फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   treatment is not easy' waiting for a specialist two and half years

मेडिकल कालेज में डाक्टरों की कमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2020 02:18 AM IST
विज्ञापन
treatment is not easy' waiting for a specialist two and half years
करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज को चालू हुए ढाई साल बीत गए हैं, लेकिन आज भी यहां पर चेकअप कराना आसान नहीं है। इसके लिए मरीज और तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। पहले तो टोकन लेना पड़ता है, इसके बाद ओपीडी के लिए रजिस्ट्रेशन में लंबा इंतजार करना पड़ता है और फिर ओपीडी में चेकअप के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा, दवाइयों के लिए भी लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। बड़ी बात ये है कि आज तक कालेज सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टरों का इंतजार कर रहा है। पहले दावे बहुत हुए, लेकिन यहां पर न तो न्यूरो सर्जन है और न ही प्लास्टिक सर्जन। कार्डियक और गैस्ट्रोएंट्रोलाजी के विशेषज्ञों की भी यहां पर दरकार है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं रहने के कारण बीमारियों से संबंधित मरीजों को रेफर किया जाता है।
विज्ञापन

वर्ष-2017 में कालेज भवन का उद्घाटन किया गया था और विभागों को सिविल अस्पताल के भवन से कालेज में शिफ्ट किया गया था। उस समय सीएम मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने दावा किया था कि जल्द ही यहां पर सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर उपलब्ध होंगे, लेकिन अब ढाई साल का समय बीत चुका है। मेडिकल कालेज में अब ओपीडी करीब 2500 मरीजों की प्रतिदिन है, लेकिन यह ओपीडी लगभग उन्हीं विभागों की है, जो सिविल अस्पताल में है। ऐसे में सवाल ये है कि सिविल अस्पताल से अलग मेडिकल कालेज में क्या है? स्थिति यह है कि मेडिकल कालेज में सड़क हादसों या फिर झगड़ों में घायल हेड इंजरी के केसों को चंडीगढ़ और रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। अनुमान है कि सिविल अस्पताल में हर महीने 40 से 50 सड़क दुर्घटनाओं के गंभीर मरीज आते हैं। साथ ही मेडिकल कॉलेज में भी हर माह 50 से 60 केस इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से ज्यादातर केस हेड इंजरी के शामिल होते हैं। इमरजेंसी में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर न होने पर ज्यादातर केसों को पीजीआई रेफर करना पड़ता है। ऐसे में कालेज में विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मरीजों की जान जोखिम में रहती है।
विज्ञापन

रेडियोलाजिस्ट की है कमी
मेडिकल कालेज में फिलहाल सबसे ज्यादा कमी रेडियोलाजी विभाग में है। यहां पर विशेषज्ञ कम होने के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। टेस्ट को लेकर आने वाली परेशानियों को देखते हुए कई बार महिलाएं जाम तक लगा चुकी हैं। इसके अलावा, इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड भी नहीं होते हैं, ऐसे में मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। इसके अलावा, कार्डियक, न्यूरो सर्जन, प्लास्टिक सर्जन की भी सख्त जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीन दिन में मिलती है टेस्ट रिपोर्ट
चेकअप के बाद डाक्टर मरीज के ब्लड या अन्य टेस्ट लिखते हैं। यहां पर सैंपल देने के तीन दिन बाद मरीज की रिपोर्ट आती है। तब तक दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाती है। मरीज के पास इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं रहता, या फिर निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।
ये है स्टाफ की स्थिति
मेडिकल कालेज में करीब 150 डाक्टर हैं, लेकिन एमसीआई के नियमों के अनुसार, यहां पर करीब 100 और डाक्टरों की जरूरत है। इस समय कालेज में 108 डाक्टर रेगुलर हैं। इनमें फैकल्टी और रेजिडेंट्स शामिल हैं। वहीं, 11 सीनियर रेजीडेंट हैं और 27 जूनियर रेजिडेंट हैं। इसके अलावा, फार्मेसी और नर्सों की बात करें तो यहां पर भी नियमों के तहत और स्टाफ की जरूरत है।
दवा के लिए करना पड़ा है इंतजार
दवा लेने आई शहरवासी सिमरण ने बताया कि कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी सारी दवा नहीं मिलती। इसके अलावा, डॉक्टर भी अपने कमरे में नहीं मिलते। सबसे जरूरी है कि दवाइयां समय पर मिलें और सारी यहीं से मिलें। कई दवाइयां बाहर से लानी पड़ती हैं।

बाक्स
टोकन सिस्टम किया जाए बंद
रानी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग पर सरकार ने रुपये खर्च किए हैं, लेकिन इलाज कम मिलता है। सबसे बड़ी दुविधा तो टोकन सिस्टम है। ओपीडी की पर्ची बनने से पहले टोकन लेना पड़ता है। यहां पर टोकन जानकारों को पहले दिया जाता है। इसे बंद किया जाना चाहिए और सीधे ही पंजीकरण करना चाहिए। पहले टोकन, फिर पर्ची के लिए और फिर डाक्टर के लिए इंतजार करना पड़ता है।
कालेज के कार्यकारी निदेशक डा. जगदीश दुरेजा से सीधी बातचीत
-अभी तक कालेज में सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर क्यों नहीं हैं?
कुछ पदों के लिए साक्षात्कार हुए हैं, उम्मीद है कि जल्द ही यह कमी पूरी होगी।
-न्यूरो सर्जन नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर किया जाता है?
हमने प्राइवेट न्यूरो सर्जन के साथ अनुबंध कर रखा है, वे आन काल आते हैं। अब ऐसा नहीं होता।
कालेज में डाक्टरों की कमी कब पूरी होगी
-जेआर समेत अन्य के साक्षात्कार चल रहे हैं, जल्दी ही कमी पूरी होने की उम्मीद है।
-टोकन के लिए काफी देरी तक इंतजार करना पड़ता है?
टोकन सिस्टम को बंद किया जाएगा, ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि लोग घर से ही ओपीडी रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।
-दवाइयों के लिए काफी देर तक लाइनों में लगना पड़ता है?
इसे भी चेक कराया जाएगा और कोशिश की जाएगी कि और विंडो खोले जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed