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अब तक दूसरों का छीना था चैन, अब खुद रहेेंगे बेचैन
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करनाल। पुलिस को झूठी शिकायत देकर दूसरों का चैन छीनने वाले 23 लोग अब खुद बेचैन रहेंगे। पुलिस ने थानों में झूठी शिकायत देने वाले 23 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया है। पुलिस ने इन पर कार्रवाई के लिए कोर्ट को पूरी जानकारी भेज दी गई है।
ये वे व्यक्ति हैं, जिन्होंने दुर्भावनापूर्ण या आपसी रंजिश का बदला लेने के लिये किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ झूठी शिकायत दी है या किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज करवाया है। पुलिस के विभिन्न पुलिस थानों की टीमों द्वारा 20 मामलों व शिकायतों में 23 आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय में परिवाद पेश किए गए हैं। इन 20 मामलों व शिकायतों में 15 महिला आरोपी व आठ पुरुष आरोपी शामिल हैं। यह कार्रवाई धारा 182 आईपीसी के प्रावधानों के तहत की गई है।
निर्दोष के खिलाफ झूठी शिकायत न दें : एसपी
एसपी गंगाराम पूनिया ने बताया कि इन आरोपियों द्वारा दी गई आपराधिक शिकायतें व दर्ज करवाए गए मामलों में करनाल पुलिस द्वारा निष्पक्ष, त्वरित व प्रभावी जांच की गई। विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर जांच में ये शिकायतें व मामले झूठे पाए गए थे। करनाल पुलिस की आमजन से अपील है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दुर्भावना पूर्ण या रंजिशन बदला लेने की नियत से किसी भी प्रकार की झूठी शिकायत न दें। झूठी शिकायत देने पर निर्दोष व्यक्ति के झूठे मामले में फंसने की संभावना रहती है और पुलिस का समय भी खराब होता है। अन्य मामलों की भी गहनता से जांच जारी है। इनमें से कोई मामला झूठा पाये जाने पर संबंधित के खिलाफ भी धारा 182 आईपीसी के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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ये है धारा 182-
एसपी गंगाराम पूनिया ने बताया कि जब कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी को या किसी पुलिस अधिकारी को ऐसी झूठी सूचना देगा जो सही नहीं है और वह सरकारी अधिकारी उसे सही मानकर कार्रवाई कर दे और किसी अन्य व्यक्ति को क्षति या नुकसान हो जाए या होने की संभावना हो। तब ऐसी सूचना देने वाला व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा। इसके धारा के तहत झूठी शिकायत देने वाले व्यक्ति के लिए सजा का प्रावधान भी किया गया है। इसके तहत ऐसे व्यक्ति को न्यायालय द्वारा छह महीने तक का कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
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ये वे व्यक्ति हैं, जिन्होंने दुर्भावनापूर्ण या आपसी रंजिश का बदला लेने के लिये किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ झूठी शिकायत दी है या किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज करवाया है। पुलिस के विभिन्न पुलिस थानों की टीमों द्वारा 20 मामलों व शिकायतों में 23 आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय में परिवाद पेश किए गए हैं। इन 20 मामलों व शिकायतों में 15 महिला आरोपी व आठ पुरुष आरोपी शामिल हैं। यह कार्रवाई धारा 182 आईपीसी के प्रावधानों के तहत की गई है।
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निर्दोष के खिलाफ झूठी शिकायत न दें : एसपी
एसपी गंगाराम पूनिया ने बताया कि इन आरोपियों द्वारा दी गई आपराधिक शिकायतें व दर्ज करवाए गए मामलों में करनाल पुलिस द्वारा निष्पक्ष, त्वरित व प्रभावी जांच की गई। विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर जांच में ये शिकायतें व मामले झूठे पाए गए थे। करनाल पुलिस की आमजन से अपील है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दुर्भावना पूर्ण या रंजिशन बदला लेने की नियत से किसी भी प्रकार की झूठी शिकायत न दें। झूठी शिकायत देने पर निर्दोष व्यक्ति के झूठे मामले में फंसने की संभावना रहती है और पुलिस का समय भी खराब होता है। अन्य मामलों की भी गहनता से जांच जारी है। इनमें से कोई मामला झूठा पाये जाने पर संबंधित के खिलाफ भी धारा 182 आईपीसी के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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ये है धारा 182-
एसपी गंगाराम पूनिया ने बताया कि जब कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी को या किसी पुलिस अधिकारी को ऐसी झूठी सूचना देगा जो सही नहीं है और वह सरकारी अधिकारी उसे सही मानकर कार्रवाई कर दे और किसी अन्य व्यक्ति को क्षति या नुकसान हो जाए या होने की संभावना हो। तब ऐसी सूचना देने वाला व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा। इसके धारा के तहत झूठी शिकायत देने वाले व्यक्ति के लिए सजा का प्रावधान भी किया गया है। इसके तहत ऐसे व्यक्ति को न्यायालय द्वारा छह महीने तक का कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।