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सुख की इच्छा रखने वाले शिव का भजन करें : अजीत
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श्री हनुमान मंदिर में महा शिव पुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सेक्टर-14 स्थित दक्षिण पंच मुखी हनुमान मंदिर में श्रावण माह पर शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन पंडित अजीत शास्त्री ने कहा कि सुख की इच्छा रखने वाले लोगों को शिव का भजन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यज्ञ दत्त नाम से प्रसिद्ध एक ब्राह्मण थे। वह बड़े सदाचारी थे, उनका एक पुत्र, जिसका नाम गुण निधि था। वह दुराचारी व जुआरी हो गया था। पिता ने अपने पुत्र को त्याग दिया। वह घर से निकल गया। और कई दिनों तक भूखा भटकता रहा।
एक दिन वह नैवेद्य चुराने की इच्छा से एक शिव मंदिर में गया। वहां उसने अपने वस्त्र को जलाकर उजाला किया। यह मानो उसके द्वारा भगवान शिव के लिए दीपदान किया गया। तत्पश्चात वह चोरी मे पकड़ा गया और उसे प्राण दंड मिला। अपने कुकर्मों के कारण वह यमदूत द्वारा बांधा गया। भगवान शंकर के पार्षद वहां आ पहुंचे और उन्होंने उसे उनके बंधन से छुड़ा दिया। शिव पार्षदों के संग से उसका ह्रदय शुद्ध हो गया था। अतः वह उन्हीं के साथ तत्काल शिवलोक में चला गया।
वहां सारे दिव्य भोगों का उपभोग किया तथा उमा शिव का सेवन करके कालांतर में वह कलिंग राज अरिंदम का पुत्र हुआ। उसका नाम था दम। वह निरंतर भगवान शिव की सेवा में लगा रहता था। बालक होने पर भी वह दूसरे बालकों के साथ शिव का भजन किया करता था। युवावस्था को प्राप्त हुआ। पिता के परलोक गमन के पश्चात राज सिंहासन पर बैठा। भगवान शिव के लिए किया हुआ थोड़ा सा भी पूजन या आराधन समयानुसार महान फल देता है, ऐसा जानकर उत्तम सुख की इच्छा रखने वाले लोगों को शिव का भजन अवश्य करना चाहिए।
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करनाल। सेक्टर-14 स्थित दक्षिण पंच मुखी हनुमान मंदिर में श्रावण माह पर शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन पंडित अजीत शास्त्री ने कहा कि सुख की इच्छा रखने वाले लोगों को शिव का भजन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यज्ञ दत्त नाम से प्रसिद्ध एक ब्राह्मण थे। वह बड़े सदाचारी थे, उनका एक पुत्र, जिसका नाम गुण निधि था। वह दुराचारी व जुआरी हो गया था। पिता ने अपने पुत्र को त्याग दिया। वह घर से निकल गया। और कई दिनों तक भूखा भटकता रहा।
एक दिन वह नैवेद्य चुराने की इच्छा से एक शिव मंदिर में गया। वहां उसने अपने वस्त्र को जलाकर उजाला किया। यह मानो उसके द्वारा भगवान शिव के लिए दीपदान किया गया। तत्पश्चात वह चोरी मे पकड़ा गया और उसे प्राण दंड मिला। अपने कुकर्मों के कारण वह यमदूत द्वारा बांधा गया। भगवान शंकर के पार्षद वहां आ पहुंचे और उन्होंने उसे उनके बंधन से छुड़ा दिया। शिव पार्षदों के संग से उसका ह्रदय शुद्ध हो गया था। अतः वह उन्हीं के साथ तत्काल शिवलोक में चला गया।
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वहां सारे दिव्य भोगों का उपभोग किया तथा उमा शिव का सेवन करके कालांतर में वह कलिंग राज अरिंदम का पुत्र हुआ। उसका नाम था दम। वह निरंतर भगवान शिव की सेवा में लगा रहता था। बालक होने पर भी वह दूसरे बालकों के साथ शिव का भजन किया करता था। युवावस्था को प्राप्त हुआ। पिता के परलोक गमन के पश्चात राज सिंहासन पर बैठा। भगवान शिव के लिए किया हुआ थोड़ा सा भी पूजन या आराधन समयानुसार महान फल देता है, ऐसा जानकर उत्तम सुख की इच्छा रखने वाले लोगों को शिव का भजन अवश्य करना चाहिए।
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