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Karnal News: चिट्ठी से अनजान युवा पीढ़ी, 83 फीसदी ने कभी नहीं लिखी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 02:47 AM IST
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Young generation unaware of letters, 83 percent have never written
- सोशल मीडिया पर ही सीमित रह गई नई पीढ़ी, ई-मेल का इस्तेमाल भी नाममात्र
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माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। चिट्ठियां न सिर्फ भाषा अपितु उस भाषा के व्याकरण पर अपनी पकड़ मज़बूत करने का एक ज़रिया है। जब भाषा, भाव व भावनाओं के तालमेल से एक पत्र लिखा जाता है तो निश्चय ही पढ़ने वाले के मनो-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ जाता है। पढ़ने वाला पत्र में लिखे भावों में कभी उत्साहित, कभी उत्सुक, कभी खुश, कभी दु:खी, कभी क्रोधी, कभी शांत तो कभी भावविह्वल होकर रो पड़ता है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी चिट्ठी से अनजान है। 83 फीसदी युवा ऐसे हैं, जिन्होंने आज तक हाथ से पत्र नहीं लिखा।

विश्व डाक दिवस के अवसर पर अमर उजाला की ओर से युवा पीढ़ी पर पत्र लेखन के संदर्भ में एक सर्वे कराया गया। पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय पीजी कॉलेज के अलग-अलग विभाग के 100 विद्यार्थियों से अमर उजाला की टीम ने बात करके पत्र लेखन के बारे में जानकारी जुटाई। जिसमें 100 विद्यार्थियों में से महज नौ ऐसे मिले, जिन्होंने कभी पत्र लिखा है। इसके अलावा आठ युवा ऐसे भी मिले, जिन्होंने पिता या परिवार के कहने पर पत्र लिखा। जबकि 83 युवा पत्र लेखन और इसकी शैली से पूरी तरह से अनजान थे।
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व्हाट्सएप संदेश का बढ़ा प्रचलन

आधुनिक समय ने पत्र लेखन की आदतों पर ऐसा गहरा प्रभाव डाला है कि हर कोई सरल संदेश माध्यम को ही वरीयता देता है। डिजिटल मीडिया ने लोगों की लेखन शैली को प्रभावित किया है। व्हाट्सएप के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हो गया है। जिसके माध्यम से घंटों की खबर मिनटों में व मिनटों की खबर सेकंडों में व्हाट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम आदि सोशल मीडिया के जरिए दूसरों तक भेजी जा रही है।
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सोशल मीडिया ने बदली आदत

सोशल मीडिया ने लोगों की लेखन की आदत को बदल दिया है। जिसका असर उनकी लिखावट, लेखन की कार्य क्षमता पर पड़ता है। स्कूलों में बच्चों के लेखन की क्रिया पर जोर देना चाहिए ताकि लिखने की आदत बनी रहे। लेखनी में सुधार आए। विद्यार्थियों को आज पत्र लिखना तक नहीं आता ।
- डॉ. राजेश्वर लाठर, प्राध्यापक



पढ़कर पुरानी यादें होती हैं ताजा

पत्र लेखन एक कला है। कला एक ऐसा कौशल है जिसे सीखने की तुलना में अभ्यास द्वारा अधिक प्रभावी ढंग से सीखा जा सकता है। हमारी जितनी ज्यादा लिखने की आदत होगी, लेखनी में उतना ही सुधार होगा। पुराने पत्रों को पढ़कर बीते दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं। मैंने अपने पिताजी का 1998 का पत्र अब तक सहेज कर रखा हुआ है।

- डॉ दिनेश गुप्ता, प्राध्यापक



हर शब्द बाहर लाता है मन के भाव

पत्र लेखन लोगों की अभिव्यक्ति को उजागर करता है। लेखन की प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी है। इससे लिखावट में सुधार होता है। बदलते वक्त के साथ लेखनी की आदतें खत्म होती जा रही है। स्कूलों व कॉलेजों में लेखनी पर प्रतियोगिता होनी चाहिए। पत्र मन के भावों को सामने लाकर रख देता है। जाहिर है, इसकी लेखन शैली भी मजबूत होगी।
- डॉ रश्मि सिंह, प्राध्यापक
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