फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Women unaware of POSH Act, ICC not formed in offices

Karnal News: पाॅश अधिनियम से महिलाएं अनजान, कार्यालयों में नहीं बनी आईसीसी

Tue, 07 Apr 2026 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Tue, 07 Apr 2026 01:44 AM IST
विज्ञापन
Women unaware of POSH Act, ICC not formed in offices
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पाॅश अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत समिति आईसीसी और स्थानीय समिति एलसी गठन के निर्देश दिए गए थे। दावा कमेटी के एक साल पूरे होने का है लेकिन हकीकत जुदा है। कामकाजी महिलाओं को इनके बारे में जानकारी कम ही है। एलसी कमेटी के बारे में तो महिलाओं ने पूरी तरह से अनभिज्ञता जताई। कार्यालयों में आईसीसी कमेटी का गठन किए जाने से भी अधिकांश ने इंकार किया।
जिला महिला संरक्षण अधिकारी सविता राणा ने बताया कि दो स्तर पर कमेटी गठित की गई हैं। कार्यालयों को पत्र लिख कर कमेटी बनाने के लिए निर्देश दे दिए गए थे। आईसीसी कमेटी होना जरूरी है। अगर किसी कार्यालय में आईसीसी कमेटी नहीं बनाई गई है तो अवश्य इसकी जांच करवाई जाएगी। कमेटी बनाने के लिए निर्देश भी दिए जाएंगे। इस बारे में जागरूकता के लिए अभियान भी चलाएंगे।
विज्ञापन

स्थानीय समिति में करें शिकायत
महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी राजबाला मोर, महिला संरक्षण अधिकारी सविता राणा, अधिवक्ता रमन मल्होत्रा, अधिवक्ता बलराज सांगवान, उप जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ. सपना जैन और महिला एवं बाल कल्याण के लिए समाजसेवी डाॅ. सुजाता एलसी कमेटी के सदस्य हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग या महिला थाने महिला संरक्षण कार्यालय में जाकर एलसी में महिलाएं शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




यह है प्रक्रियामहिला संरक्षण अधिकारी ने बताया कि अगर किसी महिला के साथ कार्यस्थल पर किसी भी तरह का उत्पीड़न होता है तो वह सबसे पहले आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) में अपनी शिकायत दें। आईसीसी में सुनवाई नहीं होती है तो वह बाह्य शिकायत समिति पर शिकायत कर सकती हैं। महिला संरक्षण अधिकारी ने बताया कि 10 से कम कर्मचारियों वाले या जहां उत्पीड़न नियोक्ता की ओर से किया गया हो, वहां शिकायत जिला अधिकारी के पास स्थानीय समिति (एलसी) में की जा सकती है।
-
पाॅश अधिनियम
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पाॅश) कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह 9 दिसंबर, 2013 से प्रभावी हुआ। यह 10 या अधिक कर्मचारियों वाले हर संगठन के लिए ''''आंतरिक शिकायत समिति'''' (आईसीसी) बनाना और सुरक्षित माहौल देना अनिवार्य करता है। यह अधिनियम सरकारी, निजी, संगठित और असंगठित क्षेत्रों में सभी महिलाओं (नियमित, अस्थायी, संविदात्मक, इंटर्न) पर लागू होता है।यदि नियोक्ता आईसीसी का गठन नहीं करता है, तो 50,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, और बार-बार उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है।
शिकायत प्रक्रिया : घटना के 3 महीने के भीतर लिखित शिकायत करें। समिति जांच पूरी करने के लिए 90 दिन का समय लेती है। रिपोर्ट जमा होने के बाद, नियोक्ता को 60 दिनों के भीतर कार्रवाई करनी होगी। यह कानून विशाखा बनाम राजस्थान राज्य मामले (1997) के सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर आधारित है।

शिकायत कमेटी की जानकारी नहीं
निजी कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर नेहा ने बताया कि उन्हें एलसीसी कमेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं हैं, पाॅश अधिनियम के बारे में तो स्वयं ही जानकारी ली थी लेकिन अगर कभी भविष्य में इमरजेंसी हो तो यह नहीं पता कि शिकायत कैसे दर्ज करवा सकते हैं।
-
कोई आंतरिक कमेटी गठित नहीं
कंप्यूटर ऑपरेटर मीनू ने बताया कि उनके कार्यालय में ऐसी कोई कमेटी गठित नहीं की गई है। यदि यह अधिनियम है तो निजी कंपनियों में भी इन कमेटी को जरूर होना चाहिए। आंतरिक व बाहरी कमेटी के बारे में जगह-जगह जाकर महिलाओं व युवतियों को जागरूक किया जाना चाहिए।
-
कमेटियों के बारे में करें जागरूक
सेल एग्जीक्यूटिव निशू ने बताया कि उन्हें एलसीसी कमेटी के बारे में कभी नहीं पता चला। इस कमेटी में कितने सदस्य हैं या फिर कमेटी पर शिकायत किस तरह से कर सकते हैं और संपर्क कैसे कर सकते हैं इनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में कार्यस्थलों पर जागरूक किया जाना चाहिए।

-
नहीं दिया जाता कोई प्रशिक्षण
इंजीनियरिंग की इंटर्नशिप कर रही स्वाती ने बताया कि युवतियों व महिलाओं को पाॅश अधिनियम की जानकारी ही नहीं है। कई बार अपने आसपास महिलाओं को असहज होते देखा है। वह किसी से अपनी बात साझा नहीं कर पातीं। कंपनी में ऐसी कोई कमेटी नहीं बनाई गई है ना ही प्रशिक्षण दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed