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Karnal News: स्कूलों में अब डिजिटल बोर्ड का प्रयोग अनिवार्य
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। प्रदेश के राजकीय सीनियर सेकेंडरी व मिडिल स्कूलों में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी स्कूल मुखियाओं को आदेश जारी किए हैं। अगर किसी स्कूल में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग नहीं किया जा रहा होगा, तो स्कूल मुखिया व कक्षा प्रभारी इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके लिए उनसे जवाबतलबी होगी।
इसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से पढ़ाई को रोचक व आसान बनाना है। विभाग का मानना है कि वीडियो, चित्र और ऑडियो के माध्यम से छात्र जटिल विषयों को जल्दी
समझ सकते हैं। इसी उद्देश्य से स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगवाए गए थे। इसके अलावा प्रदेश के स्कूलों में अन्य कई तरह की डिजिटल सुविधाएं भी दी जा रही हैं। पढ़ाई को भी कोरोना के बाद से पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफार्म पर लाया गया है। इससे पढ़ने और पढ़ाने का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ दिनों से डिजिटल सुविधाओं की अधिकारियों ने समीक्षा की थी। समीक्षा में कई स्कूलों में डिजिटल बोर्ड या तो बंद पड़े मिले, या फिर बोर्ड का प्रयोग करने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। अब शिक्षा विभाग ने इसे सख्ती से लागू किया है।
ठीक करवाने होंगे स्कूलों के डिजिटल बोर्ड
कई स्कूलों में डिजिटल बोर्ड खराब पड़े हैं। उनकी मरम्मत स्कूल मुखियाओं को अपने स्तर पर करवानी होगी। अगर डिजिटल बोर्ड अभी भी गारंटी में हैं तो उनको कंपनी के माध्यम से ठीक करवाया जाएगा। अगर गांरटी में नहीं हैं तो उसे बाजार से ठीक करवाना होगा, ताकि बच्चों को डिजिटल सुविधाओं का लाभमिल सके।
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स्कूलों में डिजिटल बोर्ड का नियमित रूप से प्रयोग करने के लिए स्कूल मुखियाओं को आदेश दिए हैं। अगर किसी स्कूल में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग करते नहीं पाया गया तो स्कूल मुखिया व इंचार्ज की जवाबदेही तय की जाएगी। - सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी।
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करनाल। प्रदेश के राजकीय सीनियर सेकेंडरी व मिडिल स्कूलों में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी स्कूल मुखियाओं को आदेश जारी किए हैं। अगर किसी स्कूल में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग नहीं किया जा रहा होगा, तो स्कूल मुखिया व कक्षा प्रभारी इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके लिए उनसे जवाबतलबी होगी।
इसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से पढ़ाई को रोचक व आसान बनाना है। विभाग का मानना है कि वीडियो, चित्र और ऑडियो के माध्यम से छात्र जटिल विषयों को जल्दी
समझ सकते हैं। इसी उद्देश्य से स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगवाए गए थे। इसके अलावा प्रदेश के स्कूलों में अन्य कई तरह की डिजिटल सुविधाएं भी दी जा रही हैं। पढ़ाई को भी कोरोना के बाद से पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफार्म पर लाया गया है। इससे पढ़ने और पढ़ाने का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ दिनों से डिजिटल सुविधाओं की अधिकारियों ने समीक्षा की थी। समीक्षा में कई स्कूलों में डिजिटल बोर्ड या तो बंद पड़े मिले, या फिर बोर्ड का प्रयोग करने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। अब शिक्षा विभाग ने इसे सख्ती से लागू किया है।
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ठीक करवाने होंगे स्कूलों के डिजिटल बोर्ड
कई स्कूलों में डिजिटल बोर्ड खराब पड़े हैं। उनकी मरम्मत स्कूल मुखियाओं को अपने स्तर पर करवानी होगी। अगर डिजिटल बोर्ड अभी भी गारंटी में हैं तो उनको कंपनी के माध्यम से ठीक करवाया जाएगा। अगर गांरटी में नहीं हैं तो उसे बाजार से ठीक करवाना होगा, ताकि बच्चों को डिजिटल सुविधाओं का लाभमिल सके।
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स्कूलों में डिजिटल बोर्ड का नियमित रूप से प्रयोग करने के लिए स्कूल मुखियाओं को आदेश दिए हैं। अगर किसी स्कूल में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग करते नहीं पाया गया तो स्कूल मुखिया व इंचार्ज की जवाबदेही तय की जाएगी। - सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी।