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तीन फीसदी घटा 10वीं का परिणाम, 12वीं का पहले जैसा
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गगन तलवार
करनाल। सीबीएसई की ओर से जारी परीक्षा परिणाम में इस बार 12वीं का परिणाम पिछले वर्षों की तुलना में न बढ़ा न घटा। वहीं 10वीं कक्षा के परिणाम में तीन फीसदी तक गिरावट आई है। जबकि स्कूलों में विद्यार्थियों का पासिंग प्रतिशत बढ़ा है, बेहतर परिणाम देकर बेटों से ज्यादा बेटियों ने मान बढ़ाया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष कोरोना के कारण बिना परीक्षा जारी हुआ परिणाम 99 प्रतिशत से ऊपर था। इससे पहले 2020 में कक्षा 10वीं का परिणाम 98 प्रतिशत रहा। जो इस बार घटकर 95 प्रतिशत आ गया है। जबकि 2019 में 96 और 2018 में 98 प्रतिशत था। इसी तरह 12वीं का परिणाम 2020 में 90 प्रतिशत था, इस बार भी परिणाम इतना ही है। इससे पहले 2019 में 94 प्रतिशत था। जिले के 118 सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
पास विद्यार्थियों में 50 प्रतिशत बेटियां ज्यादा
दोनों कक्षाओं में पास होने वाले विद्यार्थियों में 50 प्रतिशत से ज्यादा बेटियां हैं। कक्षा 12वीं में पास हुए 6403 विद्यार्थियों में से 3412 और कक्षा 10वीं में पास हुए 8488 विद्यार्थियों में से 4317 छात्राएं हैं। खास बात यह है कि ज्यादातर छात्राओं के 95 प्रतिशत से ज्यादा अंक हैं।
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1157 विद्यार्थियों के हाथ लगी निराशा
परीक्षा परिणाम में दोनों कक्षाओं के कुल 1157 विद्यार्थियों को निराशा हाथ लगी है। कक्षा 12वीं में 656 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट और 55 फेल हुए हैं। वहीं कक्षा दसवीं में 398 की कंपार्टमेंट और 48 विद्यार्थी फेल हुए हैं। कंपार्टमेंट लेने वाले कई विद्यार्थी दो-दो विषयों में फेल हैं।
छह वर्षों में 10वीं की स्थिति खराब
पिछले छह वर्षों में कक्षा 10वीं की स्थिति इस बार ज्यादा खराब है। 2017 से लेकर अब तक सबसे कम परिणाम रहा है। वहीं कक्षा 12वीं की स्थिति औसतन है। 2017 से अब तक तीसरी बार 90 प्रतिशत परिणाम आया है। इससे कम कभी नहीं हुआ। 2019 में सर्वाधिक 94 और 2018 में 92 प्रतिशत रहा।
किस वर्ष कितना रहा परिणाम
कक्षा 10वीं
वर्ष परिणाम प्रतिशत में
2022 95
2021 99.77
2020 98
2019 96
2018 98
2017 97
कक्षा 12वीं
वर्ष प्रतिशत
2022 90
2021 99.5
2020 90
2019 94
2018 92
2017 90
(2021 का परिणाम बिना परीक्षा जारी हुआ था)
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करनाल। सीबीएसई की ओर से जारी परीक्षा परिणाम में इस बार 12वीं का परिणाम पिछले वर्षों की तुलना में न बढ़ा न घटा। वहीं 10वीं कक्षा के परिणाम में तीन फीसदी तक गिरावट आई है। जबकि स्कूलों में विद्यार्थियों का पासिंग प्रतिशत बढ़ा है, बेहतर परिणाम देकर बेटों से ज्यादा बेटियों ने मान बढ़ाया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष कोरोना के कारण बिना परीक्षा जारी हुआ परिणाम 99 प्रतिशत से ऊपर था। इससे पहले 2020 में कक्षा 10वीं का परिणाम 98 प्रतिशत रहा। जो इस बार घटकर 95 प्रतिशत आ गया है। जबकि 2019 में 96 और 2018 में 98 प्रतिशत था। इसी तरह 12वीं का परिणाम 2020 में 90 प्रतिशत था, इस बार भी परिणाम इतना ही है। इससे पहले 2019 में 94 प्रतिशत था। जिले के 118 सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
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पास विद्यार्थियों में 50 प्रतिशत बेटियां ज्यादा
दोनों कक्षाओं में पास होने वाले विद्यार्थियों में 50 प्रतिशत से ज्यादा बेटियां हैं। कक्षा 12वीं में पास हुए 6403 विद्यार्थियों में से 3412 और कक्षा 10वीं में पास हुए 8488 विद्यार्थियों में से 4317 छात्राएं हैं। खास बात यह है कि ज्यादातर छात्राओं के 95 प्रतिशत से ज्यादा अंक हैं।
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1157 विद्यार्थियों के हाथ लगी निराशा
परीक्षा परिणाम में दोनों कक्षाओं के कुल 1157 विद्यार्थियों को निराशा हाथ लगी है। कक्षा 12वीं में 656 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट और 55 फेल हुए हैं। वहीं कक्षा दसवीं में 398 की कंपार्टमेंट और 48 विद्यार्थी फेल हुए हैं। कंपार्टमेंट लेने वाले कई विद्यार्थी दो-दो विषयों में फेल हैं।
छह वर्षों में 10वीं की स्थिति खराब
पिछले छह वर्षों में कक्षा 10वीं की स्थिति इस बार ज्यादा खराब है। 2017 से लेकर अब तक सबसे कम परिणाम रहा है। वहीं कक्षा 12वीं की स्थिति औसतन है। 2017 से अब तक तीसरी बार 90 प्रतिशत परिणाम आया है। इससे कम कभी नहीं हुआ। 2019 में सर्वाधिक 94 और 2018 में 92 प्रतिशत रहा।
किस वर्ष कितना रहा परिणाम
कक्षा 10वीं
वर्ष परिणाम प्रतिशत में
2022 95
2021 99.77
2020 98
2019 96
2018 98
2017 97
कक्षा 12वीं
वर्ष प्रतिशत
2022 90
2021 99.5
2020 90
2019 94
2018 92
2017 90
(2021 का परिणाम बिना परीक्षा जारी हुआ था)