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नेशनल में चलेगा मजदूर के बेटे का मुक्का
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50: लक्ष्य बॉक्सिंग खिलाड़ी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। चिड़ाव गांव के मजदूर का बेटा राष्ट्रीय स्तर पर मुक्केबाजी में दम दिखाएगा। अंबाला में अगस्त महीने में आयोजित हुई केंद्रीय विद्यालय स्तर की प्रतियोगिता के अंडर-14 आयु वर्ग में लक्ष्य ने स्वर्ण पदक जीता है। अब वह 17 से 23 अक्टूबर के बीच चेन्नई में होने वाली नेशनल केंद्रीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा। दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाने वाले के बेटे की इस कामयाबी पर पूरे गांव और परिवार में खुशी का माहौल हैं। लक्ष्य ने मोहम्मद अली को आदर्श मानकर अपने चाचा से बॉक्ंिसग के गुर सीखे।
बॉक्सिंग खिलाड़ी लक्ष्य ने बताया कि जब वह छोटा था तो दिल्ली स्टेट लेवल पर रजत पदक जीत चुके अपने चाचा जय पंचाल को देख बॉक्सिंग में जाने का मन बनाया और अभ्यास शुरू कर दिया। समय बीतने के साथ महान मुक्केबाज मोहम्मद अली के बारे में पढ़ा और जाना कि वह किस तरह एक ही मुक्के में अपने प्रतिद्वंद्वी को चित कर देते थे। बस फिर ठान ली कि अपने खेल का स्तर उनकी तरह ही करना है।
लक्ष्य ने बताया कि उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजारा करते हैं। कभी-कभी उनके काम में वह हाथ बंटा देता है। पिता को मेहनत करते देख मन करता है कि एक न एक दिन कुछ ऐसा करना है कि दुनिया उसके पिता को मेरे नाम से जानें। हालांकि जब कभी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ता है तो बुरा जरूर लगता है।
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करनाल। चिड़ाव गांव के मजदूर का बेटा राष्ट्रीय स्तर पर मुक्केबाजी में दम दिखाएगा। अंबाला में अगस्त महीने में आयोजित हुई केंद्रीय विद्यालय स्तर की प्रतियोगिता के अंडर-14 आयु वर्ग में लक्ष्य ने स्वर्ण पदक जीता है। अब वह 17 से 23 अक्टूबर के बीच चेन्नई में होने वाली नेशनल केंद्रीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा। दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाने वाले के बेटे की इस कामयाबी पर पूरे गांव और परिवार में खुशी का माहौल हैं। लक्ष्य ने मोहम्मद अली को आदर्श मानकर अपने चाचा से बॉक्ंिसग के गुर सीखे।
बॉक्सिंग खिलाड़ी लक्ष्य ने बताया कि जब वह छोटा था तो दिल्ली स्टेट लेवल पर रजत पदक जीत चुके अपने चाचा जय पंचाल को देख बॉक्सिंग में जाने का मन बनाया और अभ्यास शुरू कर दिया। समय बीतने के साथ महान मुक्केबाज मोहम्मद अली के बारे में पढ़ा और जाना कि वह किस तरह एक ही मुक्के में अपने प्रतिद्वंद्वी को चित कर देते थे। बस फिर ठान ली कि अपने खेल का स्तर उनकी तरह ही करना है।
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लक्ष्य ने बताया कि उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजारा करते हैं। कभी-कभी उनके काम में वह हाथ बंटा देता है। पिता को मेहनत करते देख मन करता है कि एक न एक दिन कुछ ऐसा करना है कि दुनिया उसके पिता को मेरे नाम से जानें। हालांकि जब कभी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ता है तो बुरा जरूर लगता है।
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