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Karnal News: तीन करोड़ रुपये गड्ढों में गए सड़कों की हालत खराब ही रही
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तीन करोड़ रुपये गड्ढों में गए सड़कों की हालत खराब ही रही
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम ने गड्ढों को भरने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च किए फिर भी सड़कों की हालत नहीं सुधरी। इसके लिए वार्ड-वार लाखों के टेंडर की फाइलें मंजूर की गईं लेकिन हर सड़क पर कीचड़ और गड्ढे हैं। शहर का ऐसा कोई इलाका नहीं जहां सड़कें चलने लायक हों। जगह-जगह किए गए पेचवर्क कुछ दिन में उखड़ गए। जहां दुरुस्त करने की बात थी वहां मिट्टी और बजरी डालकर इतिश्री कर ली गई। पहली ही बारिश ने इसकी पोल खोल दी और सड़कें फिर से गड्ढों में तब्दील हो गईं।
हर सड़क पर खतरा, हर मोड़ पर हादसा
पुराने बस स्टैंड, आंबेडकर चौक, कर्ण कैनाल रोड, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज मार्ग, जीटी रोड, सेक्टर-13 से सेक्टर-6, रामनगर चौक, प्रेम नगर, जावन नगर, मंगालपुरा, काछवा रोड कहने को तो मुख्य सड़कें हैं लेकिन हालत गांव की टूटी गलियों से भी बदतर। हर मोड़ पर ये गड्ढ़े हादसों की वजह बन जाते हैं। दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं, चार पहिया वाहन गड्ढों में झूलते हैं और पैदल चलने वालों को हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। रात को तो गड्ढा दिखाई नहीं देता।
नगर निगम की ओर से दावे किए गए थे कि शहर की सभी मुख्य सड़कें गड्ढा मुक्त की जाएंगी। कई वार्डों में बजट भी पास हुआ, मरम्मत की फाइलें भी बनीं, लेकिन नतीजा यह कि आज शहर की एक भी सड़क ऐसी नहीं है जो पूरी तरह गड्ढा मुक्त हो।
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करनाल। नगर निगम ने गड्ढों को भरने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च किए फिर भी सड़कों की हालत नहीं सुधरी। इसके लिए वार्ड-वार लाखों के टेंडर की फाइलें मंजूर की गईं लेकिन हर सड़क पर कीचड़ और गड्ढे हैं। शहर का ऐसा कोई इलाका नहीं जहां सड़कें चलने लायक हों। जगह-जगह किए गए पेचवर्क कुछ दिन में उखड़ गए। जहां दुरुस्त करने की बात थी वहां मिट्टी और बजरी डालकर इतिश्री कर ली गई। पहली ही बारिश ने इसकी पोल खोल दी और सड़कें फिर से गड्ढों में तब्दील हो गईं।
हर सड़क पर खतरा, हर मोड़ पर हादसा
पुराने बस स्टैंड, आंबेडकर चौक, कर्ण कैनाल रोड, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज मार्ग, जीटी रोड, सेक्टर-13 से सेक्टर-6, रामनगर चौक, प्रेम नगर, जावन नगर, मंगालपुरा, काछवा रोड कहने को तो मुख्य सड़कें हैं लेकिन हालत गांव की टूटी गलियों से भी बदतर। हर मोड़ पर ये गड्ढ़े हादसों की वजह बन जाते हैं। दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं, चार पहिया वाहन गड्ढों में झूलते हैं और पैदल चलने वालों को हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। रात को तो गड्ढा दिखाई नहीं देता।
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नगर निगम की ओर से दावे किए गए थे कि शहर की सभी मुख्य सड़कें गड्ढा मुक्त की जाएंगी। कई वार्डों में बजट भी पास हुआ, मरम्मत की फाइलें भी बनीं, लेकिन नतीजा यह कि आज शहर की एक भी सड़क ऐसी नहीं है जो पूरी तरह गड्ढा मुक्त हो।
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