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विक्रांत ने न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी में किया टॉप

Sat, 19 Dec 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल Updated Sat, 19 Dec 2015 12:33 AM IST
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Vikrant at the University of New Zealand Top

अगर मन में कुछ करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी आड़े नहीं आ सकता। करनाल के गांव कतलाहेड़ी निवासी विक्रांत सिंह चौहान ने न केवल न्यूजीलैंड में बिजनेस की पढ़ाई शुरू की बल्कि पहले ही वर्ष में टॉप स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा को लोहा मनवा दिया।

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छात्र की उपलब्धि पर उसे यूनिवर्सिटी की ओर से अवार्ड आफ एक्सीलेंस से नवाजा गया है। उधर विक्रांत की उपलब्धि पर न केवल उसके परिजन खुश हैं, बल्कि न्यूजीलैंड में पढ़ रहे छात्रों में भी खुशी की लहर है। विक्रांत सिंह न्यूजीलैंड के आकलैंड स्थित तसमन इंटरनेशनल एकेडमिज में नेशनल डिप्लोमा इन बिजनेस की पढ़ाई कर रहा है। प्रथम वर्ष के परिणाम में विक्रांत यूनिवर्सिटी में हजारों बच्चों को पछाड़ते हुए टॉप किया है।
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पिता सेना में कर रहा देश सेवा
विक्रांत के पिता मैनपाल सिंह चौहान बतौर सूबेदार देश की सेना में सेवा कर रहे हैं। मैनपाल ने बताया कि 12वीं के बाद विक्रांत ने बिजनेस की पढ़ाई के लिए विदेश जाने की इच्छा रखी थी, परिवार वालों ने शुरू में इसका विरोध भी किया, लेकिन विक्रांत की दृढ़ इच्छा के कारण परिवार मान गया। वर्ष 2014 में वह विदेश गया है।
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पढ़ाई विदेश में और सेवा देश में
बातचीत के दौरान विक्रांत ने बताया कि उसका लक्ष्य है कि वह विदेश से बिजनेस की पढ़ाई करके अपने देश में सेवा करे। बिजनेस प्रबंधन में बहुत स्कोप है, इसलिए उसका लक्ष्य है कि देश में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रयोग करते हुए देश में ही बिजनेस किया जाए, ताकि मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल सके।


गांव में जश्न का माहौल
बेटे के टॉप करने की खबर जैसे ही गांव पहुंची तो परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। विक्रांत के दादा लाल सिंह राणा, खेम सिंह फौजी, माता सुशीला देवी, चाचा श्रीपाल राणा, ऋषिपाल राणा और शीशपाल राणा ने गांव में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। दादा लाल सिंह राणा और दादी केला देवी ने कहा कि शुरू में विदेश भेजने से पहले जरूर मुझे लग रहा था कि गांव का बेटा कैसे विदेशों से आगे निकल सकता है, लेकिन विक्रांत ने साबित कर दिया है कि मेहनत और लगन के साथ सब कुछ किया जा सकता है।

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