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आज लोग सेवा भी करते है तो सिर्फ दिखावे की : कविता दीदी
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- सेक्टर-सात में प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ सेमिनार
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेक्टर सात सेवा केंद्र व भारत विकास परिषद की ओर से राजयोग द्वारा मूल्यनिष्ठ समाज की पुर्नस्थापना विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में चंडीगढ़ से राजयोगिनी कविता दीदी ने शिरकत की। उन्होंने मौजूदा परिवेश की चर्चा करते हुए कहा कि आज कुछ लोग सेवा भी सिर्फ दिखावे के लिए करते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले के समय में लोग कहते थे नेकी कर कुएं में डाल, फिर उक्ति बदली कहने लगे नेकी कर खड्डे में डाल और फिर कहावत शुरु हुई नेकी कर दरिया में डाल, आज कहावत है नेकी कर जेब में डाल। आज लोग किसी की सेवा भी करते हैं तो दिखावे का और मान शान का ज्यादा ख्याल रख कर करते हैं।
सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी प्रेम दीदी ने कहा कि पुन: स्थापना का मतलब ही है जो चीज पहले थी अब नहीं है, उसे दोबारा स्थापित करना। सतयुग त्रेता में मूल्य पर चलने वाला समाज था, वहां के देवताओं को कहा ही जाता है सर्वगुण संपन्न, 16 कला संपूर्ण, परंतु आज हम देखते हैं कि मूल्यों का ह्रास हुआ है। आज समाज में मानवीय मूल्य, नैतिक मूल्य, सामाजिक मूल्य और आध्यात्मिक मूल्य नाममात्र रह गए हैं। अब फिर जरूरत है आत्माओं के अंतर्निहित मूल्यों को जगाने की। मुख्यातिथि धीरज भाटिया ने कहा कि आज हमें ज्ञान सागर में डुबकी लगाने का मौका मिला। इस मौके पर भारत विकास परिषद से पायल चौधरी, वरिष्ठ नागरिक मंच से सुरेश खन्ना, सीजीसी से प्रो. संतोष बक्शी, सीनियर सिटीजन एसोसिएशन से एससी वोहरा, गौरी दत्ता मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेक्टर सात सेवा केंद्र व भारत विकास परिषद की ओर से राजयोग द्वारा मूल्यनिष्ठ समाज की पुर्नस्थापना विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में चंडीगढ़ से राजयोगिनी कविता दीदी ने शिरकत की। उन्होंने मौजूदा परिवेश की चर्चा करते हुए कहा कि आज कुछ लोग सेवा भी सिर्फ दिखावे के लिए करते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले के समय में लोग कहते थे नेकी कर कुएं में डाल, फिर उक्ति बदली कहने लगे नेकी कर खड्डे में डाल और फिर कहावत शुरु हुई नेकी कर दरिया में डाल, आज कहावत है नेकी कर जेब में डाल। आज लोग किसी की सेवा भी करते हैं तो दिखावे का और मान शान का ज्यादा ख्याल रख कर करते हैं।
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सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी प्रेम दीदी ने कहा कि पुन: स्थापना का मतलब ही है जो चीज पहले थी अब नहीं है, उसे दोबारा स्थापित करना। सतयुग त्रेता में मूल्य पर चलने वाला समाज था, वहां के देवताओं को कहा ही जाता है सर्वगुण संपन्न, 16 कला संपूर्ण, परंतु आज हम देखते हैं कि मूल्यों का ह्रास हुआ है। आज समाज में मानवीय मूल्य, नैतिक मूल्य, सामाजिक मूल्य और आध्यात्मिक मूल्य नाममात्र रह गए हैं। अब फिर जरूरत है आत्माओं के अंतर्निहित मूल्यों को जगाने की। मुख्यातिथि धीरज भाटिया ने कहा कि आज हमें ज्ञान सागर में डुबकी लगाने का मौका मिला। इस मौके पर भारत विकास परिषद से पायल चौधरी, वरिष्ठ नागरिक मंच से सुरेश खन्ना, सीजीसी से प्रो. संतोष बक्शी, सीनियर सिटीजन एसोसिएशन से एससी वोहरा, गौरी दत्ता मौजूद रहे।
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