जस हत्याकांड: कौन है मासूम का हत्यारा, पुलिस ने किया जल्द खुलासे का दावा
घटना के बाद एफएसएल की टीम ने मौका मुआयना किया। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है।उधर जिला बार संघ के वकीलों ने एकत्रित होकर हत्यारोपी सामने आने के बाद उसकी पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया।
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हरियाणा के करनाल जिले के गांव कमालपुर रोड़ान में पांच वर्षीय मासूम की हत्या का खुलासा गुरुवार को भी नहीं हो सका है। मामले में महिला सहित चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इससे पहले मृतक के परिजनों ने परिवार के ही सदस्यों पर हत्या का संदेह जताया था। दूसरी ओर मासूम ही हत्या से गांव में माहौल गमगीन है। बड़ी संख्या में लोग मासूम जस के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे और ढांढस बंधाया।
घटनाक्रम के अनुसार मंगलवार को पांच वर्षीय मासूम जस संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। पुलिस ने उसी रात गांव में गहन सर्च अभियान चलाया। इस दौरान ग्रामीणों ने भी पुलिस का सहयोग किया। जब घर-घर तलाशी ली जा रही थी तो बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एक पशुबाड़े की छत पर जस का शव मिला।
चिकित्सक बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया गया तो गले पर निशान मिले थे। पुलिस ने विसरा जांच के लिए एफएसएल मधुबन लैब भेज दिया है। आशंका जताई जा रही है कि बच्चे की निर्मम हत्या की गई है।
हत्यारोपियों ने पकडे़े जाने के डर से शव को पड़ोसियों के पशुबाड़े की छत पर फेंक दिया। दूसरी ओर घटना के बाद एफएसएल की टीम ने मौका मुआयना किया। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है। उन्होंने जल्द ही खुलासे का दावा किया है।
मासूम की हत्या के मामले में न सिर्फ परिजनों और ग्रामीणों में बल्कि अधिवक्ता समाज में भी गहरा रोष है। यही कारण है कि गुरुवार को जिला बार संघ के वकीलों ने एकत्रित होकर न सिर्फ इस वारदात की निंदा की, बल्कि हत्यारोपी सामने आने के बाद उसकी पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया।
सेक्टर-12 लॉयर चेंबर कांप्लेक्स में एकत्रित हुए वकीलों ने कहा कि घटना की जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने पुलिस से जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दिलाने की वकालत की।
जिला बार संघ के पूर्व प्रधान चांदबीर मंढाण ने कहा कि मामले में कोई भी वकील हत्यारोपी की पैरवी नहीं करेगा। इस मौके पर अधिवक्ता वीरेंद्र पहल, जेपी शेखपुरा, निर्मलजीत सिंह विर्क, कंवरप्रीत सिंह भाटिया, कविता दत्त आदि अधिवक्ता मौजूद थे।