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Karnal News: तारकोल की किल्लत, महंगा भी हुआ...सीमेंट-कंक्रीट से बनेंगी सड़कें
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करनाल। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पेट्रोलियम आपूर्ति प्रभावित होने और तारकोल (बिटुमिन) के दाम बढ़ने का असर अब शहर की सड़कों के निर्माण पर भी दिखाई देने लगा है। निर्माण लागत में बढ़ोतरी के बीच नगर निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने 300 से ज्यादा सड़कों को सीमेंट-कंक्रीट से बनाने की दिशा में काम शुरू किया है।
पहले चरण में कॉलोनियों के अंदर की सड़कों और गलियों पर फोकस किया जा रहा है। अब तक इनमें से अधिकांश सड़कें तारकोल से बनाई जाती थीं लेकिन बिटुमिन की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों ने निर्माण के विकल्प पर विचार करने की जरूरत बढ़ा दी है।
तारकोल के बाजार भाव में पिछले लंबे समय के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। निर्माण ठेकेदारों के अनुसार, जहां बिटुमिन करीब 40 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 72 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है यानी प्रति किलोग्राम करीब 32 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे तारकोल आधारित सड़क निर्माण की लागत पर दबाव बढ़ा है।
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नगर निगम की एक्सईएन मोनिका और प्रियंका ने बताया कि शुरुआती चरण में कॉलोनियों के भीतर की सड़कों को प्राथमिकता देने की तैयारी है। कुछ सड़कों के टेंडर भी लगा दिए हैं। जबकि बाजारों व मुख्य सड़कों का निर्माण तारकोल से ही किया जाएगा।
पहले चरण में इतने खर्च से यहां बनेंगी सीमेंट कंक्रीट सड़कें
वार्ड-12 के चार चमन क्षेत्र में गलियों का निर्माण पर 21.17 लाख रुपये।
वार्ड-14 में गली नंबर-3 में सीमेंट कंक्रीट से सड़क, नाला और सीवर लाइन पर 29.66 लाख होंगे खर्च
वार्ड-14 में पीर से अपना आशियाना आश्रम चौक तक 16.27 लाख से सड़क निर्माण।
वार्ड-16 के शिवाजी कांप्लेक्स कॉलोनी की आंतरिक सड़कों का निर्माण पर 68.46 लाख रुपये।
वार्ड-18 प्रेम नगर में अमरीक सिंह के मकान से अवतार सिंह के मकान तक 33,79,895 रुपये।
वार्ड-18 में सनातन धर्म मंदिर से श्री राम फोटोस्टेट दुकान तक गली बनेगी 8.20 लाख रुपये।
एक्सपर्ट व्यू
15 लाख रुपये तक महंगी... पर गलियों के निर्माण का विकल्प सही
सिविल इंजीनियर मुकेश के अनुसार, 200 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी सड़क यानी करीब 32,292 वर्ग फीट क्षेत्र के निर्माण यदि हरियाणा सरकार के आधिकारिक गजट के अनुसार किया जाए तो उसमें सड़क की ऊपरी परत ही नहीं, बल्कि नीचे की परतें और अन्य कार्य भी शामिल होते हैं। तारकोल से कंक्रीट की सड़क करीब 15 लाख रुपये महंगी पड़ेगी लेकिन यदि अब तारकोल महंगा होने पर लागत बढ़ती है तो कंक्रीट सड़क सही विकल्प है। क्योंकि इसकी मियाद लंबी है और जल्दी टूटती नहीं है।
तारकोल की सड़क : 72 लाख रुपये लागत आएगी, 2400 रुपये प्रति वर्ग मीटर खर्च।
सीमेंट-कंक्रीट सड़क : कुल 87 लाख रुपये लागत, 2900 प्रति वर्ग मीटर खर्च।
दोनों सड़कों में मुख्य अंतर
तारकोल (बिटुमिन)
शुरुआती निर्माण लागत कम
सड़क जल्दी तैयार हो जाती है और यातायात भी जल्दी शुरू किया जा सकता है।
खुदाई करके पानी, सीवर या गैस की पाइपलाइन डालने के बाद मरम्मत अपेक्षाकृत आसान होती है।
गर्मी में भारी वाहनों के दबाव से सतह पर लहरें या गड्ढे बन सकते हैं।
पानी नीचे पहुंचने और निकासी खराब होने पर सड़क जल्दी टूट सकती है।
सीमेंट-कंक्रीट की सड़क
शुरुआती निर्माण लागत सामान्यतः अधिक
कंक्रीट को पर्याप्त मजबूती प्राप्त करने के लिए क्योरिंग और निर्धारित समय चाहिए।
भारी यातायात और गर्मी में आकार बिगड़ने के प्रति अधिक प्रतिरोधी
बार-बार तारकोल की नई परत चढ़ाने की जरूरत नहीं।
पाइपलाइन के लिए सड़क काटने पर मरम्मत महंगी होती है। जोड़, दरारें और जलनिकासी भी महत्वपूर्ण हैं।
पंचायती राज की 70 और पीडब्ल्यूडी की 65 से ज्यादा सड़कों का निर्माण अटका
तारकोल की आपूर्ति कम होने या कीमत ज्यादा होने से पिछले करीब पांच माह से जिले में पंचायती राज की 70 और पीडब्ल्यूडी की 65 से ज्यादा सड़कों का निर्माण कार्य अटका हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदारों की ओर से काम में आनाकानी की जाने लगी है। उनका तर्क है कि जिस कीमत पर टेंडर जारी हुए थे, उससे ज्यादा कीमत अब निर्माण कार्य पर पड़ रही है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन संदीप सिंह का कहना है कि जरूरी सड़कों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। कुछ टेंडर भी रिवाइज हुए हैं। मुख्य मार्ग और राजमार्गों की सड़क तारकोल से ही बनाई जा सकती है।
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पहले चरण में कॉलोनियों के अंदर की सड़कों और गलियों पर फोकस किया जा रहा है। अब तक इनमें से अधिकांश सड़कें तारकोल से बनाई जाती थीं लेकिन बिटुमिन की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों ने निर्माण के विकल्प पर विचार करने की जरूरत बढ़ा दी है।
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तारकोल के बाजार भाव में पिछले लंबे समय के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। निर्माण ठेकेदारों के अनुसार, जहां बिटुमिन करीब 40 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 72 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है यानी प्रति किलोग्राम करीब 32 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे तारकोल आधारित सड़क निर्माण की लागत पर दबाव बढ़ा है।
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नगर निगम की एक्सईएन मोनिका और प्रियंका ने बताया कि शुरुआती चरण में कॉलोनियों के भीतर की सड़कों को प्राथमिकता देने की तैयारी है। कुछ सड़कों के टेंडर भी लगा दिए हैं। जबकि बाजारों व मुख्य सड़कों का निर्माण तारकोल से ही किया जाएगा।
पहले चरण में इतने खर्च से यहां बनेंगी सीमेंट कंक्रीट सड़कें
वार्ड-12 के चार चमन क्षेत्र में गलियों का निर्माण पर 21.17 लाख रुपये।
वार्ड-14 में गली नंबर-3 में सीमेंट कंक्रीट से सड़क, नाला और सीवर लाइन पर 29.66 लाख होंगे खर्च
वार्ड-14 में पीर से अपना आशियाना आश्रम चौक तक 16.27 लाख से सड़क निर्माण।
वार्ड-16 के शिवाजी कांप्लेक्स कॉलोनी की आंतरिक सड़कों का निर्माण पर 68.46 लाख रुपये।
वार्ड-18 प्रेम नगर में अमरीक सिंह के मकान से अवतार सिंह के मकान तक 33,79,895 रुपये।
वार्ड-18 में सनातन धर्म मंदिर से श्री राम फोटोस्टेट दुकान तक गली बनेगी 8.20 लाख रुपये।
एक्सपर्ट व्यू
15 लाख रुपये तक महंगी... पर गलियों के निर्माण का विकल्प सही
सिविल इंजीनियर मुकेश के अनुसार, 200 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी सड़क यानी करीब 32,292 वर्ग फीट क्षेत्र के निर्माण यदि हरियाणा सरकार के आधिकारिक गजट के अनुसार किया जाए तो उसमें सड़क की ऊपरी परत ही नहीं, बल्कि नीचे की परतें और अन्य कार्य भी शामिल होते हैं। तारकोल से कंक्रीट की सड़क करीब 15 लाख रुपये महंगी पड़ेगी लेकिन यदि अब तारकोल महंगा होने पर लागत बढ़ती है तो कंक्रीट सड़क सही विकल्प है। क्योंकि इसकी मियाद लंबी है और जल्दी टूटती नहीं है।
तारकोल की सड़क : 72 लाख रुपये लागत आएगी, 2400 रुपये प्रति वर्ग मीटर खर्च।
सीमेंट-कंक्रीट सड़क : कुल 87 लाख रुपये लागत, 2900 प्रति वर्ग मीटर खर्च।
दोनों सड़कों में मुख्य अंतर
तारकोल (बिटुमिन)
शुरुआती निर्माण लागत कम
सड़क जल्दी तैयार हो जाती है और यातायात भी जल्दी शुरू किया जा सकता है।
खुदाई करके पानी, सीवर या गैस की पाइपलाइन डालने के बाद मरम्मत अपेक्षाकृत आसान होती है।
गर्मी में भारी वाहनों के दबाव से सतह पर लहरें या गड्ढे बन सकते हैं।
पानी नीचे पहुंचने और निकासी खराब होने पर सड़क जल्दी टूट सकती है।
सीमेंट-कंक्रीट की सड़क
शुरुआती निर्माण लागत सामान्यतः अधिक
कंक्रीट को पर्याप्त मजबूती प्राप्त करने के लिए क्योरिंग और निर्धारित समय चाहिए।
भारी यातायात और गर्मी में आकार बिगड़ने के प्रति अधिक प्रतिरोधी
बार-बार तारकोल की नई परत चढ़ाने की जरूरत नहीं।
पाइपलाइन के लिए सड़क काटने पर मरम्मत महंगी होती है। जोड़, दरारें और जलनिकासी भी महत्वपूर्ण हैं।
पंचायती राज की 70 और पीडब्ल्यूडी की 65 से ज्यादा सड़कों का निर्माण अटका
तारकोल की आपूर्ति कम होने या कीमत ज्यादा होने से पिछले करीब पांच माह से जिले में पंचायती राज की 70 और पीडब्ल्यूडी की 65 से ज्यादा सड़कों का निर्माण कार्य अटका हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदारों की ओर से काम में आनाकानी की जाने लगी है। उनका तर्क है कि जिस कीमत पर टेंडर जारी हुए थे, उससे ज्यादा कीमत अब निर्माण कार्य पर पड़ रही है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन संदीप सिंह का कहना है कि जरूरी सड़कों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। कुछ टेंडर भी रिवाइज हुए हैं। मुख्य मार्ग और राजमार्गों की सड़क तारकोल से ही बनाई जा सकती है।