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एक ही परिवार के दो सदस्यों की संदिग्ध डेंगू से मौत, दो अस्पताल पहुंचे
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Fri, 16 Oct 2015 12:50 AM IST
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घर में 10 दिन पहले तक सब कुछ सही चल रहा था। परिवार के मुखिया मूलचंद को हल्का सा बुखार आया था। इसके बाद बुखार ठीक नहीं होने पर प्राइवेट डाक्टर के पास इलाज के लिए पहुंचे तो डेंगू की पुष्टि हुई। सिविल अस्पताल गए, लेकिन डाक्टरों ने समय पर इलाज नहीं दिया। अभी आठ दिन पहले ही मूलचंद की मौत हो गई। मूलचंद की मौत के बाद उसका बेटा सलिंद्र (32) पूरी तरह से उबरा भी नहीं था कि उसे भी तीन-चार दिन से बुखार आ रहा था। मंगलवार रात सलिंद्र को तेज बुखार की शिकायत हुई।
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बुधवार को परिजन उसे लेकर करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने न भर्ती किया न ही कोई टेस्ट लिखे। गुरुवार सुबह आने की सलाह देकर उसे अस्पताल से वापस भेज दिया। लेकिन सलिंद्र अब कभी अस्पताल नहीं आ पाएगा। चूंकि बुधवार/गुरुवार देर रात उसका भी निधन हो गया। गांव कुटेल गामड़ी वासी पीड़ितों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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परिवार को चलाने वाले दोनों लोग घर को छोड़कर हमेशा के लिए चले गए हैं। सलिंद्र मरने से पहले अपने घर में अपनी 65 वर्षीय मां, अपने 14 वर्षीय बेटे सोनू, 12 वर्षीय बेटी शिवानी और 8 वर्षीय बेटी श्वेता को छोड़ गया है। इस तरह एक सप्ताह में घर से दूसरी अर्थी उठ गई। सलिंद्र की मौत से सारा गांव सदमे में है। गमगीन माहौल में सलिंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। ध्यान रहे कि बुधवार को पूर्व मंत्री मीना मंडल की भी गुड़गांव के मेदांता में संदिग्ध डेंगू से मौत हो गई थी। पिता को मुखांजलि देने के बाद सोनू व उसकी दादी कृष्णा को लेकर ग्रामीण मिलकर मधुबन के अर्पणा अस्पताल पहुंचे। यह भी बुखार से जूझ रहे हैं।
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सलिंद्र तो दुनिया से चला गया, लेकिन अब परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा? सलिंद्र की विधवा मां कृष्णा ने बताया कि उसे व उसकी पौती श्वेता, शिवानी व पौते सोनू को भी बुखार आ रहा था। कृष्णा ने बताया कि बच्चों की मां कई साल पहले ही दुनिया से चल बसी थी। तब से लेकर आज तक सलिंद्र ही उन्हें मां-बाप दोनों का प्यार दे रहा था।
विभाग को अभी भी सिर्फ ठंड का इंतजार
करनाल में डेंगू की स्थिति इस कदर इतनी भयावह हो चुकी है कि खुद स्वास्थ्य विभाग की जिला डेंगू अधिकारी को भी डेंगू ने अपना शिकार बना दिया। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सरोज करीब 20 दिनों से छुट्टी पर हैं चूंकि डेंगू से बचाव के बाद अभी भी उन्हें रेस्ट की जरूरत है।
खुद महकमे के अधिकारियों को डेंगू होने के बाद भी डेंगू को लेकर विभाग सजग नहीं है। शायद इसी कारण एक ही परिवार के दो सदस्य एक सप्ताह में दुनिया को अलविदा कर गए। करीब 15 दिनों पहले आई बरसात के बाद स्वास्थ्य विभाग को आस जगी थी कि ठंड होगी और डेंगू से निजात मिल जाएगी। इस समय भी स्थिति वही है, ठंड तो नहीं पड़ी, लेकिन डेंगू के मरीजों की तादाद में तब से आज तक करीब 40 नए मरीजों की वृद्धि हो गई। अभी भी स्वास्थ्य विभाग ठंड के इंतजार में है। इस समय जिले में 105 डेंगू पॉजिटिव मरीज स्वास्थ्य विभाग ने घोषित किए हैं। कुल 353 सेंपल लिए गए। इनमें से 21 पेंडिंग हैं।
समय से जाग जाते तो नहीं होते हाल-बेहाल
यदि समय से पहले स्वास्थ्य विभाग जाग जाता तो जिले में डेंगू का कहर नहीं होता। पहले स्वास्थ्य विभाग फोगिंग के दावे करता रहा, लेकिन जब हालात बेकाबू हो गए तो करीब 3 लाख रुपये की लागत की तो व्हीकल माउंटिड फोगिंग मशीन मंगाई गई। इस दौरान तक हाल बेकाबू को चुके थे। विभाग दावा करता रहा कि जागरूकता की कमी में डेंगू पनप रहा है। लेकिन डिप्टी सिविल सर्जन को भी डेंगू हो गया तो अब स्वास्थ्य विभाग जागरुकता का प्रश्र खड़ा नहीं कर सकता।
अस्पताल में बैड की संख्या पड़ी कम, मरीज फोल्डिंग लेकर पहुंचे
घरौंडा में डेंगू की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां स्थित अर्पणा अस्पताल में अधिक मरीज होने के कारण बैड की संख्या कम पड़ गई है और मरीज अपने घरों से फोल्डिंग लेकर भर्ती हो रहे हैं।
ऐसा नहीं हो सकता। इस तरह की हमारे पास कोई शिकायत नहीं पहुंची है। फिर भी यदि किसी डाक्टर ने मरीज के साथ ऐसा व्यवहार किया है और उसे इलाज मुहैया नहीं कराया गया तो, लिखित रूप से शिकायत मिलने पर निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. योगेश, पीएमओ, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज।