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अवैध कब्जे पर नहीं चल पाया पीला पंजा, विरोध के बाद लौटना पड़ा वापस
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:42 AM IST
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अवैध कब्जे पर नहीं चल पाया पीला पंजा, विरोध के बाद लौटना पड़ा वापस
- फोटो : Amar Ujala
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हरियाणा विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा बुधवार को सेक्टरों से अवैध कब्जा हटाने के असफल कोशिश के बाद गुरुवार को हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीयल एंड इंफ्रास्ट्रेक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) के अधिकारी पीला पंजा लेकर अपनी जमीन से अवैध कब्जा हटाने निकले, लेकिन लोगों के भारी विरोध और सडक़ जाम किए जाने के कारण इन अधिकारियों को भी कुछ देर में उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। हालांकि विरोध शुरू से पहले टीम ने विभाग की जमीन पर बने करीब पांच अवैध निर्माण को तोड़ दिया।
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एचएसआईआईडीसी की टीम नायब तहसीलदार राजबक्श के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ सुबह के समय सेक्टर- 3 के पास स्थित रामदेव कॉलोनी पहुंची। यहां पर विभाग की जमीन पर बने निर्माण को पीला पंजा चलाकर गिराया जाने लगा। यहां पर अधिकारी जब तक अवैध रूप से बने सभी निर्माण को तुड़वाते, तब तक लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। सैकड़ों की तादाद में लोग एकत्रित होकर राज्य सरकार और विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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लोगों की भीड़ बढ़ती देख मौके पर मौजूद पुलिस बल लोगों को खदेड़ने लगी, लेकिन कुछ देर में पब्लिक पुलिस बल पर भारी पड़ने लगी। अधिकारियों और पुलिस बल को आम लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा, मजबूरन अधिकारियों को बिना कार्य पूरा किए उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। टीम के लौटने के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और आसपास के सड़क को जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक जाम और विरोध के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों और पुलिसबल ने लोगों को शांत कराकर घर भेजा।
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दो घंटे तक लगा रहा जाम रहा बजीदा रोड
अवैध निर्माण हटाने गई टीम का विरोध कर रहे लोगों ने करीब दो घंटे तक बजीदा रोड को जाम रखा। जिस कारण जुडला गेट से सब्जीमंडी जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटो तक चली प्रशासन विरोधी नारेबाजी और विरोध के बाद मौके पर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे नायब तहसीलदार राजबक्श और एसएचओ सिटी मोहन लाल ने समझाबुझा कर जाम हटवाया। इस दौरान भी कुछ लोगों ने पुलिस के साथ धक्कामुक्की करने की कोशिश भी की, पुलिस की सख्ती के आगे उनकी एक न चली।
लोगों का कहना हमारे पास रजिस्ट्री और इंतकाल
लोगों का आरोप था कि विभाग हमारे जायज निर्माण को जबरन अवैध घोषित कर तोड़ रही है, जबकि इन निर्माणों का हमारे पास रजिस्ट्री और इंतकाल भी है। सेक्टर-15 के पार्षद सतीश कुमार ने कहा कि विभाग जिन निर्माणों को गिरा रहा है, वे सभी जायज हैं। इनमें से कुछ निर्माण पर विवाद है, लेकिन उसका केस अभी हाईकोर्ट में लंबित है। इसी मामले को लेकर आगामी 27 फरवरी को कोर्ट में सुनवाई है। सतीश ने कहा कि यह बात विभाग के अधिकारियों को भी बताई गई थी, लेकिन इसके बाद भी यहां पर तोड़फोड़ मचाया गया।
नहीं दिया गया नोटिस
कोई निर्माण गिराने से पहले विभाग बकायदा लोगों को नोटिस देता है, जिससे वे घर या दुकान के अंदर पड़े अपने कीमती सामान को निकाल सके। लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि उन्हें विभाग द्वारा कोई नोटिस नहीं दिया गया। सेक्टर- 13 के पार्षद विनोद तितोरिया ने कहा कि यहां पर बने सभी निर्माण की रजिस्ट्री 1992-95 की हैं। कानूनी रूप से सभी जायज हैं। अगर कुछ पर विवाद है तो विभाग उन्हें पहले नोटिस देता, उसके बाद कार्रवाई करता। बिना नोटिस दिए कई निर्माणों को गिरा दिया गया, जिससे उसके अंदर मौजूद हजारों की कीमती का नुकसान हो गया। विभाग इस नुकसान की भरपाई करे।