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World Environment Day: अनियमित मौसम चक्र ने फीका किया तरबूज और खरबूज का स्वाद, किसानों को भारी नुकसान
Mon, 05 Jun 2023 10:13 AM IST
नवीन दलाल
देव शर्मा, करनाल (हरियाणा)
देव शर्मा, करनाल (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Mon, 05 Jun 2023 10:13 AM IST
सार
मई-जून की गर्मी मौसमी फलों आदि के लिए बेहद आवश्यक होती है। क्योंकि जितनी अधिक गर्मी होगी, खरबूज, तरबूज में उतनी ही मिठास आएगी। लेकिन अनियमित मौसम चक्र का असर पर्यावरण पर होता दिखाई दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन के अनियमित मौसम चक्र से लोगों को भले ही झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिली हो, लेकिन मौसम के इस बदलाव ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लगे तरबूज-खरबूज की मिठास खत्म कर दी। खासकर यमुना तटों के किनारे पैदा होने वाली तरबूज और खरबूजों की फसल पर विपरीत असर दिख रहा है, जिसका किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर अनियमित मौसम का असर कहीं न कहीं मानसून पर भी पड़ सकता है, जिस पर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है।
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प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी मात्रा में किया जाता है उत्पादन
खरबूज हो या तरबूज, ककड़ी हो या फिर खीरा ये सभी गर्मी की प्रमुख फसलों में शामिल हैं। हरियाणा के यमुना से सटे इलाकों, जिनमें करनाल, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत आदि कई जिले शामिल हैं, जहां बड़ी मात्रा में खरबूज और तरबूज का उत्पादन होता है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में 115 हजार हेक्टेयर में करीब 3205 हजार मीट्रिक टन खरबूज का उत्पादन हुआ, जबकि इस वर्ष 69 हजार हेक्टेयर में करीब 1340 हजार मीट्रिक टन खरबूज का उत्पादन हुआ है।
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ठंडे फलों की मांग बढ़ाती है झुलसाने वाली गर्मी
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.अनुज कुमार ने बताया कि मई और जून की गर्मियों का नाम सुनते ही लोगों का पसीना आना शुरू हो जाता है। क्योंकि मई माह में गर्म लू के थपेड़े व्यक्ति को बेहाल करते हैं तो सूर्य की तपिश झुलसाने लगती है। भले ही भीषण गर्मी और लू इंसानों और पशु पक्षियों को परेशान करती हो लेकिन इन दिनों बढ़ने वाली प्यास गर्मियों के फलों, खासकर खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा आदि की मिठास और मांग कई गुना बढ़ा देती है।
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मई-जून की गर्मी मौसमी फलों आदि के लिए बेहद आवश्यक
अनियमित मौसम चक्र का असर पर्यावरण पर होता ही है। मई-जून की गर्मी मौसमी फलों आदि के लिए बेहद आवश्यक होती है। क्योंकि जितनी अधिक गर्मी होगी, खरबूज, तरबूज में उतनी ही मिठास आएगी। वहीं यदि मई महीने में बारिश, ओलावृष्टि आदि होती है तो ऐसी फसलों के फूल झड़ जाते हैं। फल चोटिल होकर खराब होने लगते हैं। मई में इस बार गर्मी ने अपना प्रभाव नहीं दिखाया, यही कारण है कि इस बार खरबूज और तरबूज से उसका मीठा स्वाद छिन गया है। किसानों को इससे भारी नुकसान हो रहा है।
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खरबूज, तरबूज के अच्छे स्वाद के लिए तापमान के 40 से ऊपर रहना आवश्यक
संस्थान से जुड़े कई किसानों ने ये बात बताई है कि अनियमित मौसम से उनके खरबूज, तरबूज की मिठास कम होने के साथ-साथ मांग भी पिछले सालों की अपेक्षा काफी है। गर्मी न पड़ने से मौसमी फलों, सब्जियों के स्वाद या गुणवत्ता में कमी आना स्वाभाविक है। बीमारियां व कीटाणु भी पनपते हैं। खरबूज, तरबूज के अच्छे स्वाद के लिए तापमान के 40 से ऊपर रहना आवश्यक है। जब मौसम ठंडा रहता है तो पानी की अधिकता वाले फलों की मांग भी घटती ही है। इस अनियमित मौसम का असर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व एनसीआर सहित समूचे उत्तर भारत में देखा जा रहा है। -डॉ. अनुज कुमार, प्रधान वैज्ञानिक भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल।