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Karnal News: किताब की जिल्द का मुकुट, टहनियों का धनुष बना करते थे रामलीला मंचन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Oct 2023 02:41 AM IST
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Used to make crown from book cover and bow from twigs to stage Ramlila.
किताब की जिल्द का मुकुट, टहनियों का धनुष बना करते थे रामलीला मंचन
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- पोल्ट्री एरिया का श्री रामलीला क्लब 32 वर्षों से कर रहा मंचन, सभी धर्मों के कलाकार भाईचारे का दे रहे संदेश

गौतम जोशी

नीलोखेड़ी। पोल्ट्री एरिया का श्री राम लीला क्लब पिछले 32 वर्षों से रामलीला मंचन कर रहा है। यह क्लब भी समय के साथ बदले हालात में एक अनूठा इतिहास समेटे हुए है। विशेषकर रामलीला के मंचन में सभी धर्मों के कलाकारों ने विभिन्न भूमिकाओं में किरदार निभाकर समाज में भाईचारा और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। 1991 में पहली बार जब मंचन किया था तो उस समय के किस्से आज भी क्लब के सदस्यों को याद हैं।

सदस्यों ने बताया कि उस समय पुरानी किताबों के जिल्द उतारकर मुकुट और गुलबाशा पौधे की टहनियों से धनुष बनाकर मंचन करते थे। इसके अलावा कलाकार मंच पर पेंट-कमीज पहनकर ही आते थे। उस समय कलाकारों के पास वर्दी नहीं थी। अब समय के साथ बदलाव आया तो नई पोषाक में कलाकार मंच पर नजर आते हैं। इस बार 14 अक्तूबर तक मंचन किया जाएगा।
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कई वर्षों तक राजा दशरथ का किरदार निभाने के बाद वर्तमान में निदेशक का दायित्व निभा रहे चंद्र शर्मा बताते हैं कि मात्र 70 गज के एक प्लाॅट में शुरू हुई रामलीला का आज दशहरा मैदान तक पहुंचना लंबे संघर्ष का नतीजा है। क्लब की प्राथमिकता रहती है कि 5-6 वर्ष की आयु के बालकों को रामलीला से जोड़कर उन्हें मंच पर लाया जाए, ताकि 12वीं कक्षा तक पढ़ते-पढ़ते रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।
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उर्दू की जगह हिंदी शब्दों में संवाद बढ़ा



निदेशक चंद्र शर्मा बताते हैं कि 5जी के दौर में श्री रामलीला की पवित्रता और लोगों में आकर्षण बनाए रखना चुनौती है। रामलीला के दौरान हनुमान और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले कलाकार ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए रामलीला के 10 दिन जमीन पर सोते हैं। आजकल हारमोनियम की जगह केसियो ने ले ली है। रामलीला मंचन के दौरान उर्दू के शब्दों की जगह सरल हिंदी के शब्दों का प्रयोग होने लगा है। पात्रों द्वारा गाए जाने वाले गीत आज भी फिल्मी तर्ज पर बनाए जा रहे हैं, क्योंकि फिल्मी तर्ज पर गाने बनाना आसान है।



दो भाइयों की मौत के बाद भी निभा रहे राम का किरदार



श्रीराम का किरदार निभा रहे राकेश शर्मा दीमक का ट्रीटमेंट करते हैं, वह बताते हैं कि उनके पिता जगमोहन शर्मा चार दशक पूर्व शहर की मुख्य रामलीला में कई किरदार निभाते थे। उन्हीं की प्रेरणा से मैंने रामलीला में कार्य करना शुरू किया। शुरुआती दौर में नौ वर्ष तक सीता का किरदार निभाया। एक दशक से भी ज्यादा समय से श्रीराम का किरदार निभाने की कोशिश कर रहा हूं, क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जैसा कोई हो नहीं सकता है। पिछले दिनों अपने दो भाईयों की मौत के बाद भी इस वर्ष रोल निभाना श्रीराम कृपा का ही उदाहरण है।



फोटो--



दर्शकों की वाहवाही बढ़ाती है हौसला



रावण की भूमिका निभा रहे प्रॉपर्टी डीलर पवन कपूर बताते हैं कि पिछले 25 वर्षों से वह चुनौतीपूर्ण भूमिका निभा रहा हूं। पहले यह रोल अदा करने में कठिन डायलॉग और चेहरे के हावभाव बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब रोल और डायलॉग याद हो गए हैं। जिसके चलते रावण का रोल निभाने में संतुष्टि मिलती है। उन्होंने कहा कि मोबाइल की काल्पनिक दुनिया में आजकल मनोरंजन के साथ-साथ धार्मिक भाव से भूमिका निभाना चुनौती है। लेकिन दर्शकों से मिलने वाली वाहवाही हौसला बढ़ाती है।




दोनों भाई निभा रहे बाली-सुग्रीव का किरदार



क्लब के कोषाध्यक्ष एवं रामलीला में सुग्रीव की भूमिका निभा रहे व्यापारी दमनदीप सिंह मरवाह बताते हैं कि वह औैर बाली के रूप में उनके चचेरे भाई गगनदीप मरवाह छह वर्ष से यह किरदार निभा रहे हैं। 30 वर्षों से क्लब से जुड़े होने के कारण इससे पूर्व दमनदीप राजा जनक का किरदार भी निभा चुके हैं। सुग्रीव का किरदार निभाते हुए मर्यादा का पालन किया जाता है। जिससे आत्मिक संतुष्टि मिलती है। उन्होंने बताया कि मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा स्थापित आदर्शों पर चलकर ही समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द बनाया जा सकता है।
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