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Karnal News: जख्म खाए, दर्द पाया, गम भुलाया न गया, तेरी महफिल में भी आके...
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से वसंत पंचमी के उपलक्ष्य में साझा विरासत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मां सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित की गई।
वहीं कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी। इस दौरान गजलकार हरबंस लाल पथिक ने, जख्म खाए दर्द पाया गम भुलाया न गया, तेरी महफिल में भी आके मुस्कुराया न गया...।
अश्वनी शर्मा ने कहा, मां सरस्वती की बदौलत ही प्राण चलते हैं। डॉ. कमर रईस ने दौलत की ताकत का एहसास कराया, जीती बाजी हार गए हम, जर में ताकत ऐसी थी...। कवि प्रेम पाल सागर ने, वासंती छटा बिखेरी, जड़वत सृष्टि में भरता जीवन का अलंकार है, ऋतुराज वसंत धरती को ब्रह्म का अलौकिक उपकार है...।
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कवि दलीप खरेरा ने अपनी तड़क का कुछ यूं इजहार किया, तड़प मेरी कुछ कम हो जाती, पलक तेरी गर नम हो जाती। कृष्ण कुमार निर्माण ने कहा, नाम लेके प्यार का भाई बैरी बणते देख लिए, साथ निर्माण की बात कर कै पीछा नै हटते देख लिए...। ममता प्रवीण ने, मां सरस्वती की सौगात है वसंत, नवजीवन की बरसात है वसंत। कवि अंग्रेज सिंह ने कहा, दुनिया दिन रात बम बनाने में लगी है, अपना नामोनिशां मिटाने में लगी है।
युवा शायर आशीष ताज ने, मेरे सामने बैठकर न जात पात कर, करनी है तो बस मुहब्बत की बात कर...। हास्य कवि दिलबाग ने गुदगुदाया, उनकी नजरों का जब-जब भी वार होगा। मनोज मधुरभाषी व युवा शायर गुलाब सिंह फक्कर, पूर्ण चंद शर्मा, प्रवीण सलारपुरिया, कुमारी शैलजा, मधु शर्मा, बलराज, महेंद्र कौशिक अशुंल राणा, सौरभ गुप्ता ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
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करनाल। विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से वसंत पंचमी के उपलक्ष्य में साझा विरासत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मां सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित की गई।
वहीं कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी। इस दौरान गजलकार हरबंस लाल पथिक ने, जख्म खाए दर्द पाया गम भुलाया न गया, तेरी महफिल में भी आके मुस्कुराया न गया...।
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अश्वनी शर्मा ने कहा, मां सरस्वती की बदौलत ही प्राण चलते हैं। डॉ. कमर रईस ने दौलत की ताकत का एहसास कराया, जीती बाजी हार गए हम, जर में ताकत ऐसी थी...। कवि प्रेम पाल सागर ने, वासंती छटा बिखेरी, जड़वत सृष्टि में भरता जीवन का अलंकार है, ऋतुराज वसंत धरती को ब्रह्म का अलौकिक उपकार है...।
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कवि दलीप खरेरा ने अपनी तड़क का कुछ यूं इजहार किया, तड़प मेरी कुछ कम हो जाती, पलक तेरी गर नम हो जाती। कृष्ण कुमार निर्माण ने कहा, नाम लेके प्यार का भाई बैरी बणते देख लिए, साथ निर्माण की बात कर कै पीछा नै हटते देख लिए...। ममता प्रवीण ने, मां सरस्वती की सौगात है वसंत, नवजीवन की बरसात है वसंत। कवि अंग्रेज सिंह ने कहा, दुनिया दिन रात बम बनाने में लगी है, अपना नामोनिशां मिटाने में लगी है।
युवा शायर आशीष ताज ने, मेरे सामने बैठकर न जात पात कर, करनी है तो बस मुहब्बत की बात कर...। हास्य कवि दिलबाग ने गुदगुदाया, उनकी नजरों का जब-जब भी वार होगा। मनोज मधुरभाषी व युवा शायर गुलाब सिंह फक्कर, पूर्ण चंद शर्मा, प्रवीण सलारपुरिया, कुमारी शैलजा, मधु शर्मा, बलराज, महेंद्र कौशिक अशुंल राणा, सौरभ गुप्ता ने भी अपनी प्रस्तुति दी।