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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Threats were then asked to pay, DC Complaint

वेतन मांगा तो मिली धमकियां, डीसी से शिकायत

Tue, 10 Jun 2014 11:53 PM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल Updated Tue, 10 Jun 2014 11:53 PM IST
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण में लगी सुप्रीम कंपनी की ओर
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से चौदह कर्मचारियों को निकालने के फरमान पर कर्मचारी अपना हक मांगने लगे हैं। मंगलवार को इसकी शिकायत डीसी बलराज सिंह, कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. सुरेंद्र कश्यप, लेबर विभाग में की है।

कर्मचारियों को धमकी मिलने के बाद पुलिस को भी शिकायत कर दी है। कंपनी द्वारा हटाने का फरमान जारी करने पर अन्य कर्मचारियों ने भी साथ देने का एलान कर दिया है। करनाल में बनने वाला मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू से ही सुर्खियों में रहा है।

पहले बिल रोकने के नाम पर चार महीने काम बंद रहा। अब कर्मचारी ही वेतन न मिलने के आरोप लगा रहे हैं। सोमवार को भी दो बार स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर काम चालू कराया। डीसी को सौंपी शिकायत में कर्मचारी रितेश कुमार, प्रदीप शुक्ला, सनीकांत, भरत, अंकित कुमार, सुमित कुमार ने लिखा है कि बिना सूचना हटाए स्टाफ को पांच महीने से नहीं मिले वेतन एवं कंपनी नियमानुसार रेगुलर स्टॉफ को 45 दिनों का वेतन व बोनस के साथ भुगतान कराया जाए। सुप्रीम कंपनी के 29 कर्मचारी कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट पर कार्यरत हैं।

सुप्रीम कंपनी ने 10 मई 2014 को पूरा 137 करोड़ 50 लाख रुपये का काम डीएसआर कंपनी को दे दिया है। जिसके बाद सात जून को बिना सूचना के रीजनल ऑफिस गुड़गांव के सुप्रीम कंपनी ने ड्राइवर के माध्यम से फुल एंड फाइनल का पीडीसी चेक, जो 30 जून एवं 25 जुलाई का लेते हुए हमारे गेस्ट हाउस आए।

कुल 21 स्टाफ में से 10 रेगुलर एवं 11 ओएसई स्टाफ है। ओएसई स्टाफ का फरवरी 2014 तक एवं रेगुलर का जनवरी 2014 तक की सैलरी दी गई है। अगर सुप्रीम कंपनी का इतिहास देखे तो 100 पीडीसी चेक में 90 प्रतिशत चेक बाउंस होते हैं। सुप्रीम कंपनी के नियमानुसार बिना सूचना दिए रेगुलर स्टाफ को 45 दिनों का वेतन एवं पूर्व से काटे गए बोनस के साथ फुल एंड फाइनल दिया जाता है।

लेकिन कंपनी ऐसा नहीं कर रही है। सुप्रीम कंपनी के मनेजमेंट और वर्तमान में कल्पना चावला प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे डीएसआर कंपनी ने नौ जून शाम को मारने व झूठे केस में फंसाने की धमकियां दी जा रही है।

वेतन के लिए कानून का सहारा
मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य में तीन कंपनियां कार्य कर रही हैं। जेएसएम ने 282 करोड़, सुप्रीम ने 137 करोड़ 550 लाख और नाईस ने छह करोड़ रुपये का काम करना है। मलबा उठाने के लिए एक कंपनी को अढ़ाई करोड़ रुपये लिए हैं। सुप्रीम कंपनी ने पहले बिल पास न करने पर काम बंद रखा। वेतन न मिलने पर कर्मचारी परेशान हैं। अब उनका वेतन भी नहीं दे रही और उनको नौकरी से निकाल रही है। जिसके बाद कर्मचारियों ने कानून का सहारा लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि अपना हक कतई नहीं छोडे़ंगे।

कर्मचारियों के विरोध पर पहुंचे अफसर
14 कर्मचारियों को निकाले जाने के फरमान पर कर्मचारियों ने भी विरोध का बिगुल बजा दिया है। मंगलवार को गुड़गांव से सुप्रीम कंपनी के एचआर से पराग, सीबी जयसवाल, राकेश गुप्ता, साइट इंचार्ज राजन पहुंचे और चेक से वेतन देने की बात कहीं। कर्मचारियों ने अफसरों को बोल दिया कि कैश पेमेंट ली जाएगी। कंपनी पर हमें भरोस नहीं है और चैक बाउंस होने के अधिक चांस हैं।
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