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Karnal News: काला मोतिया का शिकार हो रहे युवा

Sat, 16 Mar 2024 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 16 Mar 2024 02:35 AM IST
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Youth becoming victims of cataract
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिले में उम्र 40 की दहलीज पर युवा ग्लूकोमा यानी काला मोतिया जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे है। जिला नागरिक अस्पताल व कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिमाह 25 से 30 व्यक्ति काला मोतियाबिंद से पीड़ित संदिग्ध पहुंच रहे है। नेत्र रोग विशेषज्ञ आंखों का प्रेशर चेक कर रहे हैं। जिन मरीजों की आंखों का प्रेशर 21 से अधिक रहता है तो उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया जाता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिका भटनागर ने बताया कि गलत खानपान और बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारी आंखों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी वजह से लोग अपनी आंखों की रोशनी खोने लगते हैं और आंखों में और भी कई तरह की गंभीर परेशानियां हो जाती हैं। जिनमें से मोतियाबिंद और काला मोतियाबिंद भी एक है। जिनको मधुमेह यानी शुगर है या फिर जिनके परिवार में पहले किसी को काला मोतिया हो चुका हो, वे काला मोतिया बीमारी की उच्च जोखिम श्रेणी में शामिल होते है।
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इसके अलावा नजदीक के चश्मे का नंबर अगर बार-बार बदल रहा है तो वे समय-समय पर अपनी आंखों की जांच जरूर करवाएं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग इस बार ग्लूकोमा-मुक्त दुनिया के लिए एकजुट होना थीम पर विश्व ग्लूकोमा सप्ताह यानी काला मोतियाबिंद दिवस मनाया जा रहा है।
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डॉ. नीतिका ने बताया कि आमतौर पर काला मोतियाबिंद के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन आंख व सिर में दर्द, रोशनी के आसपास रंगीन छल्ले जैसा दिखाई देना, आंखें लाल रहना, नजर कमजोर होना व धुंधला दिखाई देना आदि लक्षण हो सकते है। वहीं काला मोतियाबिंद होने से आंखों की ऑप्टिक नर्व पर काफी दबाव पड़ने लगता है और ऐसा लगातार होने पर ऑप्टिव नर्व हमेशा के लिए नष्ट भी हो जाती है।


उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग मोतियाबिंद को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे काला मोतियाबिंद हो जाता है और एक बार जब किसी व्यक्ति को काला मोतियाबिंद हो जाता है तो उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है, इसे वापस नहीं लाया जा सकता है। जरूरी है कि समय-समय पर आंखों की जांच करवाई जाए, जिससे किसी भी तरह की परेशानी होने पर समय रहते इलाज करवाया जा सके।
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