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Karnal News: सियासी बिसात पर होगी अनुभव, जोश की जंग
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- पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मुकाबले कांग्रेस ने कश्मकश के बाद उतारा युवा चेहरा
- अब गैर पंजाबी वोटर को साधने वाले के लिए आसान होगी संसद की राह
मोहित धुपड़
करनाल। संसदीय सीट करनाल में अब अनुभव और जोश के बीच रोचक मुकाबला दिखेगा। लंबी कशमकश के बाद कांग्रेस ने इस सीट पर जोश और उत्साह से लबरेज युवा चेहरा दिव्यांशु बुद्धिराजा को चुनावी रण में भाजपा के प्रत्याशी एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मुकाबले उतारा है।
अब इस मुकाबले में संगठन और राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी पूर्व सीएम मनोहर लाल का लंबा अनुभव है तो दूसरी ओर पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से निकले दिव्यांशु का जोश। दिव्यांशु पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे व राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। उन्हीं से प्रेरित होकर 2013 में दिव्यांशु ने दि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ज्वाइन की थी। छात्र राजनीति के बाद दिव्यांशु करीब दो वर्ष पहले हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष चुने गए थे।
काफी समय से दिव्यांशु कांग्रेस में एक बड़े युवा पंजाबी चेहरे के रूप में खुद को प्रोजेक्ट कर रहे हैं और इसी के बूते वे करनाल में भाजपा के पंजाबी चेहरे मनोहर लाल के सामने टिकट पाने में कामयाब भी हुए। पार्टी सूत्रों की मानें तो हुड्डा खेमे ने करनाल सीट से अपने दो समर्थकों कुलदीप शर्मा के बेटे चाणक्य पंडित और युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा का नाम चला रखा था। पूर्व मंत्री सैलजा व रणदीप सुरजेवाला के समर्थक भी टिकट के लिए कतार में थे मगर टिकट वितरण में दबदबा हुड्डा खेमे का ही दिखा।
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सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस हाईकमान के समक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा करनाल सीट से ब्राह्मण या पंजाबी चेहरे को ही टिकट देने के लिए पुरजोर वकालत कर रहे थे। चार बार के सांसद रहे चिरंजीलाल शर्मा के पौत्र चाणक्य पंडित बतौर ब्राह्मण और युकां के प्रदेशाध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा बतौर पंजाबी चेहरा कतार में थे मगर यहां दिव्यांशु के लिए दीपेंद्र हुड्डा भी जोर लगा रहे थे। युवाओं में अच्छी पैठ, चर्चित शख्सियत और हुड्डा खेमे की जोरदार पैरवी के बूते दिव्यांशु टिकट पाने में कामयाब रहे। अब देखना यह होगा कि इस सियासी समर के दौरान अनुभव और जोश की जंग में जीत किसकी होती है।
भाजपा का जातिगत गणित कांग्रेस को देगा चुनौती
करनाल संसदीय सीट पर पिछले चुनावों का परिदृश्य देखें तो इस सीट पर सियासी दलों ने ब्राह्मण और पंजाबी प्रत्याशियों को ही तरजीह दी है। यहां से अधिकतर सांसद भी इन दोनों बिरादरियों से ही बने हैं। इस बार भी भाजपा और कांग्रेस ने पंजाबी चेहरों पर ही दांव खेला है मगर जातिगत समीकरणों के गणित में भाजपा का दांव कांग्रेस को बड़ी चुनौती देने वाला दिख रहा है। दोनों पंजाबी चेहरों के बाद यह तय हो गया कि करनाल सीट पर अब जो भी गैर पंजाबी बिरादरी को साधेगा, जीत उसी की होगी, क्योंकि पंजाबी वोट का बंटना दोनों प्रत्याशियों में तय है।
भाजपा ने इसी के चलते बड़ा दांव खेलते हुए पिछड़ी जाति से सीएम बने नायब सिंह सैनी को करनाल विधानसभा सीट से ही उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया है, यानि मौजूदा सीएम के रूप में पिछड़ी बिरादरी का एक बड़ा चेहरा करनाल सीट से ही उपचुनाव लड़ेगा।
यह उपचुनाव भी लोकसभा के साथ ही होगा। जाहिर है कि संसदीय सीट पर पिछड़ी बिरादरी का बड़ा वोटबैंक भी भाजपा की ओर खिसक सकता है। गौरतलब है कि यह सीट पूर्व सीएम मनोहर लाल की थी। अब चूंकि वे लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं, तो उन्होंने इस सीट से बतौर विधायक इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद करनाल सीट पर विधानसभा का उपचुनाव होना है।
उधर कांग्रेस को मजबूती इस बात से मिलेगी कि उनका प्रत्याशी बतौर इंडिया गठबंधन का प्रत्याशी होगा। इसलिए करनाल सीट से आम आदमी पार्टी का वोट बैंक कांग्रेस के खाते में जाएगा। जजपा और इनेलो ने अभी तक अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। अब अनुसूचित जाति, बनिया, जाट, जैन और मुस्लिम बिरादरी के मतदाताओं में अपनी मजबूत पैठ बनाकर बढ़त लेने की रणनीति पर काम करना होगा।
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- अब गैर पंजाबी वोटर को साधने वाले के लिए आसान होगी संसद की राह
मोहित धुपड़
करनाल। संसदीय सीट करनाल में अब अनुभव और जोश के बीच रोचक मुकाबला दिखेगा। लंबी कशमकश के बाद कांग्रेस ने इस सीट पर जोश और उत्साह से लबरेज युवा चेहरा दिव्यांशु बुद्धिराजा को चुनावी रण में भाजपा के प्रत्याशी एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मुकाबले उतारा है।
अब इस मुकाबले में संगठन और राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी पूर्व सीएम मनोहर लाल का लंबा अनुभव है तो दूसरी ओर पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से निकले दिव्यांशु का जोश। दिव्यांशु पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे व राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। उन्हीं से प्रेरित होकर 2013 में दिव्यांशु ने दि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ज्वाइन की थी। छात्र राजनीति के बाद दिव्यांशु करीब दो वर्ष पहले हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष चुने गए थे।
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काफी समय से दिव्यांशु कांग्रेस में एक बड़े युवा पंजाबी चेहरे के रूप में खुद को प्रोजेक्ट कर रहे हैं और इसी के बूते वे करनाल में भाजपा के पंजाबी चेहरे मनोहर लाल के सामने टिकट पाने में कामयाब भी हुए। पार्टी सूत्रों की मानें तो हुड्डा खेमे ने करनाल सीट से अपने दो समर्थकों कुलदीप शर्मा के बेटे चाणक्य पंडित और युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा का नाम चला रखा था। पूर्व मंत्री सैलजा व रणदीप सुरजेवाला के समर्थक भी टिकट के लिए कतार में थे मगर टिकट वितरण में दबदबा हुड्डा खेमे का ही दिखा।
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सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस हाईकमान के समक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा करनाल सीट से ब्राह्मण या पंजाबी चेहरे को ही टिकट देने के लिए पुरजोर वकालत कर रहे थे। चार बार के सांसद रहे चिरंजीलाल शर्मा के पौत्र चाणक्य पंडित बतौर ब्राह्मण और युकां के प्रदेशाध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा बतौर पंजाबी चेहरा कतार में थे मगर यहां दिव्यांशु के लिए दीपेंद्र हुड्डा भी जोर लगा रहे थे। युवाओं में अच्छी पैठ, चर्चित शख्सियत और हुड्डा खेमे की जोरदार पैरवी के बूते दिव्यांशु टिकट पाने में कामयाब रहे। अब देखना यह होगा कि इस सियासी समर के दौरान अनुभव और जोश की जंग में जीत किसकी होती है।
भाजपा का जातिगत गणित कांग्रेस को देगा चुनौती
करनाल संसदीय सीट पर पिछले चुनावों का परिदृश्य देखें तो इस सीट पर सियासी दलों ने ब्राह्मण और पंजाबी प्रत्याशियों को ही तरजीह दी है। यहां से अधिकतर सांसद भी इन दोनों बिरादरियों से ही बने हैं। इस बार भी भाजपा और कांग्रेस ने पंजाबी चेहरों पर ही दांव खेला है मगर जातिगत समीकरणों के गणित में भाजपा का दांव कांग्रेस को बड़ी चुनौती देने वाला दिख रहा है। दोनों पंजाबी चेहरों के बाद यह तय हो गया कि करनाल सीट पर अब जो भी गैर पंजाबी बिरादरी को साधेगा, जीत उसी की होगी, क्योंकि पंजाबी वोट का बंटना दोनों प्रत्याशियों में तय है।
भाजपा ने इसी के चलते बड़ा दांव खेलते हुए पिछड़ी जाति से सीएम बने नायब सिंह सैनी को करनाल विधानसभा सीट से ही उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया है, यानि मौजूदा सीएम के रूप में पिछड़ी बिरादरी का एक बड़ा चेहरा करनाल सीट से ही उपचुनाव लड़ेगा।
यह उपचुनाव भी लोकसभा के साथ ही होगा। जाहिर है कि संसदीय सीट पर पिछड़ी बिरादरी का बड़ा वोटबैंक भी भाजपा की ओर खिसक सकता है। गौरतलब है कि यह सीट पूर्व सीएम मनोहर लाल की थी। अब चूंकि वे लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं, तो उन्होंने इस सीट से बतौर विधायक इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद करनाल सीट पर विधानसभा का उपचुनाव होना है।
उधर कांग्रेस को मजबूती इस बात से मिलेगी कि उनका प्रत्याशी बतौर इंडिया गठबंधन का प्रत्याशी होगा। इसलिए करनाल सीट से आम आदमी पार्टी का वोट बैंक कांग्रेस के खाते में जाएगा। जजपा और इनेलो ने अभी तक अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। अब अनुसूचित जाति, बनिया, जाट, जैन और मुस्लिम बिरादरी के मतदाताओं में अपनी मजबूत पैठ बनाकर बढ़त लेने की रणनीति पर काम करना होगा।