, कमला और विश्वास कुमार मौजूद रहे।
जायज मांगें मान ली थी केयू प्रशासन ने : केयू प्रवक्ता
केयू प्रशासन ने कुंटिया को कमजोर करने के आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा कि कुंटिया के पदाधिकारियों का यह बयान गैर-जिम्मेदाराना है। केयू प्रवक्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन किसी भी रूप में कर्मचारियों के किसी भी संघ के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता एवं सभी को अपना मत रखने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्हाेंने कहा कि कर्मचारियों से सदस्यता के रूप में दस रुपये प्रति माह वेतन से तभी काटे जाएंगे जब वे हस्ताक्षर करके इसके लिए निवेदन करेंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि केयू कुलसचिव ने कुंटिया के पदाधिकारियों को बातचीत करने के लिए 17 व 18 सितंबर को आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की जायज मांगें मान ली गई हैं। केयू प्रशासन ने कुंटिया से अपील की है कि वह यूनिवर्सिटी के काम को सुचारू रूप से चलाने में बाधा न डाले और यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विद्यार्थियों के कीमती वक्त को खराब न करें।