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किसान आंदोलन: धर्म संकट में फंसे 'चौधरी', एक तरफ बिरादरी की 'पगड़ी' तो दूसरी तरफ 'हुकूमत'

Mon, 22 Feb 2021 03:30 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 22 Feb 2021 03:30 PM IST
सार

किसान आंदोलन तो हमारे लिए धर्म संकट बन गया है। किसान आंदोलन में जाट बिरादरी के लोगों की भारी संख्या है। वे हम पर दबाव डाल रहे हैं कि सरकार का साथ छोड़कर किसानों के बीच आ जाओ...

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Kisan andolan: Government gave responsibility to BJP Jat leaders to manage Khaps in Haryana and Uttar Pradesh
Sanjeev Balyan with Khap leaders - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

किसान आंदोलन को लेकर भाजपाई 'चौधरी' धर्म संकट में फंस गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से जुड़े इन चौधरियों में विशेषकर जाट समुदाय के बड़े नेता शामिल हैं। इनके सामने एक तरफ बिरादरी की पगड़ी है तो दूसरी ओर हुकूमत का फरमान है। केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व ने इन चौधरियों से साफतौर पर कह दिया है कि वे अपने इलाकों में जाकर किसानों से बात करें। उन्हें कृषि कानूनों के बारे में विस्तार से बताएं।

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इन चौधरियों में कई ऐसे नेता भी शामिल हैं जो 2016 के दौरान हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन में बतौर सरकारी नुमाइंदे फेल हो गए थे। हरियाणा के एक जाट नेता जो इन दिनों भाजपा में बड़े पद पर हैं, ने अनौपचारिक बातचीत में कहा, ये किसान आंदोलन तो हमारे लिए धर्म संकट बन गया है। किसान आंदोलन में जाट बिरादरी के लोगों की भारी संख्या है। वे हम पर दबाव डाल रहे हैं कि सरकार का साथ छोड़कर किसानों के बीच आ जाओ।
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केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को सरकार ने हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन में लोगों को समझाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। उस दौरान भी उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। हालांकि उन्होंने जाट प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें की थीं। अब किसान आंदोलन में भी केंद्र सरकार ने बालियान को जाट नेताओं के साथ बातचीत कर उन्हें कृषि कानूनों की जानकारी देने के लिए कहा है। इसके बाद उन्होंने अपने दिल्ली स्थित आवास पर जाट नेताओं के साथ बैठक की थी। किसानों से बात करने के लिए जब केंद्रीय मंत्री बालियान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में पहुंचे, तो उन्हें गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए किसानों ने एंट्री प्वाइंट पर ट्रैक्टर ट्रॉली खड़े कर दिए।
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किसान नेता राकेश टिकैत ने अभी तक जितनी भी महापंचायतें की हैं, वे ज्यादातर जाट बाहुल्य क्षेत्रों में हुई हैं। अब उन्हीं जगहों पर भाजपा के जाट चेहरों को भेजने की कवायद शुरू की गई है। हरियाणा भाजपा के जाट नेता के मुताबिक हम जानते हैं कि किसान नाराज हैं। वह किसी भी सूरत में हमारी बात नहीं सुनेगा। मौजूदा स्थिति ऐसी है कि कोई भी जाट नेता अगर किसानों के बीच पहुंचकर कृषि कानूनों के पक्ष की बात करता है तो उसे विरोध झेलना पड़ता है।

कई इलाकों में पार्टी नेताओं का सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी तरफ सरकार और पार्टी का दबाव है कि वे किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें समझाएं। ऐसे में हमारे सामने धर्म संकट आ गया है। अब हम किसकी सुनें, बिरादरी का पगड़ी और मान सम्मान का ख्याल तो रखना ही होगा। इनके बिना आगामी चुनाव में मुश्किल आ सकती है। हरियाणा में चौ बीरेंद्र सिंह और उनके सांसद बेटे ब्रजेंद्र सिंह भी आंदोलनकारी किसानों के बीच नहीं जा पा रहे हैं। भिवानी-महेंद्रगढ़ के लोकसभा सांसद धर्मवीर भी इस मामले में शांत हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपाई जाट नेता भी सरकार के फरमान पर कदम आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। गांवों में उन्हें अपनी बिरादरी का भारी विरोध झेलना पड़ता है।

अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के अध्यक्ष दीपक राठी कहते हैं, सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए। अगर सरकार जबरदस्ती आंदोलन को तोड़ने का प्रयास करेगी, तो किसानों का विरोध झेलना होगा। जाट समुदाय के नेताओं से सरकार को बातचीत करनी चाहिए।


दूसरी तरफ राष्ट्रीय जाट महासंघ के पदाधिकारी रोहित जाखड़ कह चुके हैं कि सरकार को एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए। तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। जब तक ये मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब किसान नेता, गांवों का रुख कर रहे हैं। सभी समुदायों को साथ लेकर आंदोलन को तेज किया जाएगा।

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