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वीआईपी को छोड़ आम आदमी को थमा दिया चालान
Updated Sun, 26 Jul 2015 12:46 AM IST
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यातायात नियमों को ताक पर रखकर चलने वालों के लिए शनिवार दिन कड़ा रहा।
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जिला पुलिस ने शहर के विभिन्न 30 स्थानों पर नाके लगाकर दिनभर धड़ाधड़
चालान काटे। दोपहर तक पुलिस करीब 450 वाहन चालकों के चालान काट चुकी थी।
सुबह 8 बजे से लेकर 12 बजे तक और दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक दो चरणों में
पुलिस ने चालान काटे।
इस दौरान आम आदमी में पुलिस के सामने एक न चली, लेकिन वीआईपी और विधायक, महिलाओं व पुलिसकर्मियों के चालान काटने से पुलिस कर्मियों ने कन्नी काट ली। अलबत्ता आम आदमी और पुलिस के बीच इस पूरे भेदभाव को लेकर तू तड़ाक भी हुई।
शनिवार को लगाए गए इन नाकों से नीलोखड़ी के विधायक भगवानदास कबीर पंथी और उनका ड्राइवर भी गुजरा। न विधायक ने सीट बेल्ट लगाई थी न ही उनके ड्राइवर ने। मुख्यमंत्री के ओएसडी के आवास के नजदीक लगाए गए नाके से सुबह करीब 10 बजकर 50 मिनट भगवानदास निकले, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी की हिम्मत गाड़ी रुकवाने की नहीं हुई। इससे पहले इसी नाके पर पुलिस सुबह साढ़े 10:50 तक 27 वाहन चालकों के चालान काट चुकी थी। मीराघाटी चौक पर पुलिस ने एक महिला की गाड़ी का इंपाउंड भी किया।
इंस्पेक्टर बोला सीएम विंडो पर दो शिकायत
अंबेडकर चौक पर लगाए गए नाके के दौरान सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर वाहन चालक तरुण को इंस्पेक्टर तेजपाल ने रोका। उनके पास हेलमेट नहीं था। पुलिसकर्मी ने कहा कि वह कागजात दिखाओ, चालान नहीं काटेंगे। तरुण ने कागजात दिखा दिए। पुलिस चालान काटने लगी। इस पर तरुण भड़क उठे और बोले कि अपनी बात पर क्यों नहीं टिकते? पहले क्यों कहा था कि कागज दिखाने को। तरुण का गुस्सा शांत नहीं हुआ और बोला कि मुझे नहीं लगता शहर में हेलमेट की कोई जरूरत है। इस पर पुलिसकर्मी तेजपाल ने कहा कि सीएम विंडो पर अपनी शिकायत दो। इंस्पेक्टर ने यहां तक कह दिया कि आप ज्यादा पढ़े लिखे हो ज्यादा कायदे कानून जानते हो, इसलिए सीएम विंडो पर अपनी शिकायत भेजो, फिर देखेंगे।
चालान तो कटेगा, इसके पैसे मैं दे दूंगा
निर्मल कुटिया के सामने लगाए गए दो नाकों पर दो केस ऐसे भी आए जब दोनों नाकों पर बैठे पुलिस अधिकारियों की वाहन चालकों ने किसी बड़े अधिकारी या पुलिसकर्मी से बात करा दी। सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर सेक्टर 13 चौकी के साथ लगाए गए नाके पर पुलिसकर्मी सत्यवान ड्यूटी दे रहे थे। इस दौरान एक्टिवा चालक मुनीष के कागज पूरे नहीं थे। इस पर मुनीष ने बहुत प्रयास किए, लेकिन सत्यवान पर कोई असर नहीं पड़ा। हारकर मुनीष ने कहा कि वह सदर थाने के एसएचओ का रिश्तेदार है। फोन मिलाया और सत्यवान से बात कर दी। सत्यवान ने मजबूरी गिनाते हुए कहा कि साहब चालान तो काटना मजबूरी है, बेशक इसके पैसे मैं दे दूंगा।
एडीजीपी का दिया परिचय
इससे पहले निर्मल कुटिया चौक पर जीटी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर लगाए गए नाके पर बैठे पुलिसकर्मी श्रीओम ने 10:50 मिनट पर एक गाड़ी को रोका। चालक के पास न तो आरसी थी और आगे की नंबर प्लेट, पॉल्यूशन की रसीद मांगी तो वह भी नहीं थी। चालक व एक अन्य युवक ने बताया कि इस गाड़ी को 5 साल तक पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। इस पर पुलिसकर्मी ने कहा कि यह कौन सा रूल है दिखाओ कहां लिखा है। दोनों युवक नहीं दिखा पाए। इस पर युवक ने अपनी पहचान दिखाते हुए एडीजीपी लायक राम डबास का परिचय दिया। उनके बेटे से बात भी करा दी। पुलिस कर्मी ने फोन सुना और कहा कि चालान तो कटेगा बेशक छोटा कटे। इसके बाद युवकों ने वाट्सऐप पर रसीद मंगाई और पुलिसकर्मी को दिखा दी। इस पर उसने दोनों को बिना चालान काटे छोड़ दिया।
एसएचओ से बात करा दूं.. मेरी मजबूरी है मैं चालान नहीं कटवाऊंगा
निर्मल कुटिया के पास ही एक ऐसा व्यक्ति भी आया जिसने पूरे पुलिस महकमे में अपनी पहचान गिना दी। साथ ही पुलिसकर्मी को कहा कि बेशक उसका सारा सामान रख लो वह चालान नहीं कटवाएगा। इस पर उसने पुलिस कर्मी को यह भी कह दिया कि वह तो उनके बच्चे जैसा है। पुलिसकर्मी ने एक नहीं सुनी। मोटरसाइकिल के इस चालक की जब एक न चली तो उसने कहा कि उसकी मजबूरी है चालान नहीं कटाएगा। इस पर पुलिसकर्मी ने अपनी मजबूरी बताते हुए चालान काट दिया।
इस दौरान आम आदमी में पुलिस के सामने एक न चली, लेकिन वीआईपी और विधायक, महिलाओं व पुलिसकर्मियों के चालान काटने से पुलिस कर्मियों ने कन्नी काट ली। अलबत्ता आम आदमी और पुलिस के बीच इस पूरे भेदभाव को लेकर तू तड़ाक भी हुई।
शनिवार को लगाए गए इन नाकों से नीलोखड़ी के विधायक भगवानदास कबीर पंथी और उनका ड्राइवर भी गुजरा। न विधायक ने सीट बेल्ट लगाई थी न ही उनके ड्राइवर ने। मुख्यमंत्री के ओएसडी के आवास के नजदीक लगाए गए नाके से सुबह करीब 10 बजकर 50 मिनट भगवानदास निकले, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी की हिम्मत गाड़ी रुकवाने की नहीं हुई। इससे पहले इसी नाके पर पुलिस सुबह साढ़े 10:50 तक 27 वाहन चालकों के चालान काट चुकी थी। मीराघाटी चौक पर पुलिस ने एक महिला की गाड़ी का इंपाउंड भी किया।
इंस्पेक्टर बोला सीएम विंडो पर दो शिकायत
अंबेडकर चौक पर लगाए गए नाके के दौरान सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर वाहन चालक तरुण को इंस्पेक्टर तेजपाल ने रोका। उनके पास हेलमेट नहीं था। पुलिसकर्मी ने कहा कि वह कागजात दिखाओ, चालान नहीं काटेंगे। तरुण ने कागजात दिखा दिए। पुलिस चालान काटने लगी। इस पर तरुण भड़क उठे और बोले कि अपनी बात पर क्यों नहीं टिकते? पहले क्यों कहा था कि कागज दिखाने को। तरुण का गुस्सा शांत नहीं हुआ और बोला कि मुझे नहीं लगता शहर में हेलमेट की कोई जरूरत है। इस पर पुलिसकर्मी तेजपाल ने कहा कि सीएम विंडो पर अपनी शिकायत दो। इंस्पेक्टर ने यहां तक कह दिया कि आप ज्यादा पढ़े लिखे हो ज्यादा कायदे कानून जानते हो, इसलिए सीएम विंडो पर अपनी शिकायत भेजो, फिर देखेंगे।
चालान तो कटेगा, इसके पैसे मैं दे दूंगा
निर्मल कुटिया के सामने लगाए गए दो नाकों पर दो केस ऐसे भी आए जब दोनों नाकों पर बैठे पुलिस अधिकारियों की वाहन चालकों ने किसी बड़े अधिकारी या पुलिसकर्मी से बात करा दी। सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर सेक्टर 13 चौकी के साथ लगाए गए नाके पर पुलिसकर्मी सत्यवान ड्यूटी दे रहे थे। इस दौरान एक्टिवा चालक मुनीष के कागज पूरे नहीं थे। इस पर मुनीष ने बहुत प्रयास किए, लेकिन सत्यवान पर कोई असर नहीं पड़ा। हारकर मुनीष ने कहा कि वह सदर थाने के एसएचओ का रिश्तेदार है। फोन मिलाया और सत्यवान से बात कर दी। सत्यवान ने मजबूरी गिनाते हुए कहा कि साहब चालान तो काटना मजबूरी है, बेशक इसके पैसे मैं दे दूंगा।
एडीजीपी का दिया परिचय
इससे पहले निर्मल कुटिया चौक पर जीटी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर लगाए गए नाके पर बैठे पुलिसकर्मी श्रीओम ने 10:50 मिनट पर एक गाड़ी को रोका। चालक के पास न तो आरसी थी और आगे की नंबर प्लेट, पॉल्यूशन की रसीद मांगी तो वह भी नहीं थी। चालक व एक अन्य युवक ने बताया कि इस गाड़ी को 5 साल तक पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। इस पर पुलिसकर्मी ने कहा कि यह कौन सा रूल है दिखाओ कहां लिखा है। दोनों युवक नहीं दिखा पाए। इस पर युवक ने अपनी पहचान दिखाते हुए एडीजीपी लायक राम डबास का परिचय दिया। उनके बेटे से बात भी करा दी। पुलिस कर्मी ने फोन सुना और कहा कि चालान तो कटेगा बेशक छोटा कटे। इसके बाद युवकों ने वाट्सऐप पर रसीद मंगाई और पुलिसकर्मी को दिखा दी। इस पर उसने दोनों को बिना चालान काटे छोड़ दिया।
एसएचओ से बात करा दूं.. मेरी मजबूरी है मैं चालान नहीं कटवाऊंगा
निर्मल कुटिया के पास ही एक ऐसा व्यक्ति भी आया जिसने पूरे पुलिस महकमे में अपनी पहचान गिना दी। साथ ही पुलिसकर्मी को कहा कि बेशक उसका सारा सामान रख लो वह चालान नहीं कटवाएगा। इस पर उसने पुलिस कर्मी को यह भी कह दिया कि वह तो उनके बच्चे जैसा है। पुलिसकर्मी ने एक नहीं सुनी। मोटरसाइकिल के इस चालक की जब एक न चली तो उसने कहा कि उसकी मजबूरी है चालान नहीं कटाएगा। इस पर पुलिसकर्मी ने अपनी मजबूरी बताते हुए चालान काट दिया।